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जंतर मंतर पर लोगों की नाराजगी से शीला दीक्षित लौटने को मजबूर

 
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जंतर मंतर पर लोगों की नाराजगी से शीला दीक्षित लौटने को मजबूर

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नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को उस समय लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा, जब वह गैंगरेप पीड़ित की मौत पर जंतर मंतर पर आयोजित शोक समारोह में हिस्सा लेने पहुंचीं। लोगों की नाराजगी के कारण उन्हें जंतर मंतर से लौटने को मजबूर होना पड़ा।

जंतर मंतर पर करीब सैकड़ों लोग मृत लड़की के प्रति शोक प्रकट करने के लिए एकत्र हुए थे और जब दोपहर 2 बजे शीला वहां पहुंचीं, तब उन्हें लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बहरहाल, जंतर मंतर छोड़ने से पहले उन्होंने वहां एक मोमबत्ती जलाई और मृतक के प्रति शोक प्रकट किया।

एक प्रदर्शनकारी ने पूछा, क्या आप किसी की मौत को राजनीतिक रंग देना चाहती हैं? जब प्रदर्शन शुरू हुआ, तब क्यों नहीं आई? जब आपके घर के बाहर प्रदर्शन हुआ, तब पुलिस को हमें हटाने को कहा गया। कुछ ही मिनट बाद उन्हें पुलिस की सुरक्षा में इलाके से बाहर निकाला गया।

गौरतलब है कि सुबह 10 बजे से ही लोग जंतर मंतर पर एकत्र होना शुरू हो गए थे। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया, कुमार विश्वास ने भी मुंह बांधकर और काले कपड़े पहनकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

केजरीवाल ने ट्वीट किया कि उसका निधन हम सभी के लिए शर्म की बात है। आइए प्रण करें कि हम उसकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाने देंगे। प्रदर्शनकारियों ने इंडिया गेट और रायसीना हिल्स पर जबर्दस्त सुरक्षा इंतजाम के खिलाफ नारेबाजी भी की।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार किसी के निधन पर शोक भी नहीं व्यक्त करने दे रही है, यह संवेदनहीनता है, यह पूरी तरह नाकाबंदी है, मेट्रो स्टेशन तक बंद कर दिए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि हर पुलिसकर्मी को प्रार्थना करनी चाहिए और महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने में सामूहिक विफलता के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।

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