जम्मू-कश्मीर के लिए 7300 करोड़ रुपये की योजना मंजूर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के साथ यहां हुई एक बैठक के बाद मंजूरी की घोषणा हुई।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, "यह जम्मू एवं कश्मीर के इतिहास में किसी भी वित्तीय वर्ष के लिए सबसे बड़ा योजना आवंटन है।"
राज्य के योजना प्रदर्शन की चर्चा करते हुए अहलूवालिया ने राज्य सरकार की सराहना की कि उसने आर्थिक गतविधि तथा सामाजिक और भौतिक संरचना के विकास को पुनर्जिवित किया है। उन्होंने कहा कि निवेश का वातावरण बनाने के लिए राज्य को निजी भागीदारी को और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। अहलूवालिया ने कहा कि विकास रणनीति के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अहलूवालिया ने कहा कि योजना आयोग राज्य में केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए पूरा सहयोग देना चाहता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं को चलाने में राज्य को जो अनुभव हुए उन्हें योजना आयोग के साथ बांटा जाए ताकि अड़चनों को अगली योजना में दूर किया जा सके। राज्य को राजस्व के संसाधनों में सुधार करने की सलाह दी गई।
आयोग ने कहा कि राज्य में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ाने के लिए आर्थिक गतविधियों में तेजी लानी चाहिए, जिसके लिए पर्यटन क्षेत्र में अपार क्षमता है। उन्होंने कहा कि धरोहर, रोमांचकारी पर्यटन, तीर्थयात्रा और ईको-पर्यटन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
12वीं योजना की रणनीति पर उमर अब्दुला ने योजना आयोग को बताया कि समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है, जो राज्य की शांति व्यवस्था पर आधारित है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार को सार्थक समर्थन देने और संवेदनशीलता का ध्यान रखने के लिए योजना आयोग और वित्त मंत्रालय को धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री पुनर्निमाण येाजना के तहत 700 करोड़ रुपये मंजूर किये गए हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2004 में राज्य के लिए 24 हजार करोड़ रुपये के पुनर्निमाण योजना की घोषणा की थी।
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