आरबीआई ने की बड़ी तस्वीर की अनदेखी : उद्योग जगत
वह भी ऐसे समय, जबकि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटने से करोड़ों लोगों के रोजगार पर तलवार लटक रही है।
उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट से करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट दिखाई दे रहा है। ऐसे में महंगाई पर अंकुश लगाने वाली नीतिगत पहल में बड़ी तस्वीर खो गई है।
रिजर्व बैंक के रुख पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए फिक्की ने कहा कि रेपो दर में कमी न करने के आरबीआई के फैसले को समझना मुश्किल है क्यों कि वह खुद स्वीकार कर रहा है कि आर्थिक वृद्धि दर में उल्लेखनीय गिरावट के बीच थोक और खुदरा स्तर पर मुद्रास्फीति का ऊंचा बने रहना आपूर्ति की बाधाओं की ओर इशारा करता है।
रिजर्व बैंक ने हालांकि ब्याज दरों में कोई छेड़छाड़ न करने के फैसले का यह कहते हुए समर्थन किया है कि वृद्धि-मुद्रास्फीति की मौजूदा स्थिति में वृद्धि दर में नरमी के लिए कई तत्व जिम्मेदार हैं। विशेषतौर पर निवेश, जबकि ब्याज दर की भूमिका अपेक्षाकृत कम है।
फिक्की ने कहा कि यह बिल्कुल साफ नहीं है कि कैसे आपूर्ति बाधाओं और महंगी सब्जियां व प्रोटीन वाले उत्पाद के दामों में तेजी के दौर में ऊंची ब्याज दर के साथ मुकाबला किया जाए।
उद्योग मंडल ने कहा कि रिजर्व बैंक की उच्च ब्याज दर की नीति के साथ सुधार की कमी के कारण अर्थव्यवस्था लंबे समय तक वृद्धि दर में कमी और उंची मंहगाई दर के दौर में फंसी है। यह हमें किसी बड़े संकट के करीब ले जाएगी।
फिक्की के महासचिव राजीव कुमार ने कहा कि रेपो दर में कटौती करना समय की मांग थी। यह वृद्धि दर बढाने में सहायक होती।
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