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वर्मा समिति : दुष्कर्मियों को उम्रकैद, पीड़िताओं को शीघ्र न्याय

 
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वर्मा समिति : दुष्कर्मियों को उम्रकैद, पीड़िताओं को शीघ्र न्याय
नई दिल्ली: न्यायमूर्ति जेएस वर्मा समिति ने बुधवार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों के लिए उम्रकैद, पीड़िताओं को शीघ्र न्याय, सशस्त्र बल (विशेष शक्ति) अधिनियम के कामकाज की समीक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसी सिफारिशें की हैं।

दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ हुए क्रूरतापूर्वक दुष्कर्म की घटना के बाद उठे स्वत: आंदोलन को ध्यान में रखते हुए दुष्कर्म से संबंधित कानून पर सुझाव देने के लिए सरकार ने न्यायमूर्ति वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।

केंद्रीय गृह मंत्री को सौंपी गई पुलिंदानुमा रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों और सरकारी सेवकों सहित दुष्कर्म के दोषियों को कठोरतम दंड देने के लिए आपराधिक कानून में संशोधन का भी सुझाव दिया गया है।

न्यायमूर्ति वर्मा ने संवाददाताओं से कहा, "सामूहिक दुष्कर्म के लिए 20 वर्ष से कम सजा नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसे उम्रकैद में भी बढ़ाई जा सकती है। सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या के लिए उम्रकैद की सजा होनी चाहिए।"

631 पृष्ठों की रिपोर्ट जारी करते हुए न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि समिति ने दुष्कर्म दोषियों के लिए मृत्युदंड का सुझाव नहीं दिया है क्योंकि कई महिला संगठनों की ओर से आए सुझाव में इस सजा का विरोध किया गया था। न्यायमूर्ति वर्मा ने समिति के इस महती काम को 29 दिनों के भीतर पूरा किया है।

समिति ने पीछा करने, तेजाब से हमला और देख कर तंग करने को पृथक अपराध मानने के लिए भारतीय दंड संहिता में संशोधन का सुझाव दिया है।

न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि पीछा करना या किसी अन्य तरीके से एक व्यक्ति से संपर्क साधने का प्रयास के लिए तीन वर्ष कैद, तेजाब से हमला करने के लिए सात वर्ष की कैद और घूरने के लिए सात वर्ष कैद की सजा का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक महीने में रिपोर्ट तैयार करना एक 'जद्दोजहद से भरा' काम था और उन्हें दुनिया भर से संगठनों और छात्रों की प्रतिक्रियाएं मिली। उन्होंने कहा, "महिलाओं के लिए पूर्व में की गई कई सिफारिशें आज तक लागू नहीं हो पाई हैं। हमारे पास पुख्ता कानून है, लेकिन वे अभी तक अप्रभावी हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि पहला कदम समाज से छेड़खानी या यौन प्रताड़ना और पीछा करने जैसी बुराइयों को खत्म करना है। उन्होंने कहा, "यह बेहद गंभीर बात है कि इस तरह के चलन को समाज झेल रहा है। हमें सबसे पहले इससे निपटना चाहिए क्योंकि इससे यौन हमलों में कमी आएगी।" उन्होंने कहा कि दिल्ली में चलती बस में युवती के साथ क्रूरतमत दुष्कर्म के खिलाफ जिस तरह से युवकों ने विरोध प्रदर्शन के लिए 'शांतिपूर्ण तरीका' अपनाया उससे वे बेहद प्रभावित हैं।

सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती और उसके मित्र को बाद में दिसंबर की सर्द रात में नग्न हालत में सड़क के किनारे फेंक दिया गया था। घटना के 13 दिनों बाद युवती की सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई।

देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश और मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रह चुके न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा, "युवकों का यह एक स्वत:स्फूर्त प्रदर्शन था। यह एक नम्र अनुभूति था जो युवकों ने हम बुजुर्ग पीढ़ी के लोगों को सिखाया।"

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