वापसी की राह : युवराज का दम है ज़िक्र हो ही जाता है...
टी−20 वर्ल्ड कप शुरू होने में क़रीब ढाई महीने का वक्त बचा है। और वर्ल्ड कप ज़िक्र आते ही इस चैंपियन की वह तस्वीरें ताज़ा हो गई हैं जो उन्होंने टी-20 और वनडे के दौरान खेलीं। 2007 वर्ल्ड कप में डरबन में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ छह छक्के उनकी काबलियत का दस्तख़त साबित हुए। वहीं, 2011 वर्ल्ड कप में उनका मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट बनना इस बात का सबूत है कि इस चैंपियन का विकल्प ढूंढ़ना कभी और कहीं आसान नहीं।
खेलप्रेमी बल्कि टीम इंडिया के चयनकर्ता भी उनकी कमी महसूस करने लगे हैं। श्रीलंका के लिए टीम इंडिया के ऐलान करते वक्त मुख्य चयनकर्ता के श्रीकांत ने चयनकर्ताओं के इरादों से पर्दा उठाने में कोई झिझक नहीं दिखाई।
टीम का ऐलान करते वक्त मुख्य चयनकर्ता ने कहा कि युवराज की वापसी होनी चाहिए और मुझे पूरा भरोसा है कि वह टीम में वापसी करेंगे। उनमें लड़ने का जज़्बा है। हम युवराज को टी-20 वर्ल्ड कप में खेलते देखना चाहते हैं।
ऐसा नहीं है कि मुख्य चयनकर्ता ने यह बयान भावना में बहकर दिए हैं। सिर्फ़ युवराज सिंह इन दिनों बेंगलुरू के नेशनल क्रिकेट अकादमी में हैं। मैदान पर वापसी से पहले युवी अभ्यास में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। युवी कैंसर को मात देकर मैदान पर फिर से अपनी वापसी चाहते हैं।
युवी अपना इरादा पहले ही ज़ाहिर कर चुके हैं। वह जानते हैं कि टीम इंडिया में जगह बनाना आसान नहीं लेकिन, कैंसर से जंग भी आसान नहीं और वह इन दोनों हालात से निपटना सीख चुके हैं।
टी-20 हो या वनडे वर्ल्ड कप युवराज जब भी मैदान पर आए उनके बल्ले ने शहंशाह के अंदाज़ में अपना रुतबा बताया। अगर इस खिलाड़ी की वापसी हो पाती है तब यह चमत्कार तो होगा लेकिन, खेलप्रेमी इसी चमत्कार के लिए दुआ कर रहे हैं।
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