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खेलों की उभरती महाशक्ति भारत की लंदन में होगी अग्निपरीक्षा

 
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नई दिल्ली: खेलों की महाशक्ति के रूप में उभरते भारत की असली परीक्षा लंदन में होगी जब 81 खिलाड़ी यह साबित करने उतरेंगे कि बीजिंग में मिले तीन पदक तुक्का नहीं थे बल्कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन की क्षमता है।

ओलिंपिक में खानापूर्ति के लिए भाग लेने से लेकर पदक के दावेदार के रूप में उभरे भारत ने लंबा सफर तय किया है। चार साल पहले बीजिंग में भारत ने एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीतकर देश में खेलों की तस्वीर बदल दी थी।

बीजिंग के तीनों महानायकों ने लंदन के लिए भी क्वालीफाई किया है।

स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की नजरें फिर पीले तमगे पर होगी जबकि कांसा जीतने वाले सुशील कुमार (कुश्ती) और विजेंदर सिंह (मुक्केबाजी) पदक का रंग बदलने की फिराक में होंगे।

एक अरब की आबादी वाले भारत की खेलों के क्षेत्र में क्षमता के बारे में हर ओलिंपिक से पहले बात होती आई है लेकिन पहली बार चर्चा यह हो रही है कितने पदक मिलेंगे।

27 जुलाई से शुरू हो रहे 30 खेलों के इस महासमर में निशानेबाजों, मुक्केबाजों, तीरंदाजों, बैडमिंटन खिलाड़ियों और पहलवानों से पदक की उम्मीद है।

टेनिस टीम भी चयन विवाद को पीछे छोड़कर पदक जीत सकती है। भारतीय खिलाड़ियों को इस बार सुविधाओं और विदेश में अभ्यास में किसी अभाव का सामना नहीं करना पड़ा।

अधिकांश खिलाड़ी तो अनुकूलन के लिए काफी पहले ही लंदन जा चुके हैं।

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