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Prime time


'Prime time' - 167 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • प्राइम टाइम इंट्रो : जीडीपी विकास दर में तेज़ी अच्छे दिनों के संकेत?

    प्राइम टाइम इंट्रो : जीडीपी विकास दर में तेज़ी अच्छे दिनों के संकेत?

    सकल घरेलु उत्पाद यानी जीडीपी। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर। भारत सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष के विकास दर के आंकड़े जारी करते हुए दावा किया है कि अर्थव्यवस्था का बढ़ते जाना जारी है। 2015-16 में सकल घरेलू उत्पादन यानी जीडीपी की विकास दर 7.6% रही।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : वोट के बदले नोट का चलन कैसे रुकेगा?

    प्राइम टाइम इंट्रो : वोट के बदले नोट का चलन कैसे रुकेगा?

    आप पूरी ज़िंदगी मेहनत कर कितना बचा पाते होंगे ये जब जोड़ लेंगे तो समझ सकेंगे कि राजनीतिक दलों के पास, उनके उम्मीदवारों के पास कितना पैसा है कि वो चार पांच करोड़ रुपये ऐसे ही मतदान से पहले की रात लोगों में बांट देते हैं।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : डॉक्टरों की कमी कैसे दूर होगी?

    प्राइम टाइम इंट्रो : डॉक्टरों की कमी कैसे दूर होगी?

    लगता है कि किसी को रिटायरमेंट अच्छा नहीं लगता तभी जब भी ऐसा एलान होता है कि रिटायरमेंट की उम्र बढ़ा दी गई है जिसकी नहीं भी बढ़ती है वो भी ख़ुश हो जाता है। दूसरी तरफ कॉलेज से निकलकर रोज़गार समाचार पढ़ने वालों को ये ख़बर नहीं सुहाती है।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या वाकई छात्रों के बीच NEET को लेकर नाराज़गी है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या वाकई छात्रों के बीच NEET को लेकर नाराज़गी है?

    आदेश और अध्यादेश के चक्कर में नेशनल एंट्रेंस एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट नीट (NEET) फंस गया है। क्या सरकार ने नीट के ख़िलाफ अध्यादेश का कदम वाकई ज़मीनी हकीकत के आधार पर उठाया है या उसके सामने कृत्रिम विरोध की तस्वीर पेश की गई। 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इसी साल से नीट होगा।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : असम में जीतकर मनोवैज्ञानिक दबाव से उबरी बीजेपी

    प्राइम टाइम इंट्रो : असम में जीतकर मनोवैज्ञानिक दबाव से उबरी बीजेपी

    असम में भारतीय जनता पार्टी की जीत पांच राज्यों के चुनावों की सबसे बड़ी खबर है। असम की राजनीति की अपनी जटिलता है। वहां की सामाजिक विविधता के कारण भारतीय जनता पार्टी के लिए लड़ाई आसान नहीं थी।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : क्या राजन के बारे में स्वामी की सोच सरकार की भी है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : क्या राजन के बारे में स्वामी की सोच सरकार की भी है?

    स्वामी का कोई स्वामी नहीं है लेकिन स्वामी रिजर्व बैंक के जिस स्वामी पर हमले कर रहे हैं उसके बहाने कहीं वे अपनी सरकार के स्वामी को भी तो नहीं घसीट रहे? क्या राजन के बारे में स्वामी की सोच सरकार की भी है?

  • प्राइम टाइम इंट्रो : नेताओं, अपराधियों के निशाने पर पत्रकार

    प्राइम टाइम इंट्रो : नेताओं, अपराधियों के निशाने पर पत्रकार

    बिहार के सीवान ज़िले के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। हिन्दुस्तान अख़बार के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या के मामले में कुछ गिरफ्तारी तो हुई है मगर ठोस सुराग़ नहीं मिले हैं। सब की निगाह हत्या के कारणों पर है।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : तो आखिर कौन है मालेगांव का गुनहगार?

    प्राइम टाइम इंट्रो : तो आखिर कौन है मालेगांव का गुनहगार?

    NIA ने जब मालेगांव मामले पर जब अपनी चार्जशीट पेश की तो कइयों को लगा कि हेमंत करकरे की जांच को ही संदिग्ध बना दिया गया है। क्या ऐसा अफसर जिसने अपनी जान की परवाह तक नहीं की वो ऐसी जांच करेगा जिससे आतंकवाद की एक ऐसी थ्योरी हवा में तैरने लगेगी जिस पर कोई यकीन करने के लिए तैयार नहीं है।

  • धरना-प्रदर्शन...आम जन कुछ इस तरह भी जिंदा रखे हैं लोकतंत्र

    धरना-प्रदर्शन...आम जन कुछ इस तरह भी जिंदा रखे हैं लोकतंत्र

    कई प्रदर्शन इस आस में समाप्त हो जाते हैं कि काश कोई पत्रकार आएगा और हमारी तस्वीर दिखाएगा। कई प्रदर्शन इस बात की चिन्ता ही नहीं करते हैं। उन्हें पता है कि जब वे प्रदर्शन करेंगे तो कैमरे वाले आएंगे ही आएंगे। कांग्रेस और बीजेपी के प्रदर्शनों को बाकी प्रदर्शनों से ज्यादा सौभाग्य प्राप्त है।

  • छात्रों के लिए वरदान या मुसीबत है यह NEET?

    छात्रों के लिए वरदान या मुसीबत है यह NEET?

    भारत जैसे विशाल देश में मेडिकल की प्रवेश परीक्षाओं की संख्या सिर्फ 90 थी, जिसे अब कम करके एक किया जा रहा है। बात तो ठीक लगती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला तभी आया जब कई राज्यों में बच्चे प्रवेश परीक्षा दे चुके थे।

  • स्टूडियो में खाली कुर्सियों के पीछे की खतरनाक कहानी...

    स्टूडियो में खाली कुर्सियों के पीछे की खतरनाक कहानी...

    अगर प्रवक्ता लोग न्यूज़ चैनलों पर छोटी-छोटी बातों को लेकर आना बंद कर देंगे तो एक समय ऐसा भी आएगा जब न्यूज़ चैनलों को भी प्रवक्ताओं की जरूरत पड़ना बंद हो जाएगी।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : ऑड ईवन पर अलग-अलग अध्ययनों के मिलेजुले नतीजे

    प्राइम टाइम इंट्रो : ऑड ईवन पर अलग-अलग अध्ययनों के मिलेजुले नतीजे

    ट्रैफिक जाम रोज़ हमारी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा खाये जा रहा है। किस शहर का नाम लिया जाए और किसका नहीं, आलम ये है कि आदमी अपने परिवार से ज़्यादा समय ट्रैफिक जाम से ज़्यादा सामने या बगल वाली कार को देखते हुए बिता रहा है। हर मुल्क में इस जाम से मुक्ति के कुछ न कुछ प्रयोग हुए हैं मगर मुक्ति कहीं नहीं मिली है।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : मुंबई लोकल में स्टंट की नौटंकी

    प्राइम टाइम इंट्रो : मुंबई लोकल में स्टंट की नौटंकी

    किसको समझाया जाए। बेटी को या बेटी के बाप को। क्या सिर्फ यही हैं जो ऐसा करते हैं या और भी कई लोग हैं जो अपने बच्चों को कानूनी उम्र से पहले स्कूटर बाइक दे देते हैं। आखिर क्या जल्दी थी कि इन जनाब ने अपनी सात साल की बेटी को स्कूटी का हैंडल पकड़ा दिया।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : नाम बदलने की सियासत कब ख़त्म होगी?

    प्राइम टाइम इंट्रो : नाम बदलने की सियासत कब ख़त्म होगी?

    गांव जैसा क्या बचा था कि गुड़गांव के गुड़गांव नहीं रहने पर कई लोग भावुक हो रहे हैं। गुड़गांव ही तो गुड़गांव नहीं रहा, वहां के मॉल, सुपर मॉल, होटल, अपार्टमेंट सब तो हैं ही। वहां अगर कुछ नहीं था तो गांव ही नहीं था। मगर गांव के बदले ग्राम आ गया। शहरों पर दावेदारी हमारे गांव इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाले।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : बूंद-बूंद पानी के लिए तरसे लोग

    प्राइम टाइम इंट्रो : बूंद-बूंद पानी के लिए तरसे लोग

    सूखा मौजूदा सरकार की देन नहीं है। सरकारों की दिक्कत ये है कि वे मुआवज़े और राहत कार्य को सूखे का समाधान समझती रही हैं। जिस संकट को इंसानों ने मिलकर कई साल से बुलाया है वो एक दिन या एक साल में नहीं जाएगा।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : हंसेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया

    प्राइम टाइम इंट्रो : हंसेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया

    इतना तो सब कहते हैं कि हमारे देश की जीडीपी ठीक होने वाली है, फिर लोगों का बीपी कम क्यों नहीं हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और रेटिंग एजेंसी मूडी के आशावाद को लोग समझ क्यों नहीं पा रहे हैं। ऐसी बहसों में क्यों उलझें जिससे मूडी को भी फर्क नहीं पड़ रहा है।

  • प्राइम टाइम इंट्रो : एनआईटी में छात्रों के आक्रोश के पीछे कोई साजिश?

    प्राइम टाइम इंट्रो : एनआईटी में छात्रों के आक्रोश के पीछे कोई साजिश?

    श्रीनगर NIT की घटना और इसे लेकर राजनीति में फासला इतना बढ़ गया है कि वहां के छात्र छात्राओं को अब हाथ में तख़्ती लेकर खड़े होना पड़ा कि हमारे मुद्दों का सांप्रदायिकरण मत कीजिए। कैंपस के भीतर मीडिया के जाने की इजाज़त नहीं है फिर भी व्हाट्सऐप और ट्वीटर के ज़रिये लगातार अफवाह फैलाई जा रही है

  • सूखा ऊपर से आया है या उसकी तैयारी हमने नीचे से की है?

    सूखा ऊपर से आया है या उसकी तैयारी हमने नीचे से की है?

    महाराष्ट्र के कई ज़िलों में पानी नहीं है। जहां थोड़ा बहुत पानी है वहां पुलिस का पहरा है कि कहीं पानी को लेकर कानून व्यवस्था न बिगड़ जाए। लातूर ज़िले में दो महीने के लिए धारा 144 लगा दी गई है। परभनी में एक महीने के लिए धारा 144 लगा दी गई है।

 

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