आईओसी के फैसले से कुश्ती जगत सकते में
लंदन ओलिम्पिक खेलों के रजत पदक विजेता सुशील कुमार ने कहा, ‘‘मुझे यकीन नहीं हो रहा है इस तरह का फैसला किया गया है। मैं ऐसा कोई कारण नहीं देखता जिससे 2020 ओलिम्पिक खेलों से कुश्ती खेल को हटाया जाए।’’ लगातार दो ओलिम्पिक खेलों में ओलिम्पिक पदक जीत कर भारतीय कुश्ती में इतिहास बनाने वाले सुशील ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय ओलिम्पिक समिति को अपने आगामी कार्यक्रम से इस खेल को हटाना काफी कठिन होगा क्योंकि इस खेल को पूरी दुनिया में देखा और खेला जाता है।’’
यह पूछने पर कि क्या इस साल के आखिर में होने वाली आईओसी की बैठक में कुश्ती को ओलिम्पिक खेलों में बरकरार रखा जाएगा। सुशील ने कहा, ‘‘मुझे पूरा यकीन है कि कुश्ती ओलिम्पिक खेलों का हिस्सा बनी रहेगी।’’
लंदन ओलिम्पिक में पदक जीतने वाले भारत के दूसरे पहलवान योगेश्वर दत्त ने कहा कि यह फैसला युवा पहलवानों के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।
उन्होंने कहा कि उन युवा पहलवानों का क्या होगा जो भविष्य के ओलिम्पिक खेलों के ध्यान में रख कर तैयारी कर रहे हैं। सुशील और योगेश्वर दत्त के गुरु द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित महाबली सतपाल ने इस फैसले से हजारों युवा पहलवानों के लिये झटका बताते हुए सरकार और खेलमंत्री से निवेदन किया कि वे कुश्ती खेल को ओलिम्पिक खेलों में बरकरार रखने के लिए कदम उठाए।
इस फैसले को दुभाग्यपूर्ण बताते हुए सतपाल ने कहा जो युवा पहलवान 2020 ओलिम्पिक खेलों को ध्यान में रख कर तैयारी कर रहे है उनका सपना टूट जाएगा। मैं भविष्य के ओलिम्पिक खेलों में 12 से 14 पदक जीतने के लक्ष्य को लेकर तैयारियां करवा रहा हूं।
सतपाल ने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि आईओसी अपने इस फैसले पर फिर से विचार करेगा।’’ अंतरराष्ट्रीय कुश्ती महासंघ (फीला) द्वारा 2012 का सर्वश्रेष्ठ कोच का पुरस्कार पाने वाले यशवीर सिंह ने कहा कि वे फीला के अपील करेंगे कि कुश्ती को ओलिम्पिक खेलों में शामिल करवाने के लिए कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत और कुश्ती के लिये बहुत बड़ा नुकसान है। लंदन ओलिम्पिक खेलों में छह में दो पदक कुश्ती से आने के कारण युवा पहलवानों को हौसला बहुत बढ़ गया था लेकिन इस फैसले से यह जोश ठंडा हो जाएगा।
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