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औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर में बेहद मामूली बढ़त

 
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औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर में बेहद मामूली बढ़त
नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था में सुस्ती का दौर जारी है। औद्योगिक वृद्धि के ताजा आंकड़ों से यह बात साबित होती है। पूंजीगत उत्पादों और विनिर्माण उत्पादन में गिरावट के कारण औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर इस साल अप्रैल महीने में भारी गिरावट के साथ 0.1 फीसदीी पर आ गई। औद्योगिक वृद्धि में गिरावट को देखते हुए रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बन सकता है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर आंके जाने वाली औद्योगिक वृद्धि पिछले साल के अप्रैल महीने में 5.3 फीसदी थी।

दिल्ली में मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक सूचकांक में 75 फीसदी का योगदान करने वाले विनिर्माण क्षेत्र में मात्र 0.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई जबकि अप्रैल 2011 में यह 5.7 फीसदी थी।
मूल उत्पादों का उत्पादन अप्रैल सिर्फ 2.3 फीसद बढ़ा जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसमें 7.1 फीसद की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि मध्यवर्ती उत्पादों में 1.4 फीसद की कमी आई जबकि पिछले साल अप्रैल के दौरान इसमें 3.9 फीसद की वृद्धि दर्ज हुई।

गैर-टिकाउ उपभोक्ता उत्पादों का उत्पादन अप्रैल में अपेक्षाकृत ज्यादा तेज रहा और इस क्षेत्र ने 5.4 फीसद की वृद्धि दर्ज की जो पिछले साल की समान अवधि में 4.6 फीसद थी।

इस बीच, वित्त वर्ष 2011-12 की औद्योगिक वृद्धि का आंकड़ा संशोधित कर 2.8 फीसद कर दिया गया जबकि पिछले महीने इसके 2.4 फीसद रहने की घोषणा की गई थी।

आंकड़ों के अनुसार रिकार्ड माध्यमों के प्रकाशन, मुद्रण और पुनप्र्रकाशन औद्योगिक समूह में सबसे अधिक 53.7 फीसद की तेजी दर्ज हुई जिसके बाद मेडिकल, प्रेसिजन और ऑप्टिकल उपकरण, घड़ियों के खंड में 29.4 फीसद की तेजी दर्ज हुई और रेडियो, टीवी और संचार उपकरण व सामान खंड में 21.4 फीसद की वृद्धि दर्ज हुई।

इधर बिजली की मशीन और सामान खंड में 49.2 फीसद की गिरावट हुई जबकि दफ्तरों के लेखा-जोखा और कंप्यूटिंग से जुड़ी मशीनों के खंड में 14.9 फीसद और परिधान व फर की रंगाई वाले क्षेत्र में 9.1 फीसद की गिरावट आई।

पूंजीगत उत्पादों का उत्पादन 16.3 फीसदी घटा जबकि पिछले साल के उसी महीने में इसमें 6.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।

खनन उत्पादन में अप्रैल के महीने में 3.1 फीसदी की गिरावट आई जबकि पिछले साल के उसी महीने में 1.6 फीसदी वृद्धि हुई थी।

औद्योगिक उत्पादन में गिरावट से रिजर्व बैंक पर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का दबाव बन सकता है। केंद्रीय बैंक 18 जून को मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा करने वाला है।

हालांकि उपभोक्ता उत्पादों के उत्पादन में अप्रैल के दौरान अपेक्षाकृत अधिक तेजी दर्ज हुई। उक्त अवधि में इस क्षेत्र ने 5.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जबकि पिछले साल अप्रैल में यह 3.2 फीसदी थी।

टिकाउ उपभोक्ता खंड में अप्रैल के दौरान पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि पिछले साल के इसी महीने में 1.6 की वृद्धि दर्ज हुई थी।

बिजली उत्पादन अप्रैल के दौरान 4.6 फीसदी की वृद्धि हुई जो अपेक्षाकत कम है। पिछले साल की समीक्षाधीन अवधि में यह 6.5 फीसदी थी। कुल मिलाकर विनिर्माण क्षेत्र के 22 में से 12 औद्योगिक समूह ने अप्रैल 2012 के दौरान पिछले साल के मुकाबले सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।

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