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यूपीए सरकार मुश्किल में, तृणमूल ने लिया समर्थन वापस

 
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यूपीए सरकार मुश्किल में, तृणमूल ने लिया समर्थन वापस

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कोलकाता/नई दिल्ली: डीजल मूल्य वृद्धि, रसोई गैस और बहुब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर लिए गए फैसलों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार से समर्थन वापस लेने का मंगलवार को ऐलान कर दिया। इसके साथ ही यूपीए सरकार मुश्किलों में घिर गई क्योंकि तृणमूल के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) ने कहा है कि वह कोई भी अंतिम फैसला 20 सितम्बर को आहूत बंद के बाद ही लेगी।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके मंत्री शुक्रवार को प्रधनमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा सौंप देंगे।

ममता की इस घोषणा के बाद कांग्रेस ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उसकी अहम सहयोगी है और अंतिम निर्णय तक वह हमारी सहयोगी बनी रहेगी।

ममता ने यह फैसला कोलकाता में पार्टी के सांसदों एवं मंत्रियों की बैठक में विचार के बाद किया। इसके बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने केंद्र सरकार पर कई आरोप भी लगाए।

ममता ने कहा, "इस सरकार ने कई बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए। बार-बार हमने ऐसा न करने का अनुरोध किया लेकिन हमारी एक न सुनी गई। हमारी बातों को नजरअंदाज किया गया। सरकार के फैसलों से आम आदमी परेशान है।" उन्होंने कहा, "सरकार के फैसलों से आम आदमी मर जाएगा। यह आपदा होगी। साधारण लोगों को क्यों मारा जा रहा है। आर्थिक सुधार के अन्य उपाय भी हैं।"

ममता ने केंद्र सरकार पर खुलकर आरोप लगाया कि कोयला ब्लॉक आवंटन से देश का ध्यान हटाने के लिए सरकार ने एफडीआई और मूल्य वृद्धि का फैसला किया। उन्होंने कहा, "आज कड़ा फैसला नहीं लिया गया तो कल ये सरकार पेंशन विधेयक लेकर आएगी और आपका सारा पेंशन ले लेंगे। इसी तरह दाम बढ़ाए जाते रहेंगे।"

ममता ने डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि और बहुब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को 72 घंटे की मोहलत दी थी लेकिन केंद्र सरकार के रुख में कोई बदलाव न आने पर उन्होंने यह फैसला किया।

यूपीए सरकार की दूसरी सबसे बड़ी घटक तृणमूल के समर्थन वापस लेने के फैसले पर कांग्रेस ने कहा कि तृणमूल उसकी बहुमूल्य सहयोगी है और अंतिम परिणाम सामने आने तक वह उसे अपनी घटक मानती रहेगी।

कांग्रेस महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, "जब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता तब तक हम तृणमूल कांग्रेस को अपना बहुमूल्य सहयोगी मानते रहेंगे।" उन्होंने कहा, "तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कुछ मुद्दे उठाए हैं, जिन पर सरकार के साथ विचार-विमर्श होगा।" द्विवेदी ने जोर देते हुए कहा कि इन मुद्दों पर सरकार के साथ सचमुच बातचीत होगी।

तृणमूल की ओर से समर्थन वापस लेने की घोषणा करने के कुछ समय बाद सपा ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए का तौर तरीका ठीक नहीं है और पार्टी आगे का निर्णय 20 सितम्बर के बाद लेगी।

सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा, "सरकार जिस तरह से काम कर रही है वह सही नहीं है। इसलिए ममता ने समर्थन वापस लिया।" यादव ने कहा कि कांग्रेस इस तरह काम कर रही है जैसे कि उसे दो तिहाई बहुमत प्राप्त है। उन्होंने कहा कि सपा अपना निर्णय 20 सितम्बर को आयोजित देशव्यापी बंद के बाद लेगी।

सरकार से समर्थन वापसी पर यादव ने कहा, "हमने यूपीए सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन दिया है। फिलहाल हम कोई निर्णय लेगें। तृणमूल कांग्रेस का समर्थन वापसी का निर्णय उनका अपना फैसला है। हम 20 सितम्बर को बंद के बाद पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में आगे का निर्णय लेंगे।"

इन सबके बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि भले ही कांग्रेस ममता बनर्जी के निर्णय से दुखी हो लेकिन देश के लिए यह खुशी की बात है।

भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "ममता बनर्जी द्वारा उठाया गया यह देर से है लेकिन दुरुस्त है। उम्मीद है कि वह देश के लोगों को इस सरकार से राहत दिलाएंगी।" उन्होंने कहा, "हम पहले से कहते आ रहे हैं कि कोयला आवंटन घोटाले से ध्यान हटाने के लिए केंद्र सरकार ने यह फैसला किया है। वहीं बात अब कांग्रेस की सबसे बड़ी सहयोगी कर रही है। यह बहुत गंभीर विषय है।"

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