आखिर क्यों दायर की सेक्शन 66 (ए) खिलाफ श्रेया ने अपील?
एनडीटीवी से बात करते हुए श्रेया ने कहा कि लोग टीवी पर भी तमाम बातें बोलते हैं लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता। फिर इंटरनेट पर कमेंट करने पर गिरफ्तारी क्यों?
श्रेया का कहना है कि इंटरनेट भी एक माध्यम है, जहां लोग अपनी राय देते हैं। उनका कहना है कि मौजूदा कानून का दुरुपयोग हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीन अल्तमश कबीर ने कहा कि सिंघल की आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) के विरोध में दायर अपील का हम स्वागत करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सोच रहे थे कि इस मामले पर अभी तक किसी ने जनहित याचिका दायर क्यों नहीं की। सुप्रीम कोर्ट खुद यह मामला उठाने की सोच रहा था। आईटी मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, टेलीकॉम डिपार्टमेंट राज्य सरकारों को एक सर्कुलर जारी करने जा रहा है, जिसमें कहा जाएगा कि आईपीएस अफसर से नीचे कोई भी धारा 66 (ए) के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा।
आईटी एक्ट सेक्शन 66 (ए) क्या है :-
-इसके तहत कोई भी व्यक्ति जो कम्प्यूटर या संचार माध्यम से ऐसी जानकारी भेजे, जो सरासर आपत्तिजनक या डरावनी हो
-कोई ऐसी जानकारी भेजे, जिसके गलत होने का पता हो, लेकिन फिर भी उसे किसी को चिढ़ाने या परेशान करने, खतरे में डालने, बाधा डालने, अपमान करने, चोट पहुंचाने, धमकी देने, दुश्मनी पैदा करने, घृणा या दुर्भावना के मकसद से भेजा जाए।
-किसी को चिढ़ाने, परेशान करने या ठगने के लिए कोई ई−मेल या ई−मेल संदेश भेजे या ऐसे संदेश के स्रोत के बारे में गुमराह करे।
-इस धारा के तहत तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों होता है।
अपनी अपील में श्रेया ने महाराष्ट्र के हाल के केस के अलावा बंगाल में एक प्रोफेसर की गिरफ्तारी का भी हवाला दिया है।
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