पैसा वसूल है 'एक था टाइगर'
टाइगर वैज्ञानिक के घर की देखरेख करने वाली ज़ोया से दोस्ती बढ़ाता है, लेकिन कुछ दिलचस्प मुलाकातों के बाद वह ज़ोया को चाहने लगता है। मगर टाइगर की दुनिया तब बदल जाती है, जब ज़ोया की हकीकत उसके सामने आती है। ज़ोया कौन है, यह बताकर मैं फिल्म का मज़ा किरकिरा नहीं करूंगा।
डायरेक्टर कबीर ख़ान की फिल्म 'एक था टाइगर' सलमान ख़ान के स्टार पावर और कन्टेन्ट की बेहतरीन मिसाल है। सलमान टपोरी इमेज और माइन्डलेस कॉमेडी से बाहर हुए हैं। माशाअल्लाह क्या एक्शन है, फिल्म में। सलमान देश के गद्दार पर जूता रखकर एंट्री लेते हैं और अपनी टिपिकल स्टाइल में कहते हैं, रविन्दर चलना तो तुझे होगा…जिंदा या मुर्दा। फिर इराक की छत और अटरिया पर तेज़ी से कूदते-फांदते, सलमान डबलिन की ट्रॉम से टकराती कार की चिंगारियों के बीच खड़े नज़र आते हैं।
क्यूबा की सड़कों पर सलमान और कैटरीना तहलका मचाते हैं और सुपरबाइक से जम्प लगाकर कर हवाई जहाज पकड़ते हैं। ये फास्टपेस एक्शन सीन्स जेम्स बॉन्ड की फिल्मों की याद दिला देते हैं। यह बात और है कि देसी जेम्स बॉन्ड चरित्र का साफ-सुथरा है। प्यार में मासूम है और दिल की नहीं, दिमाग की सुनता है।
सलमान और कैटरीना की लव स्टोरी और केमिस्ट्री में दम है। जब एक्शन नहीं होता, तो सलमान और कैटरीना अपनी कॉमिक टाइमिंग, रोमांस और इमोशनल सीन्स से दिल बहलाते हैं। टाइगर अपने दोस्त से कहता है कि मेरे इतने नाम हैं कि मां-बाप ने क्या नाम रखा था, वह भी भूल गया। वैसे भी टाइगर तो कुत्तों का नाम होता है। आकाश से टूटते तारे को देखते सलमान-कैटरीना टिपिकल यशराज फिल्मों के इमोशनल सीन्स की याद दिला देते हैं। ज़रूरी न होते हुए भी सलमान ने एक सीन में अपने फैन्स के लिए शर्ट उतारी है।
दिलकश लोकेशन्स, बेहतरीन बैकग्राउंड स्कोर, अच्छा म्यूज़िक और कोरियोग्राफी। गिरीश कर्नाड, रणवीर शौरी जैसे अच्छे सपोर्टिंग एक्टर...हालांकि सेकेंड हाफ में एक्शन कहानी पर ज्यादा हावी हो गया। जासूसी पर यह आदर्श फिल्म भले न हो, लेकिन कोरी गप्प नहीं लगती। फिल्म एक ही शब्द में बयां की जा सकती है और यह है…पैसा वसूल। 'एक था टाइगर' के लिए रेटिंग है-3.5 स्टार...
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