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अन्ना का अनशन खत्म, बदलाव के लिए राजनीतिक विकल्प का वादा

 
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अन्ना का अनशन खत्म, बदलाव के लिए राजनीतिक विकल्प का वादा

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नई दिल्ली: टीम अन्ना ने शुक्रवार को जनता को 'आंदोलन' के स्वरूप में राजनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने की बात कहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ 10 दिनों से चला आ रहा अनशन खत्म कर दिया। साथ ही कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हथियाना नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन है, लेकिन टीम अन्ना की एक अन्य सदस्य मेधा पाटेकर ने इस फैसले पर चेताया।

उधर, टीम अन्ना द्वारा राजनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने की घोषणा से परेशान प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि टीम अन्ना उसकी विकल्प नहीं हो सकती है।

अन्ना हजारे ने अपने तीन सहयोगियों के साथ अनशन खत्म करने के बाद स्वच्छ एवं भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने के लिए राजनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने शुक्रवार को पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की मौजूदगी में नारियल पानी पीकर अपना अनशन खत्म किया।

हजारे ने कहा, "मैं यात्राएं करना जारी रखूंगा। लोगों के पास राजनीतिक विकल्प के लिए जाऊंगा। अगर लोग जागरूक हुए तो हम राजनीतिक विकल्प के विषय में सोचेंगे।" उन्होंने कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन अपने साथियों को समर्थन अवश्य देंगे।

हजारे ने कहा, "यदि जनलोकपाल विधेयक लागू हो गया होता तो मैं नहीं कहता कि इससे 100 फीसदी भ्रष्टाचार खत्म हो गया होता लेकिन 65 फीसदी जरूर खत्म हो गया होता।"

टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल, गोपाल राय, मनीष सिसौदिया ने जहां 25 जुलाई से अपना अनशन शुरू किया था वहीं अन्ना हजारे ने 29 जुलाई से अनशन शुरू किया।

केजरीवाल ने प्रस्तावित राजनीतिक विकल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कोई दल नहीं बल्कि एक 'आंदोलन' होगा।

केजरीवाल ने धरना स्थल जंतर मंतर पर उपस्थित लोगों से कहा, "हमारा उद्देश्य सत्ता हथियाना नहीं है। हम दिल्ली केंद्रित सरकार को खत्म करना और सरकार को गांवों में और लोगों के पास ले जाना चाहते हैं। हमारा स्वरूप एक राजनीतिक दल का न होकर आंदोलन का होगा।"

केजरीवाल ने कहा, "जनता घोषणा पत्र बनाएगी। हमारा ढांचा आंदोलन की तरह होगा या फिर जनता जैसा चाहेगी।" उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं है बल्कि सभी राजनीतिक दलों को चुनौती देना भी है।" केजरीवाल के अनुसार वे लोग अपने आंदोलन को संसद से लेकर गलियों तक में ले जाएंगे।

वहीं, टीम अन्ना के सदस्य मनीष सिसौदिया ने संवाददाताओं से कहा कि राजनीतिक पार्टी का गठन जल्दबाजी होगी और सड़क से संसद तक इस आंदोलन की दिशा जनता तय करेगी।

इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता व टीम अन्ना की कोर समिति की सदस्य मेधा पाटकर ने टीम अन्ना को उसके फैसलों को लेकर चेता और कहा, "चुनावी राजनीति में उतरने से पहले किसी को सौ बार सोचना पड़ता है। यदि कोई राजनीति से जुड़ता है तो जो समर्थन उसने हासिल किया हो उसे खोना नहीं चाहिए।"

हजारे और उनकी टीम के सदस्यों ने गुरुवार को राजनीतिक विकल्प की पेशकश करते हुए शुक्रवार को अनशन तोड़ने की बात कही थी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अन्ना हजारे तथा उनकी टीम के अनशन तोड़ने व राजनीतिक विकल्प प्रदान करने की पेशकश का स्वागत करते हुए कहा कि टीम अन्ना उनकी पार्टी का विकल्प नहीं हो सकती।

एनडीटीवी से बातचीत में गडकरी ने कहा, "जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ है, वह अन्ना हजारे या बाबा रामदेव का समर्थन करेगा। यदि अन्ना हजारे हमारा समर्थन चाहते हैं तो हम उनकी मदद करेंगे।" उन्होंने कहा कि टीम अन्ना भाजपा की विकल्प नहीं हो सकती, लेकिन यह कांग्रेस का विकल्प हो सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को नए समूह की ओर से कोई खतरा नहीं है।

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