दोनों संपादकों को दो दिन की रिमांड | ज़ी ने कहा, मीडिया को दबा रही सरकार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों संपादकों के लिए तीन दिन का रिमांड मांगा थी। फोरेंसिक जांच में ऑडियो−वीडियो सीडी को ठीक बताया गया है। खबर आ रही है कि चेयरमैन सुभाष चंद्रा से भी इन दोनों संपादकों की फोन पर बात हुई थी। पुलिस का कहना है कि इस संबंध में सुभाष चंद्रा का भी हाथ हो सकता है।
उधर, ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी और ज़ी बिज़नेस के संपादक समीर आहलुवालिया की मंगलवार को हुई गिरफ्तारी पर आज ज़ी ग्रुप के सीईओ आलोक अग्रवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मामला की सत्यता तय करने के लिए अदालत है, लेकिन जिस तरह से दो संपादकों को गिरफ्तार किया गया, वह सही नहीं है।
ज़ी ग्रुप ने यहां तक कहा कि नवीन जिंदल की तरफ से खबर रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और कुछ राजनीतिज्ञों तक से खबर रोकने के लिए दबाव बनवाया गया था। इस बीच, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ज़ी समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा को भी नोटिस भेजा है।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री नवीन जिंदल की कंपनी से जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार ज़ी न्यूज के दो पत्रकारों की गिरफ्तारी पर ज़ी न्यूज समूह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि यह सारा मामला जिंदल ग्रुप के दबाव में खड़ा किया गया है और सरकार मीडिया को दबाने की कोशिश कर रही है।
ज़ी न्यूज के मुताबिक इस वाकये ने इमरजेंसी की याद दिला दी है। विज्ञप्ति में कहा गया है, "दो संपादकों के खिलाफ एफआईआर कुछ और नहीं, बल्कि कोयला घोटाले में जिंदल स्टील प्लांट लिमिटेड की भूमिका से ध्यान भटकाने की चालाक कोशिश भर है, जिसका सीएजी ने खुलासा किया है और जिसकी सीबीआई जांच कर रही है।
चैनल अपने खिलाफ लगे आरोपों से पूरी तरह इनकार करता है। चैनल अपने दो संपादकों की गिरफ्तारी और एक 'बदनीयत' और 'नाजायज़' मुकदमा शुरू करने की दिल्ली पुलिस की मनमानी कार्रवाई की तीखी आलोचना करता है। हम दुहराना चाहते हैं कि ज़ी न्यूज़ के कर्मचारियों ने कोई अपराध नहीं किया है।"
गौरतलब है कि ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी और ज़ी बिज़नेस संपादक समीर आहलुवालिया को मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। जिंदल ग्रुप ने दोनों पत्रकारों पर कोयला घोटाले की खबरों को रोकने के एवज में सौ करोड़ के विज्ञापन मांगने का आरोप लगाया था। जिंदल ग्रुप ने दोनों पत्रकारों का स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसमें वे पैसे की मांग करते हुए दिखाए गए थे। इस टेप की जांच सीएफएसएल ने की और इसे सही पाया।
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