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वित्तीय प्रोत्साहन की कोई गुंजाइश नहीं : प्रणब

 
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नई दिल्ली: वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि सरकार के लिए इस समय वित्तीय प्रोत्साहन देने की गुंजाईश नहीं है पर उन्होंने उम्मीद जताई कि कच्चे तेल की कीमत घटने और मानसून सामान्य रहने से आर्थिक हालात सुधारने में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि देश का उद्योग जगत औद्योगिक गतिविधियों में अप्रत्यशित गिरावट के मद्देनजर सरकार और रिजर्व बैंक से कर रियायत व ब्याज दर में कमी की अपील कर रहा है।

मुखर्जी ने केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा ‘‘वैश्विक अनिश्चितता और नरमी का दूसरा दौर तुरंत आ गया है इसके चलते इस समय सक्रिय राजकोषीय पहल की गुंजाईश ज्यादा नहीं बची है।’’

वित्तमंत्री ने यह बात ऐसे समय कही है जबकि घरेलू उद्योग जगत आर्थिक गतिविधियों में गिरावट के मद्देनजर वित्तीय और मोद्रिक प्रोत्साहन तथा आर्थिक सुधारों को गति देने की अपील कर रहा है। वित्त वर्ष 2011-12 में आर्थिक वृद्धि के 6.5 फीसद रह गयी जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि 8.4 प्रतिशत थी।
पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में औद्योगिक वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत रह गयी जो पिछले नौ साल की न्यूनतम तिमाही औद्योगिक वृद्धि है। मुखर्जी ने कहा ‘‘2012-13 में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य रहने की भविष्यवाणी की गई है और हाल के सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत में तेज गिरावट हुई है, इन बातों से घरेलू अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में सुधार में मदद मिलनी चाहिए।’’

मुखर्जी ने कहा कि 2011-12 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर उल्लेखनीय रूप से घटकर 6.5 फीसद हो गई और यह निराशाजनक रहा। सख्त अप्रत्यक्ष कर प्रबंधन को देश की अर्थव्यवस्था के विकास की बुनियाद करार देते हुए मुखर्जी ने केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड :सीबीईसी: से कहा कि वे समय पर कर संग्रह सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा ‘‘आपके विभाग के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं, आप पर सामने सभी वैध कर-बकाए और निश्चित तौर पर बिना लोगों पर बेवजह दबाव डाले समयबद्ध संग्रह सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।’’ मुखर्जी ने उनसे अपना लेखा और लोगों के रिकार्ड की जांच संबंधी कौशल को बढ़ाने के लिए कहा ताकि उस कर को भी सरकारी खजाने में लाया जा सके जो आकलन में बच गया हो और बुद्धिमानी व सावधानी से की गई धोखाधड़ी की पहचान की जा सके।

मुखर्जी ने उम्मीद जाहिर की कि सीबीईसी 2012-12 के लिए तय अप्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य पूरा कर सकेगा। उन्होंने कहा ‘‘उन्होंने (सीबीईसी) पिछले साल अच्छा प्रदर्शन किया गया था, मुझे भरोसा है कि विभाग चालू वित्त वर्ष के दौरान न सिर्फ लक्ष्य पूरा करने बल्कि अधिक कर-संग्रह के हरसंभव कोशिश करेगा।’’ अप्रत्यक्ष कर संग्रह (केंद्रीय उत्पाद, सीमा एवं सेवा कर) का 2012-13 का लक्ष्य 4,99,694 करोड़ रुपए है जो पिछले साल के मुकाबले 27 फीसद अधिक है।

वृद्धि दर में कमी और जून 2011 में पेट्रोलियम उत्पादों पर हुई शुल्क कटौती के बावजूद वर्ष 2011-12 में अप्रत्यक्ष कर संगह 3,92,781 करोड़ रुपए रहा जो 3,94,000 करोड़ रुपए के लक्ष्य से थोड़ा ही कम रहा।

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