आत्ममुग्ध नहीं, आत्मविश्वासी हैं भारतीय मुक्केबाज : संधू
संधू ने कहा, भारतीय मुक्केबाजों की यह पीढ़ी अलग है। वे आक्रामक हैं और विरोधी की आंख में देखते हैं। उनके भीतर गजब का आत्मविश्वास है। वे दुनिया के बाकी मुक्केबाजों की जुबान बोलते हैं और मुझे इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती।
उन्होंने कहा, इससे पहले शिकायतें मिलती थीं कि भारतीय मुक्केबाज विरोधियों के सामने कमजोर पड़ जाते हैं। अब जबकि वे उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब दे रहे हैं, तो उन्हें आत्ममुग्ध क्यों कहा जाए। दुनियाभर के मुक्केबाज ऐसे ही बात करते हैं। मुक्केबाजों को पता है कि करोड़ों भारतीयों की नजरें उन पर हैं, जो उनके लिए दुआ कर रहे हैं। उनका खेल महत्वपूर्ण है और वे अपने दम पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से लड़कर यहां आए हैं।
यह पूछने पर कि मुक्केबाज अचानक भारतीय मीडिया के पसंदीदा कैसे हो गए, कोच ने कहा, इसका कारण यह है कि पिछले पांच- छह साल में भारतीय मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।
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