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योजना आयोग ने किया साल में 84 लाख रुपये का नाश्ता

 
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योजना आयोग ने किया साल में 84 लाख रुपये का नाश्ता
नई दिल्ली: योजना आयोग जहां गांव में रहने वालों के लिए 22 रुपये जीवन यापन के लिए पर्याप्त मानता है, वहीं वह अपने यहां नाश्ते पर जितना खर्च करता है, वह औसतन प्रति कर्मचारी प्रतिदिन करीब 17 रुपये है।

सूचना के अधिकार के तहत हाल में मिली जानकारी के अनुसार, योजना आयोग ने 426 दिनों में सिर्फ जलपान पर 84,18,573 रुपये खर्च कर दिया। संसद में 25 अगस्त, 2011 को पूछे गए अ-तारांकित प्रश्न संख्या 2533 के मुताबिक, आयोग में कर्मचारियों की कुल संख्या 1160 थी। इस तरह से प्रति कर्मचारी प्रतिदिन खर्च औसतन 17.04 रुपये आता है।

इससे पहले भी आयोग का अपने मुख्यालय में दो शौचालयों की मरम्मत पर 35 लाख रुपये खर्च किया जाना खासा चर्चा में रहा और उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। दूसरी ओर, 22 रुपये प्रतिदिन जीवन यापन खर्च के आंकड़े पर हंगामा होने पर सरकार ने इसकी समीक्षा करने की बात कही है।

जिस तरह से जीवन यापन के दौरान प्रति व्यक्ति खर्च में मेहमान नवाजी का खर्च भी आता है, उसी प्रकार से योजना आयोग ने यह राशि केवल अपने कर्मचारियों को नाश्ता कराने पर खर्च नहीं किया, बल्कि इसमें देश की योजनाओं एवं नीति निर्धारण की प्रक्रिया में उच्च स्तरीय मंत्रणाओं का संचालन भी इसमें शामिल है। इसमें प्रधानमंत्री के साथ देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी होती है।

बहरहाल, आयोग से यह जानकारी सूचना के अधिकार के तहत हिसार स्थित आरटीआई कार्यकर्ता रमेश वर्मा के सवाल के जवाब में आई है। वर्मा ने योजना आयोग एवं अन्य मंत्रालयों से पूछा था कि 1 अप्रैल, 2011 से 30 मई, 2012 के दौरान बैठकों में चाय, स्नैक्स, बोतलबंद पानी एवं अन्य खाद्य पदार्थों पर कितना खर्च आया। जलपान पर गृह मंत्रालय ने योजना आयोग से भी अधिक खर्च किया है। गृह मंत्रालय ने 14 महीने में 426 दिनों में बैठकों के दौरान चाय नाश्ते पर 88 लाख 83 हजार 172 रुपये खर्च किया।

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