आप यहां हैं : होम » फिल्मी है »

Go Social with Facebook Close

Our Social Reader lets you keep track of your favorite NDTV content (text, photos & videos) on your Facebook Timeline, and discover new content with friends. Read FAQs

NDTV

Facebook

Go Social with Facebook Close

Our Social Reader lets you keep track of your favorite NDTV content (text, photos & videos) on your Facebook Timeline, and discover new content with friends. Read FAQs

NDTV

Facebook

Enable Social Reading
No, Thanks

चेहरे पर मुस्कान लाएगी 'फेरारी की सवारी'

 
email
email
चेहरे पर मुस्कान लाएगी 'फेरारी की सवारी'

PLAYClick to Expand & Play

मुंबई: एक महीने में 90 हज़ार रुपये से कम कमाने वाले 'गरीब' पारसी परिवार की कहानी है 'फेरारी की सवारी'... एक ईमानदार क्लर्क शरमन जोशी, यानी रुस्तम रूसी को डेढ़ लाख रुपये चाहिए, ताकि वह अपने होनहार बेटे को क्रिकेट ट्रेनिंग के लिए विदेश भेज सके... तभी रूसी को एक ऑफर मिलता है कि अगर वह कॉर्पोरेटर के बेटे को उसकी शादी के दिन घोड़ी के बजाए मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की फेरारी कार में सवारी करा दे, तो डेढ़ लाख रुपये मिल जाएंगे।

रूसी के पिता देबू, यानी बोमन ईरानी किसी जमाने में मशहूर क्रिकेटर रहै हैं, सो, रूसी क्रिकेट का ही वास्ता देकर सचिन के घर फेरारी मांगने जाता है, लेकिन सचिन की गैरमौजूदगी में वह इतनी आसानी से कार चुरा लेता है, जैसे शोरूम से खरीदकर निकला हो... गलत ट्रैफिक सिग्नल क्रॉस कर जब यह ईमानदार क्लर्क खुद का चालान बनाने की जिद करता है, तब भी फिल्म उतनी ही अनरियलिस्टिक और इम्प्रैक्टिकल लगती है... समझना कठिन है, क्यों राइटर राजकुमार हिरानी सिर्फ अच्छी-अच्छी बातें दिखाना चाहते हैं... तीन करोड़ की कार चोरी के बाद भी क्रिकेटर के नौकर और सिक्योरिटी गार्ड चोरी की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवाते...

लेकिन कहानी की इन कमियों को डायरेक्टर राजेश मापुसकर ने ढेरों स्ट्रॉन्ग इमोशनल और कॉमिक सीन्स से ढक दिया है... खासकर तब, जब दादाजी के रोल में बोमन ईरानी अपने पोते को क्रिकेटर बनने से रोकते हैं... फिर यही दादा गली में पोते की क्रिकेटिंग क्षमता का इम्तिहान लेता है... क्रिकेट की टिप्स देते-देते रुक जाता है, और पोते के लिए मदद मांगने धोखेबाज दोस्त के दर पर चला जाता है... बोमन की एक्टिंग की जितनी तारीफ की जाए कम है, शरमन ने नपी-तुली एक्टिंग की है, लेकिन कॉर्पोरेटर और उसके बेटे के रोल में नीलेश दिवेकर ज़्यादा इम्प्रेसिव हैं...

'मुन्नाभाई एमबीबीएस', 'लगे रहे मुन्नाभाई' और '3 इडियट्स' के मेकर्स द्वारा बनाई गई यह फिल्म फेरारी कार को बैलगाड़ी से खींचने वाले सीन की वजह से पिछले दिनों विवादों में भी रही, लेकिन फिल्म देखने के बाद मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट और दिल में खुशी थी और ऐसे में हर दर्शक छोटी-मोटी कमियों को नज़रअंदाज़ कर देता है... सो, 'फेरारी की सवारी' के लिए हमारी रेटिंग है 3 स्टार...

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...


Advertisement