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बीते सप्ताह सेंसेक्स, निफ्टी में रही आधा फीसदी से अधिक गिरावट

 
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बीते सप्ताह सेंसेक्स, निफ्टी में रही आधा फीसदी से अधिक गिरावट
मुम्बई: देश के शेयर बाजारों में गत सप्ताह गिरावट का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में आधे फीसदी से अधिक गिरावट रही।

बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स गत सप्ताह 0.78 फीसदी या 151.14 अंकों की गिरावट के साथ 19,317.01 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.63 फीसदी या 37.10 अंकों की गिरावट के साथ 5,850.30 पर बंद हुआ।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में गत सप्ताह मिला जुला रुख रहा। मिडकैप 0.27 फीसदी या 17.83 अंकों की गिरावट के साथ 6,609.03 पर और स्मॉलकैप इसी अवधि में 0.36 फीसदी या 23.84 अंकों की तेजी के साथ 6,564.76 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के 30 में से ग्यारह शेयरों में गत सप्ताह तेजी रही। विप्रो (4.19 फीसदी), सन फार्मा (3.21 फीसदी), आरआईएल (2.11 फीसदी), इंफोसिस (1.84 फीसदी) और गेल (1.01 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। गत सप्ताह गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे जिंदल स्टील (7.47 फीसदी), कोल इंडिया (4.95 फीसदी), टाटा मोटर्स (3.63 फीसदी), टाटा स्टील (3.06 फीसदी) और आईटीसी (2.88 फीसदी)।

गत सप्ताह बीएसई के 13 में से छह सेक्टरों में तेजी रही। रियल्टी (3.76 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (1.97 फीसदी), स्वास्थ्य सेवा (1.53 फीसदी), तेल एवं गैस (1.47 फीसदी) और प्रौद्योगिकी (1.17 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे धातु (3.46 फीसदी), तेज खपत वाली उपभोक्ता वस्तु (2.28 फीसदी), बैंकिंग (2.06 फीसदी), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (1.45 फीसदी) और वाहन (1.25 फीसदी)।

इस सप्ताह के प्रमुख घटनाक्रमों में देश के 11 प्रमुख श्रमिक संगठनों के नेतृत्व में कामगारों ने बुधवार और गुरुवार को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल किया, जिससे देश भर में कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुईं। देश भर में बैंकिंग तथा अन्य प्रमुख कारोबारी गतिविधियां प्रभावित हुईं और अधिकतर स्थानों पर नगर परिवहन सेवा ठप रही।

प्रमुख मजदूर संगठनों ने महंगाई तथा अन्य मुद्दों को लेकर यह बंद आहूत की थी।

हड़ताल से पहले प्रमुख कारोबारी संगठन एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने श्रमिक संगठनों को हड़ताल वापस लेने का सुझाव देते हुए चेतावनी दी थी कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को 26 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंच सकता है।

गुरुवार को सत्र शुरू हो गया और पहले दिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए सरकार की योजनाओं पर रोशनी डाली।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में आर्थिक प्रगति में तेजी लाने के लिए कठिन फैसले लेने की जरूरत है।

मुखर्जी ने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल धीमे विकास के दौर से गुजर रही है। मौजूदा कारोबारी साल की पहली छमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 5.4 फीसदी की दर से बढ़ी। यह पिछले एक दशक की औसत सलाना विकास दर लगभग आठ फीसदी काफी कम है।" उन्होंने कहा कि घरेलू और वैश्विक कारणों से पिछले दो सालों में आर्थिक तेजी की दर कम हुई है। उन्होंने कहा, "12वीं योजना में यह स्वीकार किया गया है कि विकास इस बात पर निर्भर करेगा कि हम कुछ कठिन फैसले ले सकते हैं या नहीं।" उन्होंने कहा, "मेरी सरकार विकास दर कम रहने के कारणों को दूर करने के लिए कदम उठा रही है।" उन्होंने संसद के संयुक्त सत्र को पहली बार संबोधित करते हुए कहा, "महंगाई दर धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन यह अब भी एक समस्या बनी हुई है।"

राष्ट्रपति ने कहा, "पिछला साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद कठिन था। अधिकतर उभरते बाजार काफी धीरे-धीरे विकास कर रहे हैं। भारत के लिए भी यह कठिन साल था।"

मुखर्जी ने कहा, "वैश्विक और घरेलू, दोनों कारण ने हमारे विकास को प्रभावित किया। हमें दोनों के प्रभाव से निपटने की जरूरत है। मेरी सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए निवेश को बढ़ावा देने वाले तथा माहौल बेहतर बनाने वाले कई कदम उठाए।"

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