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टिकाऊ वस्तुओं की कीमतों में फिर वृद्धि के आसार

 
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नई दिल्ली: रुपये के अवमूल्यन और लागत में वृद्धि के असर से निपटने के लिए कम्पनियां टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। लिहाजा यदि इस महीने रेफ्रिजरेटर या एयरकंडीशनर खरीदने की आपकी योजना हो तो देर मत कीजिए।

औद्योगिक सूत्रों का कहना है कि इस बार कीमतों में वृद्धि चार से 10 प्रतिशत के बीच होगी। अधिकांश कम्पनियों ने इसके पहले बजट के बाद कीमतें बढ़ाई थीं।

सैमसंग इंडिया (घरेलू वस्तुएं) के उपाध्यक्ष महेश कृष्णन ने कहा, "कम्पनी रेफ्रीजरेटर और वाशिंग मशींस की कीमतें बढ़ाएगी।"

कृष्णन, वृद्धि का वास्तविक प्रतिशत नहीं बता पाए, क्योंकि कम्पनी अभी इसके बारे में गुणा-गणित कर रही है। उन्होंने कहा, "अभी हम इस पर काम कर रहे हैं।"

उद्योग एवं व्यापार के सूत्रों का कहना है कि कीमतें उत्पादों की आयात मात्रा पर निर्भर करेंगी। टिकाऊ वस्तुओं में 30-70 प्रतिशत हिस्सा आयात किया जाता है। लगभग सभी कम्पनियां अपने रेफ्रिजरेटर्स, एयरकंडीशनर्स और वाशिंग मशींस पूर्ण निर्मित अवस्था में आयात करती हैं। अंदर के सूत्रों ने कहा है कि पेट्रोल उत्पादों और माल भाड़ों में वृद्धि के कारण लागत बढ़ गई हैं।

भारतीय बाजार में छह दरवाजे वाले रेफ्रिजरेटर पेश करने की योजना बना रही कम्पनी, हेयर ने कहा है कि वह सबसे पहले वाशिंग मशींस और एलसीडी टीवी की कीमतें बढ़ा रही है।

हेयर इंडिया के प्रेसीडेंट एरिक ब्रैगैंजा ने कहा, "हम इस महीने वाशिंग मशींस और एलसीडी टीवी की कीमतें तीन से पांच प्रतिशत बढ़ाने जा रहे हैं।"

व्हर्लपूल, एलजी और गोदरेज भी कीमतों में वृद्धि की घोषणा करने से पहले मुनाफे पर बन रहे दबाव का अनुमान लगा रहे हैं।

व्हर्लपूल इंडिया के उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट मामले एवं रणनीति) शांतनु दासगुप्ता ने कहा, "मूल्य निर्धारण कोई आसान काम नहीं है, यह विभिन्न किस्मों के मूल्यांकन पर आधारित होता है जो मूल्य निर्धारण को प्रभावित करते हैं।"

दासगुप्ता ने कहा कि मूल्य वृद्धि का मूल कारण महंगाई और रुपये का अवमूल्यन है।

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