नीतीश का नरेन्द्र मोदी पर फिर ढका-छिपा हमला, सुशील ने दिया साथ
एक समाचारपत्र को दिए साक्षात्कार में नीतीश ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं, लेकिन इस उम्मीदवार को ऐसा होना चाहिए, जिस पर कोई दाग न हो और वह उदारवादी विचारधारा का हो। उल्लेखनीय है कि नीतीश ने एक हफ्ते पहले भी यही कहा था कि देश का प्रधानमत्री धर्मनिरपेक्ष छवि वाला होना चाहिए।
इसी के साथ नीतीश के साथ मिलकर बिहार सरकार को चला रहे भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में इस वक्त किसी भी नेता का नाम नहीं लिया, और कहा कि प्रत्येक को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। उन्होंने नरेन्द्र मोदी को लगभग खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसी साफ-सुथरी और उदार छवि वाला होना चाहिए, जो सभी वर्गों को स्वीकार्य हो। उन्होंने यह भी कहा एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी सही समय आने पर ही चुना जाएगा, और इस वक्त किसी के बारे में भी कुछ नहीं कहना चाहिए। उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उम्मीदवार एनडीए का ही होगा, और लोकसभा चुनाव से पहले घोषित किया जाएगा। सुशील मोदी का यह भी दावा है कि इस समय किसी भी मुद्दे को लेकर एनडीए गठबंधन को कोई खतरा नहीं है।
उधर, जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने मंगलवार को ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की और कहा कि नीतीश जो कुछ भी कह रहे हों, अंतिम फैसला एनडीए को करना है।
दूसरी ओर, आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इस बयानबाजी के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नीतीश को (नरेन्द्र) मोदी से वाकई इतना परहेज़ है तो अब तक वह उनके साथ क्यों हैं...?
उल्लेखनीय है कि नीतीश और नरेन्द्र मोदी के बीच जारी टकराव की ये घटनाएं नई नहीं हैं। सबसे पहले गुजरात सरकार के एक पोस्टर में मोदी के साथ छापी गई अपनी तस्वीर पर नीतीश ने तीखा ऐतराज़ जताया था, और जब नरेन्द्र मोदी ने याद दिलाया कि बिहार में कोसी की बाढ़ के वक्त गुजरात ने मदद दी थी, तो बिहार ने गुजरात को वह रकम तक लौटा दी थी। इसके बाद बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश के दबाव में आकर बीजेपी मोदी को प्रचार का न्योता तक नहीं दे पाई थी। अभी हाल ही में नरेन्द्र मोदी ने भी बिहार की खस्ता हालत के लिए स्थानीय नेताओं द्वारा की जा रही जातिवादी राजनीति को जिम्मेदार ठहराया, और इस पर जवाबी हमला करते हुए नीतीश ने भी नरेन्द्र मोदी को अपनी गिरेबान में झांकने और बिहार को लेकर टिप्पणी नहीं करने की सलाह दी थी।
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