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10 साल में पहली बार रेल किरायों में बढ़ोतरी का ऐलान, 21 जनवरी से लागू

 
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10 साल में पहली बार रेल किरायों में बढ़ोतरी का ऐलान, 21 जनवरी से लागू

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को 10 सालों में पहली बार रेलवे के सभी क्षेत्रों के यात्री किराए में वृद्धि कर दी। नए यात्री किराए 21 जनवरी की मध्यरात्रि से लागू होंगे।

इस घोषणा के साथ ही विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया और वृद्धि वापस लेने की मांग की। हालांकि रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े नेटवर्क को चालू रखने के लिए ऐसा करना जरूरी था।

उन्होंने कहा कि इस कदम से हासिल होने वाले 6,000 करोड़ रुपये की आय से रेलवे की सेवा और सुरक्षा बेहतर की जाएगी। उन्होंने साथ ही कहा कि किराए को बजट में नहीं छुआ जाएगा।

बंसल ने संवाददाताओं से कहा, "10 सालों में आधारभूत किराए में वृद्धि नहीं की गई थी और रेलवे की वित्तीय स्थिति पर इसका बुरा असर पड़ रहा था।"

दूसरी श्रेणी के उपशहरी रेलगाड़ियों में शयन यानों में किराया प्रति किलोमीटर दो पैसे बढ़ाया गया, दूसरी श्रेणी के गैरउपशहरी रेलगाड़ियों में प्रति किलोमीटर तीन पैसे बढ़ाया गया, दूसरी श्रेणी के मेल एक्सप्रेस रेलगाड़ियों में चार पैसे प्रति किलोमीटर, वातानुकूलित कुर्सी यान में प्रति किलोमीटर 10 पैसे तथा वातानुकूलित तीसरी, दूसरी और प्रथम श्रेणी में क्रमश: तीन, छह और 10 पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि हुई है।

मार्च 2012 में भी प्रथम श्रेणी और सभी वातानुकूलित श्रेणी में किराया बढ़ाया गया था।

मंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने, रेलगाड़ियों में सफाई व्यवस्था बनाने और रेलवे स्टेशनों की स्थिति में सुधार करने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी था।

विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार द्वारा रेल किरायों में की गई वृद्धि की निंदा की है। इन दलों का कहना है कि यह वृद्धि न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण, बल्कि अस्वीकार्य भी है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रेल किराए में वृद्धि को अस्वीकार्य और नृशंस करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "सरकार किराए बढ़ा रही है, लेकिन सुविधाएं और सुरक्षा के लिए वह कुछ नहीं कर रही है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य और नृशंस है।"

उन्होंने कहा, "10 सालों में एक बार किराया बढ़ाया जाना कोई मुद्दा नहीं है। मूल्य वृद्धि तभी न्यायोचित होती, जब सुविधाएं भी बेहतर होतीं। उपभोक्ता अच्छी सेवा के लिए पैसे देने को तैयार हैं। आप बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा मुहैया कराइए.. जनता पैसे देने को तैयार है।"

रेल किराए में हुई वृद्धि पर पूर्व रेलमंत्री व तृणमूल कांग्रेस के नेता मुकुल रॉय ने कहा, "रेलवे के राजस्व को बढ़ाने के अन्य तरीके भी हैं, लेकिन उपायों पर न जाकर सरकार ने कोष बढ़ाने का आसान तरीका अपनाया। इससे आम जन पर बोझ बढ़ेगा।"

सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए रॉय ने कहा, "वे जानते हैं कि संसद में उनके पास संख्या नहीं है, इसलिए संसद को नजरअंदाज कर बजट से पहले उन्होंने रेल किराए में बढ़ोत्तरी की। यह आम लोगों के हितों के खिलाफ है। रेलवे आम आदमी के लिए परिवहन का सबसे लोकप्रिय माध्यम है।"

बंसल पर निशाना साधते हुए तृणमूल नेता सौगत रॉय ने कहा, "पवन बंसल ने सीधा रास्ता अपनाया। यात्री किराए में वृद्धि ही रास्ता नहीं है। सरकार ने सभी श्रेणियों के किराए में वृद्धि की है। उन्होंने मध्मम और निचले वर्ग को कोई राहत नहीं दी। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।"

लोकसभा में माकपा के नेता और रेलवे की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष बासुदेव आचार्य ने रेल किराया वृद्धि का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि इससे आम आदमी पर बोझ पड़ेगा।

आचार्य ने कहा, "यह निराधार बात है कि रेलवे ने विगत 10 वर्षो से किराए में कोई वृद्धि नहीं की है। पांच साल तक यात्रियों से सुरक्षा अधिभार की वसूली करते रहे बाद में इसे विकास अधिभार में बदल दिया। ये अधिभार भी रेलवे के राजस्व से जुड़े हैं।"

आचार्य ने कहा कि हम वृद्धि का विरोध करते हैं, क्योंकि यह आम आदमी पर बोझ डालने वाला कदम है।

वाराणसी निवासी शिक्षक अविनाश चंद्र मिश्रा ने कहा कि पहले ही रसोई गैस, डीजल, पेट्रोल और खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से महंगाई का शिकंजा आम आदमी पर कसा हुआ है। अब रेलभाड़े में बढ़ोत्तरी से आम आदमी पर और बोझ बढ़ेगा।

कानपुर में निजी कंपनी में बीमा एजेन्ट आशीष कुमार ने कहा कि आए दिन दाम बढ़ाने वाली केंद्र सरकार ने आम आदमी को एक और बड़ा झटका दिया है। रेलभाड़े में ये बढ़ोतरी महंगाई से त्रस्त आम आदमी पर आम आदमी की जेब पर डाका है।

लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय में क्लर्क के पद पर तैनात राम स्वरूप सिंह ने कहा कि देश की करीब चालीस फीसदी आबादी रोलगाड़ी से सफर करती है। रेल भाड़े में वृद्धि से लोगों को काफी परेशानी होगी।

एक सरकारी बैंक में कार्यरत पारुल गुप्ता ने कहा कि रेलयात्री भाड़ा काफी समय से नहीं बढ़ा। ठीक है सरकार किराया बढ़ाए लेकिन सुविधाएं तो दे। लोगों को रेलगाड़ियों के टॉयलेट में बैठकर सफर करना पड़ता है। आए दिन महिलाओं के साथ रेलगाड़ियों में छेड़खानी की घटनाएं होती है। रेलभाड़े में वृद्धि के साथ सरकार को सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने पर भी खास ध्यान देना चाहिए।
(इनपुट आईएएनएस से भी)

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