Hindi news home page
Collapse
Expand

साहित्य


'साहित्य' - 161 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • कोहिनूर अब पहले जितना बड़ा नहीं रहा: अनीता आनंद

    कोहिनूर अब पहले जितना बड़ा नहीं रहा: अनीता आनंद

    ब्रिटेन में रहनेवाली भारतीय पत्रकार अनीता आनंद ने प्रसिद्ध इतिहासकार विलियम डेलरिंपल के साथ मिलकर ‘कोहिनूर : द स्टोरी ऑफ द वर्ल्ड्स मोस्ट इनफेमस डायमंड’ किताब लिखी है. इसी पर चर्चा करते हुए जयपुर साहित्य महोत्सव के 10वें आयोजन के एक सत्र में अनीता ने कहा, ‘‘इंग्लैंड में लोगों ने कोहिनूर को एक क्रिस्टल का टुकड़ा मानते हुए इसका मजाक उड़ाया क्योंकि यह चमक नहीं रहा था.’’

  • इस देश में किसी भी चीज का नाम राजनेताओं के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए : ऋषि कपूर

    इस देश में किसी भी चीज का नाम राजनेताओं के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए : ऋषि कपूर

    अभिनेता ऋषि कपूर ने राजनेताओं के नाम पर सार्वजनिक संपत्तियों के नाम रखने की परंपरा पर एक बार फिर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि देश में दूसरी हस्तियां भी हैं जिनका इस देश में योगदान कहीं अधिक और बेहतर है.

  • लेखक का कोई धर्म नहीं होता: नासिरा शर्मा

    लेखक का कोई धर्म नहीं होता: नासिरा शर्मा

    1948 में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मीं नासिरा शर्मा उपन्यास 'पारिजात' के लिए साहित्य अकादमी पुस्कार से सम्‍मानित किया गया. उनकी 10 कहानी संकलन, 6 उपन्यास और 3 निबंध संग्रह प्रकशित हैं. वह हिंदी के अलावा फारसी, अंग्रेजी, उर्दू और पोश्तो भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ रखती हैं.

  • खुद से पूछना चाहिए कि आत्मसंतोष के लिए लिख रहे हैं या मूर्ख बनाने के लिए: JLF में गुलज़ार

    खुद से पूछना चाहिए कि आत्मसंतोष के लिए लिख रहे हैं या मूर्ख बनाने के लिए: JLF में गुलज़ार

    जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) की शुरुआत यहां के दिग्गी पैलेस में जाने-माने गीतकार गुलजार की कविता से हुई.

  • आज से शुरू हो रहा है 'साहित्य का महाकुम्भ' जयपुर साहित्य महोत्सव

    आज से शुरू हो रहा है 'साहित्य का महाकुम्भ' जयपुर साहित्य महोत्सव

    गुलाबी नगरी जयपुर में आज से शुरू होने जा रहा है साहित्‍य का महाकुम्‍भ यानी जयपुर साहित्‍य महोत्‍सव. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू, गुलजार और एन वाल्डमैन आज पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव का उद्घाटन करेंगे.

  • जन्मदिन विशेष : क्‍लास छोड उपन्‍यास लिखते थे 'हिंदी के शेक्सपीयर...'

    जन्मदिन विशेष : क्‍लास छोड उपन्‍यास लिखते थे 'हिंदी के शेक्सपीयर...'

    रांगेय राघव की ये पंक्तियां उनके मिजाज को बताने के लिए काफी हैं. आलौकिक प्रतिभा के धनी तमिल भाषी, लेकिन हिंदी साहित्य के धरोहर रांगेय राघव का आज जन्‍मदिन है.

  • पेंग्विन प्रकाशन के 30 साल पूरे, जयपुर साहित्य उत्सव में होगा जश्न

    पेंग्विन प्रकाशन के 30 साल पूरे, जयपुर साहित्य उत्सव में होगा जश्न

    पेंग्विन ने अपने प्रकाशन कारोबार के 30 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में जयपुर साहित्य उत्सव में अनेक कार्यक्रम करने की योजना बनायी है. पेंग्विन की शुरआत 1985 में हुयी थी और दो साल बाद 1987 में इसने छह किताबें प्रकाशित की थीं.

  • जमाने में हम : दिल्ली का साहित्य जगत और निर्मला जैन के संघर्ष की कथा

    जमाने में हम : दिल्ली का साहित्य जगत और निर्मला जैन के संघर्ष की कथा

    दिल्ली का हिन्दी साहित्य जगत और राजधानी के विश्वविद्यालयों का हिन्दी शिक्षण जगत बीती सदी के उत्तरार्ध्द में कैसे बदलता गया, साहित्य जगत में किस तरह की राजनीति चलती रही और इसके समानांतर किस तरह रचनाकर्म, शोध जैसे कार्य होते रहे...यह सब गहराई से समझने के लिए निर्मला जैन की कृति 'जमाने में हम' बड़ी उपयोगी है. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित यह कृति निर्मला जैन की आत्मकथा है.

  • विश्व पुस्तक मेला: इन किताबों पर रहेगी नज़र...

    विश्व पुस्तक मेला: इन किताबों पर रहेगी नज़र...

    नोटबंदी की मार में किताबों का प्यार क्या गुल खिलाएगा, 2017 का विश्व पुस्तक मेला इस बात की बड़ी कसौटी साबित होने वाला है. फिलहाल राजकमल प्रकाशन समूह ने पुस्तक प्रेमियों की सहूलियत के लिए जरूरी इंतजाम कर लिए हैं.

  • मुगल बादशाह अकबर की मन:स्थितियों को उकेरता उपन्यास ‘अकबर’

    मुगल बादशाह अकबर की मन:स्थितियों को उकेरता उपन्यास ‘अकबर’

    इतिहास की किताबों में भले ही मन:स्थितियों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती हो लेकिन साहित्य इसे ही कसौटी पर कसता है. साहित्य की किताबों में मनुष्य के आचार विचार पर बेहद ध्यान दिया जाता है, फिर चाहे किताब किसी आम आदमी पर आधारित हो या ऐतिहासिक हस्ती पर. यही बात शाजी जमां के उपन्यास ’‘अकबर’’ को मुगल बादशाह पर लिखी गई बाकी किताबों से अलग करती है.

  • जन्‍मदिन विशेष: साहित्‍यकार जैनेंद्र कुमार ने 'मन' को दी महत्ता

    जन्‍मदिन विशेष: साहित्‍यकार जैनेंद्र कुमार ने 'मन' को दी महत्ता

    हिंदी साहित्य में प्रेमचंद के साहित्य की सामाजिकता के बाद व्यक्ति के 'निजत्व' की कमी खलने लगी थी, जिसे जैनेंद्र ने पूरी की. इसलिए उन्हें मनोविश्लेषणात्मक परंपरा का प्रवर्तक माना जाता है. वह हिंदी गद्य में 'प्रयोगवाद' के जनक भी थे. जैनेंद्र का जन्म 2 जनवरी, 1905 को अलीगढ़ के कौड़ियागंज गांव में हुआ था.

  • वक्त रूकता नहीं कहीं थमकर, 2016 में साहित्‍य जगत की महत्‍वपूर्ण घटनाएं

    वक्त रूकता नहीं कहीं थमकर, 2016 में साहित्‍य जगत की महत्‍वपूर्ण घटनाएं

    'वक्त रूकता नहीं कहीं थमकर, इसकी आदत भी आदमी सी है.' एक कविता की इन्हीं पंक्तियों की मानिंद पिछला साल बीत गया और छोड़ गया हमारे दामन में कुछ यादें, कुछ बातें, कुछ वादे और कुछ नये इरादे. मशहूर अमेरिकी गीतकार बॉब डिलेन को वर्ष 2016 के लिए साहित्य का नोबल पुरस्कार मिलने के कारण वाद और प्रतिवाद में घिरे विश्व साहित्य को एक नया आयाम मिला.

  • 2017 में आगे बढ़ने से पहले ज़रूरी है किताबों की दुनिया के इन पन्नों को दोबारा पलटना...

    2017 में आगे बढ़ने से पहले ज़रूरी है किताबों की दुनिया के इन पन्नों को दोबारा पलटना...

    ‘वक्त रुकता नहीं कहीं थमकर, इसकी आदत भी आदमी सी है.’ एक कविता की इन्हीं पंक्तियों की मानिंद पिछला साल बीत गया और छोड़ गया हमारे दामन में कुछ यादें, कुछ बातें, कुछ वादे और कुछ नये इरादे.

  • उर्दू के अलावा हिन्दी, अरबी, फ्रेंच और इंग्लिश में भी किताब लिख चुके हैं निजाम सिद्दीकी

    उर्दू के अलावा हिन्दी, अरबी, फ्रेंच और इंग्लिश में भी किताब लिख चुके हैं निजाम सिद्दीकी

    उर्दू में लिखी अपनी किताब के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले इलाहाबाद के 69 वर्षीय निजाम सिद्दीकी साहित्य जगत के लिए एक जाना-माना नाम हैं. उनको इससे पहले 2013 में साहित्य अकादमी का 'ट्रांसलेशन अवॉर्ड' मिल चुका है. निजाम सिद्दीकी ने बताया कि वो उर्दू के अलावा हिन्दी, अरबी, फ्रेंच, इंग्लिश और फारसी में भी किताबें लिख चुके हैं.

  • साल 2016 में इन साहित्‍यकारों और लेखकों ने दुनिया को कहा अलविदा

    साल 2016 में इन साहित्‍यकारों और लेखकों ने दुनिया को कहा अलविदा

    2016 भारतीय साहित्य के लिए काफी अहम साल रहा. हर साल की तरह इस साल भी कई लेखकों की लेखन और कविओं की कविताओं ने साहित्य जगत को चार चांद लगाए, लेकिन कुछ लेखक, कवि और साहित्यकारों ने दुनिया को अलविदा कह दिया.

  • 2016 में 37 लाख डॉलर में बिकी न्‍यूटन के गति के नियमों वाली किताब

    2016 में 37 लाख डॉलर में बिकी न्‍यूटन के गति के नियमों वाली किताब

    2016 साहित्य जगत के लिए काफी अहम साल रहा. यकीन नहीं होता कि न्यूटन के गति संबंधी तीन नियमों वाली किताब 37 लाख डॉलर में बिकी. सर आइजैक न्यूटन के मशहूर गति के तीन नियमों की व्याख्या समेत उनके मौलिक काम को खुद में समाहित करने वाली एक पुस्तक 'प्रिंसिपिया मैथेमेटिका' को इसी माह न्यूयार्क में एक नीलामी में 37 लाख डॉलर में बेचा गया.

  • साहित्य अकादमी के पास पुरस्कार वापस लेने का कोई प्रावधान ही नहीं है: राव

    साहित्य अकादमी के पास पुरस्कार वापस लेने का कोई प्रावधान ही नहीं है: राव

    देश में कथित असहिष्णुता को लेकर साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटाने वालों के पुरस्कार और उनके चेक अकादमी के पास जस के तस ही पड़े हैं क्योंकि उनके पास पुरस्कार वापस लेने का कोई प्रावधान ही नहीं है. साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवास राव ने कहा कि 2015 में जो कुछ हुआ वह अकादमी के 60 साल के इतिहास में पहली बार हुआ था.

  • शंख घोष ने नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया बांग्‍ला साहित्‍य, मिल चुके हैं कई अवॉर्ड्स

    शंख घोष ने नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया बांग्‍ला साहित्‍य, मिल चुके हैं कई अवॉर्ड्स

    शंख घोष की प्रमुख रचनाओं में आदिम लता-गुलमोमॉय, मूखरे बारो, सामाजिक नोय, बाबोरेर प्रार्थना, दिनगुली रातगुली और निहिता पातालछाया शामिल हैं. उन्हें कवि, आलोचक और विद्वान के तौर पर जाना जाता है और उनकी पहचान बांग्ला साहित्य में ऊर्जा भरने वाले कवि के रूप में है.

Advertisement

Advertisement