कमजोर पड़ने लगे हैं सुस्ती के कारक : मुखर्जी
आर्थिक विकास के आंकड़े पर प्रतिक्रिया में मुखर्जी ने कहा, "जिन कारकों ने सुस्ती में योगदान किया है, उनमें शामिल हैं सख्त मौद्रिक नीति, जिसके कारण ब्याज दरें काफी बढ़ गईं और कमजोर वैश्विक संकेत, जिसने घरेलू निवेश को प्रभावित किया।"
उन्होंने कहा, "खनन क्षेत्र में पर्यावरण नीति की बाधाओं का भी घरेलू निवेश प असर पड़ा होगा।" मुखर्जी ने एक बयान में कहा, "इनमें से अधिकतर कारक अपने निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। सख्त दर के चक्र में वापसी शुरू हो चुकी है। खनन क्षेत्र में विकास वापस दिखने लगा है, 2011-12 की चौथी तिमाही में बेहतर निवेश दिखाई पड़ा।"
मंत्री ने कहा कि इन कारकों के अलावा 2012-13 में मानसून के भी बेहतर रहने की सम्भावना है, जो आर्थिक विकास में सकारात्मक योगदान करेगा। देश की आर्थिक विकास दर जनवरी-मार्च तिमाही में घटकर 5.3 फीसदी रही, जो पिछले नौ साल में सबसे कम है। गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण और कृषि क्षेत्र के बुरे प्रदर्शन के कारण विकास दर में गिरावट रही।
विकास दर पूरे कारोबारी साल 2011-12 के दौरान 6.5 फीसदी दर्ज की गई जो 2002-03 के बाद से न्यूनतम है, जब यह चार फीसदी दर्ज की गई थी। जनवरी-मार्च 2012 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र का 0.3 फीसदी नकारात्मक विकास हुआ। जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसमें 7.3 फीसदी विकास रहा था।
सरकार ने इस साल के शुरू में 6.9 फीसदी आर्थिक विकास दर रहने का अनुमान जारी किया था। जबकि इससे पिछले साल आर्थिक विकास दर 8.4 फीसदी रही थी।
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