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हेलीकॉप्टर सौदा : पहले दिन भारतीय जांच दल को नहीं मिली खास कामयाबी

 
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VVIP chopper scam: on Day One, Indian team hits roadblocks
मिलान: ीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में कथित दलाली के आरोप के बाद जांच के लिए भारतीय दल इटली के मिलान में पहुंच गया है। मंगलवार की सुबह सबसे पहले टीम के सदस्यों ने भारतीय दूतावास के अधिकारी के साथ अपने होटल में मुलाकात की और इस बात पर चर्चा की कि किस तरह से इस मामले से जुड़े कागजातों को हासिल किया जा सकता है।

करीब 4000 करोड़ रुपये का यह वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा उस समय प्रकाश में जब इटली में कंपनी के सीईओ को गुसेपे ओर्सी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगा कि कंपनी ने यह सौदा हासिल करने के लिए करोड़ों रुपये की रिश्वत दलाली के रूप में दी है। इस मामले के सामने आते ही भारत में भी राजनीतिक हलचल शुरू हो गई और भारत सरकार को सीबीआई जांच का आदेश देना पड़ा।

इटली की इस कंपनी फिनमैकेनिका ने वर्ष 2010 में भारत से 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों का सौदा किया था। ऑगस्टावेस्टलैंड फिनमैकेनिका की हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी लंदन से अपना काम करती है।
इटली का कहना है कि ऑगस्टावेस्टलैंड ने 350 करोड़ रुपये की रिश्वत देकर यह सौदा हासिल किया।

भारतीय जांच दल का नेतृत्व कर रहे रक्षा मंत्रालय के अधिकारी अरुण बहल ने मंगलवार को मीडिया से बात नहीं की। सूत्र बता रहे है कि जांच दल इस मामले में स्थानीय वकीलों से संपर्क कर रास्ता तलाश रहे हैं।

फिलहाल अभी तक स्थानीय अधिकारियों से भारतीय दल को कोई खास मदद नहीं मिली है। बात दें कि 13 फरवरी को भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने स्थानीय अदालत को एक पत्र भेजकर फिनमैकेनिका के सीईओ की गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी थी जिसे कोर्ट ने देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने मामले में गोपनीय कानून का हवाला दिया था।
अब मामले में मुख्य अभियोजन यूजेनियो फुस्को ने भी इसी कानून को आधार बनाकर भारतीय जांच दल से मिलने से मना कर दिया है।

अब कहा जा रहा है कि जांच दल के अधिकारी बुधवार को जज लूका लैबियांका से मुलाकात करेंगे और अपनी अपील दोहराएंगे। अभी यह कह पाना मुश्किल है कि भारत को इस मामले में कोई खास मदद मिल पाएगी।

उधर, सीबीआई अधिकारियों के लिए अगले 48 घंटों में आगस्टावेस्टलैंड और फिनमैकेनिका के अधिकारियों से मुलाकात काफी अहम है। कोर्ट के सूत्रों का कहना है कि वह मामले के कागजात सिर्फ संबंधित पक्षों को ही उपलब्ध करा सकते हैं।

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