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राहुल की नेतृत्व क्षमता पर उठे सवाल, छिड़ी बहस

 
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राहुल की नेतृत्व क्षमता पर उठे सवाल, छिड़ी बहस

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नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को भले ही प्रधानमंत्री पद के अगले उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है लेकिन महत्वपूर्ण मसलों पर उनकी चुप्पी और जिम्मेदारियों से दूर भागने की कोशिश उनकी खामियां बनकर उभरी हैं। उनकी इन्हीं तथाकथित कमजोरियों को मुद्दा बनाकर एक विदेशी पत्रिका ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा दिए हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा) को भी राहुल की क्षमता पर संदेह होने लगा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तो मानो इसके इंतजार में ही बैठी थी।

इंग्लैंड की पत्रिका 'द इकॉनमिस्ट' में बुधवार को एक टिप्पणी छपी जिसमें कहा गया है कि राहुल बड़ी जिम्मेदारी से बचते हैं क्योंकि उनमें ऐसी जिम्मेदारियों को निभाने की भूख ही नहीं है। टिप्पणी में यह भी कहा गया है राहुल ने एक नेता के तौर पर अब तक न तो कोई योग्यता दिखाई है और न ही बड़ी जिम्मेदारी के लिए उनमें तत्परता दिखती है।

राजनीतिक दलों में सबसे पहले सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आई जो अपेक्षा के अनुरूप नहीं थी। केंद्र में कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रही सपा ने राहुल की नेतृत्व क्षमता पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि वह गत दो वर्षो तक लोकसभा में चुप्पी साधे रहे जब देश कई अहम मुद्दों पर चर्चा कर रहा था।

सपा महासचिव मोहन सिंह ने कोलकाता में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "जो भी भारतीय राजनीति को समझता है वह यही कहेगा कि देश जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है उसके मद्देनजर राहुल गांधी में देश के नेतृत्व की क्षमता नहीं है।"

सिंह ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राहुल गांधी लोकसभा में चुप्पी साधे बैठे रहे जबकि कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, "गत दो वर्षों में हमें एक भी मौका नहीं मिला जब हम यह सुन पाते कि कई समस्याओं का सामना कर रहे देश से जुड़े संवेदनशील मसले पर राहुल ने संसद में अपना विश्लेषण रखा हो। जब किसी ने उन्हें बोलते हुए नहीं सुना है, कैसे कोई कह सकता है कि उसके हाथों में देश सुरक्षित है।"

भाजपा को तो जैसे मौके का इंतजार था। उसने तो यह तक कह दिया कि ब्रांड राहुल तो नजर ही नहीं आता है।

भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि महंगाई हो या भ्रष्टाचार का मुद्दा या फिर कोयला ब्लॉक आवंटन पर चल रहा विवाद हमने राहुल को बोलते नहीं सुना। यहां तक कि उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर कुछ भी नहीं कहा जिसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा को जेल जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन का मुद्दा लगभग एक महीने से चल रहा है लेकिन राहुल ने चुप रहना ही मुनासिब समझा।

रूडी ने कहा, "कोयला ब्लॉक आवंटन का मुद्दा एक महीनों से सुर्खियां बन रहा है। कभी उन्हें इस कोल गेट के बारे में बोलते नहीं सुना। इसलिए ब्रांड राहुल नजर नहीं आता।"

कांग्रेस में राहुल के बड़ी भूमिका में आने के संबंध में पूछे गए एक सवाल पर रूडी ने कहा, "जब 42 साल में कोई फिट नहीं बैठ रहा है तो कैसे कहा जाए कि 52 साल में वह फिट बैठेगा। कोई यह कैसे कह सकता.. कांग्रेस को ही फैसला लेना है।" उनसे जब पूछा गया कि वह कैसी फिटनेस की बात कर रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया, "राजनीतिक, प्रशासनिक और मानसिक।"

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