देखने लायक है 'काई पो चे'
फिल्म की कहानी तीन दोस्तों की है, जो साथ मिलकर एक दुकान खोलते हैं, जहां खेल कूद से जुड़ा सामान बिकता है। सुशांत सिंह राजपूत का पैशन क्रिकेट है। वह अपने क्षेत्र के बच्चों को क्रिकेट की ट्रेनिंग देकर आगे बढ़ाना चाहते हैं। दूसरे हैं, राजकुमार यादव, जिनका दिमाग हिसाब-किताब और प्लैनिंग में ज्यादा चलता है।
तीसरे हैं अमित साध, जो अपने इन दो दोस्तों यानी सुशांत और राजकुमार पर दिल से विश्वास करते हैं। अमित अपने मामा जो राजनीति से जुड़े हैं, उनका हाथ भी बंटाते हैं। पूरी फिल्म के दौरान इन तीनों दोस्तों के रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं और फिर कुछ ऐसा होता है, जहां सामाजिक उथल-पुथल इन तीनों की जिंदगी पर गहरा असर छोड़ जाती है।
अभिषेक कपूर ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह एक अच्छे निर्देशक हैं। फिल्म में सुशांत, अमित और राजकुमार यादव की परफॉरमेंस बेहतरीन है। बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है। गीतकार स्वानंद किरकिरे के बोल और अमित त्रिवेदी का संगीत सुनने में अच्छा लगा।
फिल्म में अच्छी सिनेमेटोग्राफ़ी है, पर फिल्म का पेस जरा धीमा है। फर्स्ट हाफ में ज्यादा कुछ देखने को नहीं मिला। कमी या तो स्क्रीनप्ले में रह गई या स्क्रिप्ट में कुछ और मसाला डालने की जरूरत थी। 'काई पो चे' एक ऐसी फ़िल्म है, जो अंत में अपने आपको टटोलने पर मजबूर कर सकती है। फिल्म को हमारी तरफ से 3 स्टार...
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