गुजरात में हालात आपातकाल के दिनों से भी बुरे : केशुभाई
देश में आपातकाल लगाए जाने के 37 वर्ष पूरे होने के मौके पर 82 वर्षीय नेता ने मोदी के कामकाज की शैली को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, "आज देश में आपातकाल लगाए जाने की 37वीं बरसी है। आज के दिन मैं लोगों को याद दिलाना चाहता हूं कि गुजरात में क्या स्थिति है।"
पटेल ने अपने पहले ब्लॉग में लिखा, "गुजरात के लापता बच्चों के कुछ अभिभावक मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहते थे, उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और पूछताछ की।" "ऐसे लोग जिनकी कोई राजनीतिक पहुंच नहीं है और वह अपनी बात बताना चाहते हैं, तो राज्य के मुख्यमंत्री से मिल नहीं सकते...यह कैसी किलाबंदी है।"
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री को राज्य के लोगों से डर क्यों लगता है? क्या यह आपातकाल के दिनों के मुकाबले बदतर नहीं है।? पटेल अपने ब्लॉग में मंगलवार की पुलिस कार्रवाई का जिक्र कर रहे थे, जब एसोसिएशन ऑफ पैरेंट्स ऑफ मिसिंग चिल्ड्रन की रैली को रोका गया और रैली में भाग लेने वालों को यह कहकर पकड़ लिया गया कि उन्होंने उचित अनुमति के बिना रैली का आयोजन किया।
पटेल ने कहा, "मैं यह मुद्दा उठा रहा हूं कि गुजरात में अपनी बात कहने की कोई आजादी नहीं है और इस घटना ने मेरे शब्दों को एक बार फिर साबित कर दिया। पटेल के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने मोदी के खिलाफ अपने अभियान को युवकों तक पहुंचाने और उसे अधिक असरदार बनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है।"
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