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गुरु की दया याचिका पर टिप्पणी से प्रणब का इनकार

 
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गुरु की दया याचिका पर टिप्पणी से प्रणब का इनकार
नई दिल्ली: नवनिर्वाचित राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को कहा कि वह 2001 में संसद पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका पर तबतक टिप्पणी नहीं करेंगे, जबतक कि वह पदभार ग्रहण करने के बाद मामले का अध्ययन नहीं कर लेते।

मुखर्जी ने एनडीटीवी के साथ एक बातचीत में कहा, "मैं जबतक पदभार ग्रहण नहीं कर लेता और इस मुद्दे का अध्ययन नहीं कर लेता, मैं अफजल गुरु पर टिप्पणी नहीं कर सकता।"

प्रणब एक दिन पहले ही देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में भारी मतों से निर्वाचित हुए हैं। प्रणब की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब शिव सेना ने मांग की है कि मुखर्जी को गुरु की दया याचिका खारिज कर देनी चाहिए। राष्ट्रपति चुनाव में शिव सेना ने मुखर्जी का समर्थन किया था।

शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने पार्टी मुखपत्र सामना के ताजा अंक में कहा था, "आपसे हमारी कई अपेक्षाएं हैं। हम आपसे आग्रह करते हैं कि अफजल गुरु की दया याचिका खारिज कर दें और उसे फांसी पर लटका दें। प्रणबदा आपको इस काम को प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए और देश के राष्ट्रपति के रूप में अपना करियर शुरू करना चाहिए। हम आपसे इसकी अपेक्षा करते हैं।"

मुखर्जी को राष्ट्रपति चुनाव में न केवल सत्ताधारी कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के घटकों का समर्थन मिला, बल्कि जनता दल (युनाइटेड) और शिव सेना जैसे दलों ने अपने गठबंधन से बाहर जाकर प्रणब का समर्थन किया।

मुखर्जी कहते हैं कि इस स्थिति ने उन्हें हिला दिया है। उन्होंने कहा, "मैं खासतौर से इस बात से खुश हूं कि जो लोग हमारी पार्टी से सम्बंधित नहीं हैं और उन्होंने वादा किया था, उन सभी ने अपना वादा निभाया और मुझे वोट दिया। सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता। मैं इसे अपने सार्वजनिक जीवन को एक बड़ा पुरस्कार मानता हूं।"

प्रणब ने कहा, "मिरती से रायसिना हिल तक का एक लम्बा सफर रहा है। मैं बचपन में बहुत शैतान था। मैं हमेशा मुश्किल से जूझता रहता था।" मुखर्जी बुधवार को शपथ ग्रहण करेंगे और उसके बाद राष्ट्रपति भवन जाकर देश के राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करेंगे।

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