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कांग्रेस, भाजपा के बीच काटजू को लेकर वाकयुद्ध

 
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कांग्रेस, भाजपा के बीच काटजू को लेकर वाकयुद्ध
नई दिल्ली: कांग्रेस और भाजपा के बीच नरेन्द्र मोदी के बारे में मार्कन्डेय काटजू की विवादास्पद टिप्पणी तथा बाद में भाजपा नेता अरुण जेटली द्वारा उन्हें भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर सोमवार को वाकयुद्ध तेज हो गया।

भाजपा की मांग को खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह काटजू के बचाव में सामने आए। सिंह ने कहा कि काटजू हमेशा निष्पक्ष रहे हैं। उन्होंने इस बात पर हैरत जताई कि जेटली इस अंदाज में इसलिए तो प्रतिक्रिया नहीं जता रहे हैं क्योंकि उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी के कारण राज्यसभा की सीट मिली है।

प्रेस परिषद प्रमुख के खिलाफ हमला तेज करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवन्त सिंह ने काटजू पर आरोप लगाया कि उन्होंने लक्ष्मण रेखा को कई बार पार किया और उनकी भाषा पूर्व न्यायाधीश के अनुरूप नहीं हैं।

सिन्हा ने कहा कि काटजू ने अपने प्रेस बयानों के जरिये कई बार लक्ष्मण रेखा पार की है। मैं नहीं जानता कि काटजू कैसे न्यायाधीश हैं। लेकिन मैं संतुष्ट हूं कि वह भारतीय प्रेस परिषद जैसी महत्वपूर्ण संस्था के अध्यक्ष बनने के काबिल नहीं हैं।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘उन्हें फौरन बर्खास्त कर देना चाहिए। उनसे इस्तीफा मांगने का कोई तुक नहीं है। दूसरी बात, उन्हें राजनीति में दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए। प्रेस परिषद का अध्यक्ष नहीं तय करेगा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन हो।’’

काटजू ने एक अखबार में लेख लिखकर मोदी की आलोचना की थी। इसे लेकर जेटली एवं काटजू में वाकयुद्ध छिड़ गया। सिन्हा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक आलेख लिखने का आखिर उनका मतलब क्या है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उनके अधिकारक्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने अपनी निजी राय को प्रेस परिषद के अध्यक्ष की राय से मिला दिया है लिहाजा वह पीसीआई अध्यक्ष पद पर बैठने के काबिल नहीं हैं।’’

बहरहाल, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने काटजू की आलोचना करने वाले जेटली के बयान को खारिज करते हुए कहा, ‘‘यह इसलिए है क्योंकि उन्हें राज्यसभा सीट श्री नरेन्द्र मोदी के कारण मिली है। श्री अरुण जेटली को लगता है कि उन्हें श्री नरेन्द्र मोदी का बचाव करना चाहिए। मुझे लगता है कि श्री अरुण जेटली को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। राज्यसभा के नेता के लिए यह उपयुक्त नहीं है।’’
प्रेस परिषद के अध्यक्ष पर ‘‘कटु’’ हमला करने के लिए जेटली को आड़े हाथ लेते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि काटजू हमेशा बेहद निष्पक्ष रहे हैं और साथ ही जनहित को लेकर बेहद संवेदनशील हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘श्री अरुण जेटली उस समय चुप क्यों रहे जब उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के खिलाफ, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ और इफ्तिखार गिलानी की गिरफ्तारी में गृह मंत्री के खिलाफ मुद्दा उठाया था।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि जब उन्होंने दिल्ली में सामूहिक बलात्कार मामले में पुलिस को आड़े हाथ लिया था जेटली उन अवसरों पर चुप रहे।

दिग्विजय से पूछा गया था कि क्या इस घटना से पता चलता है कि भाजपा आलोचना पसंद नहीं करती। इस पर उन्होंने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि वे फासीवादी विचारधारा के पोषक हैं जो आलोचना सहन नहीं कर सकती, जो इस बात में विश्वास करती है कि मेरे रास्ते चलो वरना अपना रास्ता नापो।’’

बहरहाल, भाजपा नेता यशवन्त सिन्हा ने कहा कि जेटली के खिलाफ ‘‘व्यर्थ’’ और ‘‘बकवास’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने की किसी न्यायाधीश से उम्मीद नहीं की जा सकती। काटजू को कांग्रेस पार्टी से भी ज्यादा कांग्रेसी बताने की जेटली की टिप्पणी का कड़ा विरोध करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा कि क्या मोदी का विरोध करने वाला हर आदमी कांग्रेस की शह पर बोलता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस प्रलाप (जेटली के) से चकित हूं। पिछले 11 सालों से सभी रंगों, पार्टियों और मतों के लोगों ने विभिन्न अवसरों पर मोदी की आलोचना और भर्त्सना तक की है। क्या इसका यह मतलब है कि वे सभी कांग्रेसीजन थे।’’ लोकजनशक्ति पार्टी ने भी काटजू का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार हो या गुजरात, राजग सरकारें विकास के नाम पर आंकड़ों एवं जोड़तोड़ का खेल खेल रही हैं। उन्होंने अनुचित रोष के लिए जेटली की आलोचना की।

पार्टी प्रमुख रामविलास पासवान ने कहा, ‘‘जेटली को सोच समझकर बोलना चाहिए। काटजू तथ्यों के आधार पर बोले हैं। भाजपा पीसीआई अध्यक्ष पर अनावश्यक हमला बोल रही है। इसी तरह बिहार की राजग सरकार ने मीडिया पर लगाम लगा दी है। काटजू ने गुजरात की स्थिति के बारे में अभी और बिहार के बारे में पहले जो कुछ कहा था, हम उनका समर्थन करते हैं।’’

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