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मशहूर सितारवादक पंडित रविशंकर का अमेरिका में निधन

 
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मशहूर सितारवादक पंडित रविशंकर का अमेरिका में निधन

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नई दिल्ली: प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर का सैन डियागो के एक अस्पताल में में निधन हो गया है। वह 92 साल के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। 7 दिसंबर को उनका ऑपरेशन किया गया था। उन्हें 1999 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

अप्रैल 7, 1920 को वाराणसी में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में जन्मे पंडित रविशंकर बचपन से ही संगीत के माहौल में पले-बढ़े और तरह के वाद्य यंत्रों के प्रति उनकी रुचि रही। रविशंकर अपने बड़े भाई उदयशंकर के बैले ट्रुप में थे। पंडित रविशंकर को देश और दुनिया के कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। इन्हें मशहूर अंतरराष्ट्रीय सम्मान ग्रैमी अवॉर्ड भी मिला था। इसके अलावा इन्हें मैग्सेसे अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

पंडित रविशंकर 1986 से 1992 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे। पंडित रविशंकर ने उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार सीखा, जिन्हें वह प्यार से बाबा कहा करते थे। उन्होंने 'धरती के लाल' और 'नीचा नगर' जैसी फिल्मों में संगीत भी दिया। मोहम्मद इकबाल के 'सारे जहां से अच्छा...' की धुन भी पंडित रविशंकर की बनाई हुई है।

वर्ष 1966 पंडित रविशंकर के लिए बेहद अहम रहा, क्योंकि इसी साल प्रसिद्ध संगीत ग्रुप 'बीटल्स' के सदस्य जॉर्ज हैरिसन उनके शिष्य बने। इसके बाद पंडित रविशंकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद विख्यात हो गए। पंडित रविशंकर के निधन से अंतरराष्ट्रीय संगीत जगत शोक में डूब गया है तथा दुनिया के कोने-कोने से संगीत प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व ही पंडित रविशंकर ने बॉलीवुड अभिनेता अतिमाभ बच्चन से बात करने के लिए उन्हें फोन किया था।

पंडित रविशंकर को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद पिछले गुरुवार को ला जोल्ला के स्किप्स मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने स्थानीय समयानुसार मंगलवार को शाम 4.30 बजे अंतिम सांस ली।

उनके निधन पर शोक जताते हुए अमेरिका में भारत की राजदूत निरुपमा राव ने ट्विटर पर लिखा, "पंडित रविशंकर के निधन की खबर से दुख हुआ। वह संगीत के क्षेत्र की महान हस्ती होने के साथ-साथ एक बेहतर इंसान भी थे। मैं नवंबर में कैलिफोर्निया में हुए उनके अंतिम समारोह में गई थी। उन्होंने पुराने जुनून के साथ अपनी प्रस्तुति दी थी। राव के अनुसार, पंडित रविशंकर कहा करते थे, जो संगीत मैंने सीखा है, वह ईश्वर की अराधना की तरह है। यह निश्चित रूप से एक प्रार्थना की तरह है।

53 साल पहले देश के एकमात्र टीवी चैनल के रूप में 15 सितंबर, 1959 को दूरदर्शन का प्रसारण शुरू हुआ था, और '90 के दशक की शुरुआत में केबल टीवी के आगमन तक भारतीयों के लिए वही एकमात्र चैनल रहा। आज भी दूरदर्शन के बारे में सोचते ही जो पहली चीज ध्यान आती है, वह उसकी सिग्नेचर ट्यून है, जो दूरदर्शन देखने वाली पीढ़ी के दिलोदिमाग में आज तक बसी हुई है। इस धुन को उस्ताद अहमद हुसैन खान और पंडित रविशंकर ने शहनाई पर तैयार किया था।

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