64वें गणतंत्र दिवस की दहलीज पर देश
मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक होंगे। इस मौके पर देश के अलग-अलग राज्यों की सुंदर झांकियां राजपथ पर निकलती हैं। इन झांकियों में देश के अलग-अलग हिस्सों की कला संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। इसके अलावा देश की तरक्की, सैन्य क्षमता आर्म्ड फोर्स और वायु सेना के शानदार करतब भी देखने को मिलते हैं। 1950 में आज ही के दिन देश का संविधान लागू हुआ और भारत गणराज्य घोषित हुआ था।
गणतंत्र दिवस समारोह के लिए दिल्ली के चारों ओर जमीन से आसमान तक सभी स्थानों पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं।
समारोह को देखते हुए अर्द्धसैनिक बल के जवान और एनएसजी के शार्पशूटर सहित करीब 25,000 पुलिसकर्मी शहर के चारों ओर तैनात किए गए हैं।
ऊंची इमारतों पर बंदूकधारियों को तैनात किया गया है जबकि 150 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की मदद से राजपथ और लालकिले के इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
सचल दस्ता, विमानभेदी तोप और एनएसजी के शार्पशूटर्स कई स्थानों पर निगरानी में जुटे हैं जबकि अर्द्धसैनिक बल और दिल्ली पुलिस के जवान गणतंत्र दिवस परेड को लेकर रायसीना हिल्स से लाल किले के बीच की आठ किलोमीटर की दूरी में कड़ी निगरानी रखे हुए हैं।
राजपथ के चारों ओर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है, यहां राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तिरंगे झंडे को फहराएंगे और जवानों की सलामी लेंगे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आसमान में भी विस्तृत वायुसुरक्षा उपायों के साथ विमानभेदी तोपों से सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। मेट्रो, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे सहित आईजीआई एयरपोर्ट पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
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