खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में बढ़कर 10.79 प्रतिशत
गत नवंबर और अक्तूबर में यह खुदरा भावों पर आधारित मुद्रास्फीति क्रमश: 9.90 प्रतिशत और 9.75 प्रतिशत थी।
आज जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार, जनवरी में सब्जियों के दाम एक साल पहले की तुलना में 26.11 फीसदी ऊंचे रहे। खाद्य तेल व चिकनाई के भाव सालाना आधार पर औसतन 14.98 प्रतिशत तथा मांस, मछली और अंडे 13.73 प्रतिशत तेज रहे। इसी तरह अनाज और दलहन क्रमश: 14.90 प्रतिशत और 12.76 प्रतिशत महंगे हुए। चीनी 12.95 प्रतिशत ऊंची रही। कपड़े और जूते चप्पल की कीमतों में भी इस दौरान 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं से संबंधित खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी में बढ़कर 10.73 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने 10.42 प्रतिशत थी।
ग्रामीण आबादी संबंधी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) इसी दौरान बढ़कर 10.88 प्रतिशत हो गया, जो दिसंबर,12 में 10.74 प्रतिशत थी।
थोकबिक्री मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के जनवरी आंकड़े गुरुवार को जारी किए जाने हैं। दिसंबर,12 में थोकबिक्री मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 7.24 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक पांच से छह प्रतिशत के अधिक की थोक मूल्य मुद्रास्फीति को सहज स्थिति के विपरीत मानता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार तीन तिमाही तक सख्त नीति अपनाने के बाद पिछले महीने अपने मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों में चौथाई (0.25) प्रतिशत की कटौती की थी और बैंकों की आरक्षित नकदी पर 0.25 प्रतिशत की ढील देकर बैंकों के पास 18,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी सुलभ कराने के कदम उठाए थे। इसका उद्देश्य अर्थिक क्रियाओं को गति प्रदान करने में मदद करना है।
रिजर्व बैंक का अनुमान है कि इस वर्ष मार्च के अंत तक थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 6.8 प्रतिशत होगी।
निरंतर मुद्रास्फीति को लेकर चिंतित रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2012 के बाद से प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा था, जबकि जनवरी 2013 में इसे कम किया।
इस बीच औद्योगिक उत्पादन दिसंबर 2012 में 0.6 प्रतिशत सिकुड़ गया, जबकि पिछले वर्ष इसी माह औद्योगिक उत्पादन 2.7 प्रतिशत बढ़ा था।
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