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'अफवाह फैलाने वाले पर नकेल कसे पाक'

 
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'अफवाह फैलाने वाले पर नकेल कसे पाक'
नई दिल्ली/बेंगलुरू: असम हिंसा के बाद मुम्बई में फैली उसकी आग और उसके बाद पूर्वोत्तर के लोगों में भय का माहौल पैदा करने के लिए सीमापार से रची गई साजिश पर भारत ने पाकिस्तान से दो टूक बात कही है। भारत ने पाक से उन तत्वों पर नकेल कसने को कहा है, जिन्होंने सोशल मीडिया और एसएमएस के सहारे हजारों की संख्या में पूर्वोत्तर के लोगों को अपने घरों को लौटने को मजबूर किया।

पूर्वोत्तर के बाशिंदों को धमकी मिलने और उन पर हमले की अफवाह के पीछे पाकिस्तानी तत्वों का हाथ होने की बात कहने के बाद भारत ने रविवार को पाकिस्तान के समक्ष यह मुद्दा उठाया। भारत ने पाकिस्तान से ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक के बीच रविवार को बातचीत हुई जिसमें यह मुद्दा उठाया गया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में रविवार को कहा गया, "रहमान मलिक ने फोन कर शिंदे से बात की। इस दौरान शिंदे ने यह मामला उठाया।"

बयान के मुताबिक शिंदे ने रहमान से कहा कि ऐसे तत्व सोशल नेटवर्किंग साइट्स का सहारा लेकर देश में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और उन पर लगाम कसने के लिए पाकिस्तान से सहयोग अपेक्षित है।

इससे पहले पाकिस्तान ने भारत के उस आरोप को खारिज कर दिया जिसमें शनिवार को कहा गया था कि असम हिंसा और म्यांमार हिंसा में मारे गए लोगों की तस्वीरें तोड़मरोड़कर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के जरिये पाकिस्तान से फैलाई गई, जिसके बाद देशभर में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों में भय समा गया और वे अपने घरों को लौटने लगे।

पाकिस्तान उच्चायोग के सूत्रों ने बताया कि ऐसे बयानों से दोनों देशों के बीच विश्वास की खाई और चौड़ी होगी।

ज्ञात हो कि केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने शनिवार को कहा था, "चक्रवाती तूफान और अन्य हादसों में बोडोलैंड और म्यांमार में मारे गए लोगों की तस्वीरों को तोड़-मरोड़ कर और इसे असम हिंसा और म्यांमार हिंसा में मारे गए लोगों के रूप में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के जरिये फैलाई गई। इसके केंद्र में पाकिस्तान था।"

सिंह ने कहा, "ऐसे 76 वेबसाइट की पहचान की गई जिस पर विकृत तस्वीरें लगाई थी और इनमें से ज्यादातर तस्वीरें पाकिस्तान में अपलोड की गई थीं।"

सिंह ने कहा कि इन सभी वेबसाइट को बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसी तरह की 34 अन्य वेबसाइट की पहचान की गई है जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

पाकिस्तानी सूत्रों ने कहा कि ये मनगढ़ंत आरोप हैं। "एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने और दोष मढ़ने से बेहतर है भारत अपने आंतरिक मुद्दों से निपटे।"

बहरहाल, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने असम में जातीय हिंसा पर गहरा दुख जताया। साथ ही उन्होंने फैली अफवाहों के मद्देनजर जिस परिस्थिति में पूर्वोत्तर के बाशिंदों को देश के अलग-अलग हिस्सों से पलायन करना पड़ा, उसकी निंदा की।

सोनिया ने कहा कि एक समाज की सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक एकता के दुश्मनों से है। उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर के लोगों को जिस स्थिति का सामना करना पड़ा है, हम सभी को उसकी निंदा करनी चाहिए।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मौके पर कहा कि पूर्व प्रधनमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने एक मजबूत और समृद्ध भारत का सपना देखा था। "वह जानते थे कि देश तभी तरक्की कर सकता है जब लोग शांति, सहिष्णुता और सद्भाव के साथ एकदूसरे से मिलजुलकर रहेंगे।"

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मसले पर खुफिया तंत्र की विफलता के लिए केंद्र सरकार की निंदा की। भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की भी निंदा की। गोगोई ने दावा किया है कि उन्हें हमेशा से संदेह था कि इन घटनाओं में विदेश का हाथ है। सिन्हा ने सवाल किया कि जब उन्हें संदेह था तब वह निष्क्रिय क्यों रहे।

सिन्हा ने कहा, "असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें हमेशा आभास होता रहा कि इन घटनाओं में पाकिस्तान का हाथ है। कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री जब यह कह रहे हैं तो स्पष्ट है कि खुफिया तंत्र विफल रहा।" उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक मीडिया की आक्रामकता थी जिसे पाकिस्तान ने खुली छूट दे दी और यहां की सरकार कुछ न कर सकी।

उधर, पूर्वोत्तर के लोगों का विभिन्न राज्यों से पलायन का दौर रविवार को कुछ थम गया लेकिन लोगों में भय अभी भी बरकरार है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस सिलसिले में सात मामले दर्ज किए हैं और पुलिस ने अफवाह फैलाने के आरोप में 16 लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस की चुस्ती, 16 लोगों की गिरफ्तारी और दोषियों का सुराग देने पर एक लाख रुपये इनाम की घोषणा के बाद लोगों में विश्वास कायम हुआ है लेकिन लोग एसएमस के जरिये मिले 20 अगस्त का अल्टीमेटम भुला नहीं पा रहे हैं।

इन धमकियों की वजह से पिछले तीन दिनों में हजारों की तादाद में लोग बेंगलुरू से गुवाहाटी पलायन कर गए। इन दिनों अत्यधिक टिकट की बिक्री होने की वजह से रेलवे को विशेष रेलगाड़ी तक चलानी पड़ी। हालांकि इसमें अब कमी आई है और रेलवे का कहना है कि शनिवार को ज्यादा टिकट नहीं बिके इसीलिए विशेष रेलगाड़ी चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। नियम के मुताबिक करीब 2500 टिकट बिकने पर विशेष रेलगाड़ी चलाए जाने का प्रावधान है।

ज्ञात हो कि असम में बोडो जनजाति और मुस्लिमों के बीच हुई हिंसक झड़पों के प्रतिशोध में अन्य राज्यों में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों पर हमले की आशंका वाली अफवाहों से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने 15 दिनों के लिए बड़ी संख्या में एसएमएस और एमएमएस भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इस सप्ताह कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से हजारों पूर्वोत्तरवासी पलायन कर गए।

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