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भारत बंद : परिवहन, बैंकिंग सेवाओं पर असर, अंबाला में एक की मौत

 
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भारत बंद : परिवहन, बैंकिंग सेवाओं पर असर, अंबाला में एक की मौत

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नई दिल्ली: अपनी मांगों के समर्थन में 11 ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय हड़ताल से कई राज्यों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और बैंकिंग के साथ परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली में सरकारी बैंकों में कामकाज ठप है। हालांकि कुछ बैंकों का कहना है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं हैं, लेकिन यहां की ट्रेड यूनियनों का कहना है कि वे कामकाज नहीं होने देंगे। मुंबई में बैंकिंग, बीमा और वाणिज्य सेवाओं पर असर पड़ा है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन सेवा सामान्य है।

हड़ताल का बुरा चेहरा भी सुबह से ही दिखने लगा है। अंबाला में एक ट्रेड यूनियन नेता की स्थानीय बस डिपो में कुचलकर मौत हो गई। वह बस को चलने से रोकने का प्रयास कर रहे थे। हरियाणा रोडवेज श्रमिक संघ के जिला अध्यक्ष इंदर सिंह भड़ाना ने कहा कि घटना सुबह करीब चार बजे की है, जब बस चालक नरेंद्र सिंह ने अंबाला डिपो से बाहर निकाली गई बस को आगे जाने से रोकने का प्रयास किया।

भड़ाना ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने जबरन बस चलानी चाही, जिसकी टक्कर से सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वह एआईटीयूसी संगठन के कोषाध्यक्ष भी थे। पुलिस ने कहा कि घटना के बाद अन्य श्रमिक हिंसा पर उतर आए और अंबाला के पुलिस उपायुक्त एवं बलदेव थाना इलाके के एसएचओ के वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुछ हड़ताली ऑटो ड्राइवर अपने एक साथी को पीटते हुए नजर आए। यह ऑटो ड्राइवर किसी सवारी को लेकर जा रहा था, जिसके बाद बंद समर्थकों ने उसे रोका और उसके साथ मारपीट की। दिल्ली आ रहे यात्रियों को बंद से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें स्टेशन से अपने घरों तक जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहे हैं। जो ऑटो या टैक्सी वाले सवारी ले जाने को राजी भी होते हैं, वे अनाप-शनाप पैसों की मांग कर रहे हैं।

हड़ताल से उत्तर प्रदेश में बैंकिंग और परिवहन सेवाएं ठप हो गई। डाक और बीमा सेवाएं भी प्रभावित हैं, हालांकि आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है। आधी रात के बाद उत्तर प्रदेश में राज्य परिवहन निगम की बसों के पहिये थम गए। प्रदेश भर की करीब 10 हजार रोडवेज बसें विभिन्न बस अड्डों में खड़ी हैं, जिससे यात्रियों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।

लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद जैसे शहरों में चलनी वाली महागनर बसों का भी परिचालन ठप है, जिससे लोगों को सुबह दफ्तर जाने में असुविधा का सामना करना पड़ा। लोगों को ऑटो रिक्शा लेना पड़ रहा है, जो बसों की हड़ताल के कारण दोगुना किराया वसूल रहे हैं। हड़ताल में बैंक कर्मचारियों के शामिल होने के कारण सुबह से लगभग सभी सरकारी बैकों के दफ्तरों में ताले लटक रहे हैं। बैंक कर्मचारी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी कर अपना विरोध जता रहे हैं।

पंजाब और हरियाणा में हड़ताल का असर परिवहन सेवा पर साफ दिखाई दिया, जहां दोनों राज्यों के बीच चलने वाली सरकारी बसें बड़ी संख्या में सड़कों पर नहीं दिखाई दीं। महाराष्ट्र में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण वित्तीय क्षेत्र पर असर पड़ा। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष विश्वास उत्तागी ने कहा, हमें अपने हड़ताल के आह्वान पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। बैंकों और बीमा कंपनियो में कामकाज रुक गया है।

मुंबई में वित्तीय क्षेत्र पूरी तरह ठप हो गया है, लेकिन आर्थिक राजधानी में हड़ताल से सामान्य जनजीवन पर कोई खास असर नहीं दिखाई दिया और लोकल ट्रेन सेवा सही से चल रही है। मुंबई हवाई अड्डे के प्रवक्ता ने कहा कि यहां विमानों का परिचालन सामान्य है। हालांकि विमानपत्तन कर्मचारियों के एक वर्ग ने हड़ताल का समर्थन किया है। शिवसेना ने हड़ताल का समर्थन किया है, लेकिन उसने जबरदस्ती इसे लागू नहीं कराने का फैसला किया है।

पश्चिम बंगाल में दो दिन की हड़ताल की शुरुआत में मामूली असर दिखाई पड़ा। कोलकाता में अधिकतर बाजार और दुकानें खुले थे। निजी वाहनों की संख्या जरूर कम थी, लेकिन सरकारी बसें सामान्य तरीके से चलीं। त्रिपुरा में हड़ताल के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और दुकानों और बाजारों के साथ स्कूल, कॉलेज, बैंक और वित्तीय संस्थान भी बंद रहे।

ओडिशा के अनेक हिस्सों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। सड़कों पर बसों, टैक्सियों और ऑटो रिक्शाओं के नहीं चलने से राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना। बस स्टैंडों पर बड़ी संख्या में यात्री खड़े देखे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि दुकानें, बाजार, पेट्रोल पंप और रेस्तरां बंद रहे और कम यातायात के कारण सड़कें सुनसान थीं। प्रदर्शनकारियों ने भुवनेश्वर, कटक, बालेश्वर, खुरदा रोड, बरहामपुर और संबलपुर आदि जगहों पर रेल मार्ग को भी बाधित किया।

कर्नाटक में सूत्रों के अनुसार बेल्लारी में कुछ लोगों ने बसों पर पथराव किया और सड़कों को जाम कर दिया। कोप्पल में जनजीवन प्रभावित हुआ जहां सड़कों से बस, ऑटोरिक्शा और अन्य परिवहन के साधन नदारद दिखाई दिए। बेंगलुरु में कोई अप्रिय घटना की खबर नहीं है। यहां दुकानें और शिक्षण संस्थान बंद रहे, वहीं राज्य परिवहन की बसें भी कम संख्या में चलीं। हालांकि ट्रेन सेवाओं पर हड़ताल का कोई असर नहीं दिखाई दिया। राजस्थान में बैंकों की शाखाएं बंद रहीं। यहां राज्य परिवहन की बसें भी नहीं चलीं।

हड़ताल से केरल में सामान्य जनजीवन पर काफी असर पड़ा है। बैंकों, परिवहन समेत अनेक क्षेत्रों के कर्मचारियों ने यूपीए सरकार की आर्थिक और श्रमिक नीतियों के विरोध में काम नहीं किया। सड़कों से बस और टैक्सी नदारद थे और दुकानें तथा रेस्तरां बंद रहे। ट्रेन सेवाओं पर हड़ताल का असर दिखाई नहीं दिया। कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार ने 'काम नहीं तो वेतन नहीं' की नीति घोषित कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस ने काम पर जाने वाले और सड़कों पर चलने वाले सार्वजनिक परिवहन के साधनों को सुरक्षा मुहैया कराने की पेशकश की है।

इस बार सरकार पर हमला बढ़ती महंगाई के अलावा दिहाड़ी मजदूरों की खराब हालत और पेंशन जैसी मांगों को लेकर है। इसके अलावा मजदूर संगठन श्रम कानूनों की अनदेखी का भी आरोप लगा रहे हैं। इन लोगों का दावा है कि बैंक, बीमा, बिजली और माइनिंग सेक्टर समेत कई क्षेत्रों के 10 करोड़ से ज्यादा लोग दो दिन की इस हड़ताल में शामिल होंगे।

हालांकि प्रधानमंत्री ने मजदूर संगठनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की, लेकिन मजदूर संगठनों ने इसे नहीं माना। उधर, कांग्रेस भी मजदूर संगठनों के आक्रामक रुख से दबाव में है। कांग्रेस से जुड़ी ट्रेड यूनियन इंटक के नेता कह रहे हैं कि अगर जनता के साथ खड़े नहीं हुए, तो अगले चुनावों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार ने मंगलवार को फिर से ट्रेड यूनियनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा है कि हड़ताल से 15,000 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान हो सकता है।

सरकार ने रिजर्व बैंक सहित सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक कर्मचारियों से अपील की कि वे हड़ताल में शामिल न हों। सरकार का कहना है कि बैंक कर्मियों की नौकरी की सुरक्षा और सुविधाओं को देखते हुए उनके इस हड़ताल में शामिल होने की कोई वजह नहीं बनती है। यूनियनों ने अपनी 10 मांगें पेश की हैं। इनमें महंगाई पर नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत, श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करना, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल, सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश बंद करना और न्यूनतम मजदूरी 10,000 रुपये मासिक करना शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने भी सभी कर्मचारियों का सकरुलर जारी कर कार्यालय में उपस्थित होने को कहा है, अन्यथा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। माकपा-सीटू की श्रम इकाई ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस धमकी को गैर-कानूनी करार दिया है।

(इनपुट एजेंसियों से भी)

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