अंजाम तक नहीं पहुंचती है 'डेविड' की कहानी
दोनों का रिश्ता किसी बाप-बेटे के रिश्ते से कम नहीं है। साथ ही, इस कहानी में कुछ भावनात्मक परते हैं। घणी की तलाश है भारत सरकार को और वह उसे मारने के लिए कुछ जांबाज़ सिपाही भेजते हैं और शुरू होता है थोड़ा एक्शन, इमोशन और दगाबाजी का सिलसिला।
दूसरे डेविड हैं दक्षिण के सुपरस्टार विक्रम, जिनकी पत्नी उन्हें शादी के दिन छोड़कर भाग जाती है और वह दिन-रात शराब के नशे में डूबे रहते हैं। उनकी मां उनकी दूसरी शादी कराना चाहती हैं, पर विक्रम तैयार नहीं हैं... पर जब उनकी नजर रोमा यानी ईशा शरवानी पर पड़ती है, तो वह उनसे शादी करने की पुरज़ोर कोशिश करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह लड़की डेविड के दोस्त की मंगेतर है। फिल्म की यह कहानी कई जगह हंसाती है। विक्रम ने अच्छा अभिनय किया है।
तीसरे डेविड हैं विनय विरमानी, जो एक ईसाई परिवार से हैं। उनके पिता हैं नसीर, जो एक चर्च के फादर हैं। तीसरे डेविड की दो बहने हैं। यह डेविड एक संगीतकार बनना चाहता है, पर हालात को यह मंजूर नहीं। इस कहानी का एक हिस्सा ओडिशा में घटी एक सच्ची घटना से जोड़ा गया है। फिल्म का संदेश है, "जो आपको आज सही लगता है, हो सकता है वह कल आपको गलत लगे"...
इस फिल्म में नील और विक्रम की कहानी आपका मनोरंजन करने में थोड़ी सफल हो सकती है और इन दोनों ही अभिनेताओं ने काम भी अच्छा किया है। साथ ही ईशा भी फ़िल्म में अच्छी लगीं। तीसरी कहानी आपको बांधने में नाकाम हो सकती है, लेकिन मुद्दा यह है कि फ़िल्म में इतने डेविड होने के बावजूद कहानी किसी अंजाम तक नहीं पहुंचती। सिर्फ एक फलसफे को साबित कर फ़िल्मकार दर्शकों का कैसे मनोरंजन कर सकते हैं। अगर तीनों कहानी एक ही मंजिल पर पहुंचती, तब कोई बात बन सकती थी, पर ऐसा नहीं हुआ। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग अच्छी है। मेरी तरफ़ से फिल्म को 2 स्टार...
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Sakshi, before she became Mrs Dhoni