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कोटला टेस्ट : फिरकी में फिर फंसे कंगारू, 231 पर आठ आउट

 
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कोटला टेस्ट : फिरकी में फिर फंसे कंगारू, 231 पर आठ आउट
नई दिल्ली: टेस्ट शृंखला में 4-0 का रिकॉर्ड परिणाम हासिल करने के लिए उतावली टीम इंडिया के गेंदबाजों ने चार विकेट चटकाने वाले रविचंद्रन अश्विन (30-17-40-4) की अगुवाई में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए दिल्ली टेस्ट के पहले ही दिन मेहमान ऑस्ट्रेलियाई टीम को दिन में तारे दिखा दिए, और खेल खत्म होने तक उनके आठ खिलाड़ी पैवेलियन लौट चुके थे, जिनमें से पांच तो 20 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए। संघर्ष सिर्फ पीटर ह्यूगेस (45 रन, 59 गेंद, 10 चौके), स्टीवन स्मिथ (46 रन, 145 गेंद, तीन चौके, दो छक्के) और पीटर सिडल (47* रन, 125 गेंद, चार चौके) की ओर से नज़र आया।

शेन वॉटसन की कप्तानी में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला मेहमानों के लिए सही साबित नहीं हुआ, और वे केवल 2.36 की औसत से बल्लेबाजी कर 98 ओवरों में कुल 231 रन बना पाए। फिरोजशाह कोटला मैदान में कंगारुओं के खिलाफ शृंखला के चौथे और आखिरी टेस्ट मैच में रवींद्र जडेजा (22-6-34-2) और इशांत शर्मा (14-3-35-2) ने भी दो-दो विकेट हासिल किए। वैसे गेंदबाजी भुवनेश्वर कुमार (9-1-43-0) और प्रज्ञान ओझा (23-6-67-0) ने भी की, लेकिन उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली।

वक्त और खेली गई गेंदों के लिहाज़ से देखें, तो ऑस्ट्रेलियाई टीम की ओर से केवल स्टीवन स्मिथ कुछ लम्बा संघर्ष कर पाए, लेकिन फिर भी करियर का चौथा अर्द्धशतक लगाने से सिर्फ चार रन से चूक गए। स्मिथ आठवें कंगारू विकेट के रूप में रविचंद्रन अश्विन का चौथा शिकार बने, और इसी मैच से टेस्ट करियर का आगाज़ करने वाले अजिंक्य रहाणे के हाथों लपके गए।

दरअसल, कंगारुओं के बिखराव की शुरुआत सुबह के सत्र में ही दो विकेट चटकाकर तेज़ गेंदबाज इशांत शर्मा ने की थी, लेकिन उसके बाद अश्विन और जडेजा ने मेहमान टीम को पूरी तरह बिखेर दिया। भारतीय गेंदबाजों ने किसी भी मेहमान बल्लेबाज को ज़्यादा देर टिकने नहीं दिया, और कोई भी कंगारू बल्लेबाज ठीक तरह से भारतीय गेंदबाजों का सामना नहीं कर पाया, इसका पर्याप्त प्रमाण यह है कि दिनभर में फेंके गए 98 ओवरों में से लगभग एक तिहाई, यानि 33 मेडन रहे। पिच पर स्पिन गेंदबाजों की कामयाबी को देखते हुए भारतीय कप्तान धोनी ने भी 94वें ओवर में जाकर नई गेंद ली थी।

दिन का खेल खत्म होने के वक्त ऑस्ट्रेलियाई सिडल और जेम्स पैटिन्सन (11 रन, 57 गेंद, एक चौका) मैदान में थे, और ऑस्ट्रेलियाई स्कोरकार्ड पर 98 ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर 231 रन दिखाई दे रहे थे।

वैसे टीम इंडिया ने शुक्रवार सुबह ऑस्ट्रेलियाई पारी शुरू होने पर दूसरे ओवर से ही हमला बोल दिया था, और इशांत ने सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर को शून्य के निजी स्कोर पर विराट कोहली के हाथों लपकवा दिया था। इसके बाद फिलिप ह्यूगेस ने सलामी बल्लेबाज एड कोवान का साथ देने के लिए मैदान में कदम रखा, और तेज़ी से रन बटोरने शुरू कर पारी को कुछ हद तक संभाला, लेकिन इशांत ने पारी के 21वें ओवर की आखिरी गेंद पर 59 गेंदों का सामना कर 10 चौकों की मदद से 45 रन बनाने वाले ह्यूगेस को क्लीन बोल्ड कर डाला।

फिर लंच के बाद ऑस्ट्रेलियाई पारी का संकट लगातार बढ़ता चला गया, जब बेहद जल्दी-जल्दी उसके कई खिलाड़ी आउट हुए। सबसे पहले पारी के 33वें ओवर की आखिरी गेंद पर रविचंद्रन अश्विन ने बेहद सधा हुआ खेल दिखा रहे कोवान को क्लीन बोल्ड कर पैवेलियन लौटाया, और उसके कुछ ही देर बाद कप्तान शेन वॉटसन 39वें ओवर में रवींद्र जडेजा की गेंद पर भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के हाथों स्टम्प उखड़वा बैठे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज अभी संभल भी नहीं पाए थे, कि 41वें ओवर में अश्विन ने फिर हमला बोला और विकेटकीपर मैथ्यू वेड को दो रन के निजी स्कोर पर मुरली विजय के हाथों कैच आउट करवा दिया। फिर 47वें ओवर में जडेजा फिर चमके और 16 गेंदों में एक चौके और एक छ्क्के की मदद से 10 रन बनाने वाले ग्लेन मैक्सवेल को इशांत के हाथों लपकवा दिया। इसके बाद भी टिककर खेलने की कंगारुओं की कोशिशें कामयाब नहीं रहीं, और 54वें ओवर की आखिरी गेंद पर मिशेल जॉनसन भी 22 गेंदों में सिर्फ तीन रन बनाकर अश्विन के हाथों क्लीन बोल्ड हो गए।

कंगारू सलामी बल्लेबाज कोवान ने आउट होने से पहले 99 गेंदों का सामना कर 38 रन बनाए थे, जिनमें सात चौके शामिल थे, जबकि वॉटसन ने 56 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 17 रन बनाए, और वेड ने सिर्फ पांच गेंदों का सामना किया।

इससे पहले, शुक्रवार सुबह दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में भारत के विरुद्ध शृंखला के चौथे और आखिरी टेस्ट मैच में अपने नियमित कप्तान माइकल क्लार्क के चोटिल होकर बाहर बैठने की वजह से उपकप्तान शेन वॉटसन की अगुवाई में कंगारुओं की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। इस प्रकार शेन वॉटसन ऑस्ट्रेलिया के 44वें टेस्ट कप्तान बन गए। उल्लेखनीय है कि माइकल क्लार्क अपने पूरे करियर में पहली बार किसी चोट के कारण टेस्ट मैच से बाहर हुए हैं, जबकि वॉटसन निलम्बन के कारण मोहाली टेस्ट में नहीं खेल सके थे।

उधर, भारतीय टीम में अजिंक्य रहाणे ने इस मैच के माध्यम से टेस्ट करियर का आगाज़ किया है। उन्होंने सलामी बल्लेबाज शिखर धवन का स्थान लिया है, जो चोट के कारण टीम से बाहर हैं। अब रहाणे और मुरली विजय पारी की शुरुआत करेंगे।

भारतीय टीम चार मैचों की इस शृंखला को 3-0 से पहले ही जीत चुकी है। चेन्नई में खेला गया पहला टेस्ट मैच टीम इंडिया ने आठ विकेट से जीता था, जबकि हैदराबाद में उसने मेहमान टीम पर एक पारी और 135 रनों से जीत हासिल की थी। मोहाली के पंजाब क्रिकेट संघ मैदान पर खेले गए तीसरे मुकाबले में भारत ने छह विकेट से जीत हासिल कर शृंखला अपने नाम कर ली थी, और अब उसका लक्ष्य मेहमान टीम का सूपड़ा साफ करने, और इतिहास रच देने का है। दरअसल, भारतीय टीम ने अपने 81 साल के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में अब तक एक बार भी इस अंतर से कोई शृंखला नहीं जीती है।

दूसरी ओर, शृंखला गंवाने के बाद अब ऑस्ट्रेलियाई टीम यह मैच जीतकर इंग्लैंड के साथ शुरू होने वाली एशेज शृंखला के लिए जरूरी आत्मविश्वास हासिल करना चाहेगी, और हो सकता है कि शेन वॉटसन की कप्तानी में मेहमान टीम कुछ अलग परिणाम दे सके।

मैदान के लिहाज़ से देखें, तो कोटला में दोनों टीमों के बीच यह सातवां मैच है, जिनमें से दो मुकाबले भारत ने जीते हैं, और तीन मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया को इस मैदान पर एकमात्र बार वर्ष 1959 में जीत हासिल हुई थी, जब उसने भारत को पारी और 127 रनों से हराया था। वैसे कोटला में पिछले 26 साल से भारतीय टीम अजेय है।

टीमें इस प्रकार हैं :

भारत : महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान एवं विकेटकीपर), अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा, मुरली विजय, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली, रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, भुवनेश्वर कुमार, इशांत शर्मा और प्रज्ञान ओझा।

ऑस्ट्रेलिया : शेन वॉटसन (कप्तान), एड कोवान, डेविड वार्नर, फिलिप ह्यूगेस, स्टीवन स्मिथ, मैथ्यू वेड (विकेटकीपर), पीटर सिडल, जेम्स पैटिन्सन, मिशेल जॉनसन, ग्लेन मैक्सवेल और नाथन ल्योन।

मैदानी अम्पायरिंग की जिम्मेदारी पाकिस्तान के अलीम डार और इंग्लैण्ड के रिचर्ड कैटलबॉरो को सौंपी गई है, जबकि टीवी अम्पायर होंगे भारत के एस रवि। मैच रैफरी का दायित्व संभालेंगे श्रीलंका के रंजन मदुगले।

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