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थम गया 'रोमांस के बादशाह' यश चोपड़ा का ‘सिलसिला’

 
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थम गया 'रोमांस के बादशाह' यश चोपड़ा का ‘सिलसिला’

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मुंबई: रोमांस पर आधारित फिल्मों के बादशाह दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध फिल्म निर्माता निर्देशक एवं पटकथा लेखक यश चोपड़ा का संक्षिप्त बीमारी के बाद रविवार को मुम्बई के लीलावती अस्पताल में निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। यश चोपड़ा डेंगू से पीड़ित थे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर फैल गई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यश चोपड़ा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।

यश चोपड़ा का अंतिम संस्कार सोमवार को चंदनवाड़ी श्मशान घाट में होगा।

डेंगू की शिकायत के चलते यश चोपड़ा को 13 अक्टूबर को मुम्बई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके परिवार में पत्नी पामेला चोपड़ा एवं दो लड़के आदित्य एवं उदय हैं।

यशराज फिल्म्स द्वारा जारी बयान के अनुसार, "बड़े दुख से सूचित करना पड़ रहा है कि यश चोपड़ा का निधन हो गया। उन्होंने रविवार शाम 5.30 बजे अंतिम सांस ली।" जैसे ही महान फिल्मकार के निधन की खबर फैली हर तरफ शोक की लहर दौड़ पड़ी।

प्रधानमंत्री ने यश चोपड़ा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "उनके पास सौंदर्यबोध की प्रतिभा थी जिसकी वजह से उनकी फिल्में अद्वितीय थीं। वह जिस प्रभावशाली ढंग से प्रेम एवं सामाजिक नाटक को कहते थे वह बेजोड़ है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि यश चोपड़ा ने भारतीय सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया और उन्हें कई देशों द्वारा सम्मानित भी किया गया।

फिल्मकार महेश भट्ट ने यश चोपड़ा के निधन को बॉलीवुड की महान क्षति बताया। भट्ट ने कहा, "मेरे भाई मुकेश भट्ट ने मुझे 6.30 बजे फोन किया और वह रोने लगा। उसने मुझे बताया कि यशजी का निधन हो गया। वह उनके बेहद नजदीक था। यह बहुत दुखद और बड़ी क्षति है।"

फिल्म के क्षेत्र में अपने अविस्मरणीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2001 में दादा साहब फाल्के एवं 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।

यशराज चोपड़ा का जन्म 21 सितम्बर 1932 को अविभाजित भारत के लाहौर शहर में हुआ था। यशराज ने अपना फिल्मी करियर अपने बड़े भाई बीआर चोपड़ा (बल राज चोपड़ा) के सहायक के तौर पर किया।

यशराज ने बीआर फिल्म्स के तले बनी फिल्म 'धूल का फूल' के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यश ने बीआर फिल्म्स की जबरदस्त सफल फिल्म 'वक्त' के अलावा अमिताभ बच्चन अभिनीत 'दीवार' का भी निर्देशन किया। इस फिल्म ने अमिताभ को एंग्री यंग मैन के खिताब से नवाजा।

यशराज ने 1973 में यशराज फिल्म्स से खुद का बैनर स्थापित किया और एक से बढ़कर एक फिल्में दी। प्रेम कहानी को पिरोने के जादूगर यशराज ने 'दाग', 'त्रिशूल', 'कभी-कभी', 'चांदनी', 'डर', 'दिल तो पागल है', 'मोहब्बतें' एवं 'वीर जारा' जैसी फिल्मों का निर्माण एवं निर्देशन किया। यशराज की फिल्में अपने संगीत के जरिए दर्शकों के दिलों में जगह बनाने में कामयाब रहीं।

इस दिनों यश चोपड़ा 'जब तक है जान' की शूटिंग में व्यस्त थे। स्वास्थ्य खराब होने के कारण फिल्म की शूटिंग के कुछ हिस्सों की शूटिंग को रोक दिया गया था। उन्होंने इस फिल्म के साथ ही फिल्म निर्माण से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

यशराज को अपने 50 साल के फिल्मी करियर में छह राष्ट्रीय पुरस्कार एवं 11 फिल्म फेयर पुरस्कारों से नवाजा गया था।

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