दादा का दर्द, न जाने कोई...!
दादा करें तो क्या... मुगल गार्डन में भी कितना टहलेंगे... किताबें भी कितनी पढ़ें... उन्होंने करीब 100 पत्रकारों को चाय पर बुलाया... थोड़ी बातचीत हुई... शायद उससे महामहिम का मन कुछ हल्का हुआ होगा… वह अपने सहयोगी मंत्रियों से मिलना चाहते हैं... जाहिर है, फिर एक बडे मंत्री से संपर्क साधा गया... मालूम चला कि मंत्री जी दिल्ली से बाहर हैं... अब मंत्री जी से कहा गया है कि दिल्ली आते ही इत्तला करें और दो-तीन घंटे का वक्त लेकर आएं...
महामहिम की महामजबूरी…
यही नहीं, स्वतंत्रता सेनानियों के लिए आयोजित एक समारोह में प्रणब दा प्रोटोकॉल भूल गए और अपनी पुरानी आदत के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आगे चलने का हाथ से इशारा भी कर दिया, बाद में इसे प्रोटोकॉल के मुताबिक सही किया गया...
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