आप यहां हैं : होम » देश से »

Go Social with Facebook Close

Our Social Reader lets you keep track of your favorite NDTV content (text, photos & videos) on your Facebook Timeline, and discover new content with friends. Read FAQs

NDTV

Facebook

Go Social with Facebook Close

Our Social Reader lets you keep track of your favorite NDTV content (text, photos & videos) on your Facebook Timeline, and discover new content with friends. Read FAQs

NDTV

Facebook

Enable Social Reading
No, Thanks

राष्ट्रपति चुनाव : कहीं 2014 की रणनीति तो नहीं...

 
email
email
नई दिल्ली: दो बड़े नेताओं प्रणब मुखर्जी और पीए संगमा ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए आधिकारिक नामांकन कर दिया है। दोनों ही कद्दावर नेता हैं। जिन खेमों से इन्हें समर्थन मिला है दोनों ने जम कर शक्ति प्रदर्शन किया।

पहली बार ऐसा नहीं हुआ लेकिन इस बार कुछ ज्यादा झलक रहा है। एक तरफ सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, राहुल गांधी के साथ मुलायम सिंह यादव नामांकन पत्र को आगे बढ़ा रहे थे, वहीं फारूक़ अब्दुल्ला, लालू प्रसाद यादव राम विलास पासवान, अजित सिंह, टीआर बालू भी पीछे नहीं थे। लगभग पूरा यूपीए साथ खड़ा नज़र आ रहा था। प्रणब दा को जेडीयू का तो समर्थन है लेकिन इस पार्टी से कोई वहां मौजूद नहीं था।

दोपहर 2.31 बजे पीए संगमा साहब ने अपना नामांकन भरा। उनके साथ लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, वसुन्धरा राजे पार्टी के बड़े नेता तो थे, खास रहा मुख्यमंत्रियों का जमावड़ा। नवीन पटनायक, प्रकाश सिंह बादल, मनोहर परिकर, शिवराज सिंह चौहान आदि। इन दो लम्हो की तस्वीर आगे आने वाले 2014 के समीकरणों की राह के संकेत दिखा रही थी।

नीतीश ने सरकार से बीस हजार करोड़ का पैकेज तो ले लिया है लेकिन किसी को यहां न भेज कर दोनों रास्ते खुले रख रहे हैं। नवीन पटनायक तो यहां मौजूद थे लेकिन उनके जेहन में प्यारीमोहन महोपात्रा की बगावत याद होगी। एनडीए भी समझ रहा है कि जब संगमा के बेटे कोनराड जब उड़ीसा गए थे कुछ अहम एमएलए वहां नहीं पहुंचे थे।

आज कांग्रेस के छत्तीसगढ़ से नेता अरविन्द नेताम संगमा के साथ नज़र आये तो कांग्रेस ने उन्हें निलम्बित कर दिया। अब क्रॉस वोटिंग के आकलन दोनों खेमों में लग रहे होंगे। खास ये भी रहा कि आज संगमा जी ने ’आदिवासी’ के नाम पर वोट तो मांगे ही साथ ही कांग्रेस को जम कर चेतावनी दे डाली। संगमा ने कहा कि जिन आदिवासियों ने कांग्रेस का साथ लम्बे समय से दिया उनको समर्थन न करने का खमियाजा कांग्रेस को आगे भुगतना पड़ेगा।

वोटों की गिनती प्रणब मुखर्जी के पक्ष में जा रही है लेकिन उत्तर पूर्व के बड़े नेता को साथ ला कर बीजेपी ने 2014 की तैयारी मज़बूत कर ली है। ये वो इलाका है जहां बीजेपी की पकड़ कमजोर है।

ये साफ है कि इस बार का राष्ट्रपति चुनाव बेहद दिलचस्प दिख रहा है। राजनीति हावी है। विचारधाराओं को किनारे रख राजनीतिक अवसरवाद दिख रहा है। कहीं शख्सियत अहम है तो कहीं समीकरण। अब इंतजार है तो बस 19 जुलाई का।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...


Advertisement