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क्‍या फांसी की सजा खत्‍म कर देनी चाहिए?ऐसा कभी हुआ तो नहीं था लेकिन जो हुआ उसे होते देख भारत ही नहीं दुनिया भर में भारतीय टीवी और इंटरनेट से चिपके रहे कि आखिर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला देती है। फांसी की सज़ा के विरोधी और पक्षधर दोनों जागते रहे कि अदालत क्या फैसला सुनाती है।
याकूब मेमन की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अंतिम मुहरयाकूब मेमन को फांसी दी जाएगी। दो दिनों के भीतर देश की सबसे बड़ी अदालत की दो प्रकार की बेंचों ने उसकी याचिका पर सुनवाई की है। पहले दो जजों की बेंच और फिर तीन जजों की बेंच के बाद तय पाया गया कि किसी प्रक्रिया की अनदेखी नहीं हुई है। याकूब मेमन का डेथ वारंट पूरी तरह से कानूनी है।
लोगों के कलाम, कलाम के लोगशायद इसीलिए वे अनगिनत लोगों के किस्सों में बस गए हैं। वे थे तब भी किस्सा ही रहे और अब नहीं हैं तो भी किस्सा हैं। अनगिनत स्कूलों में गए। कई शहरों में कई बार गए। लगातार लोगों से मिलते रहे। रामेश्वरम के एक बड़े से संयुक्त परिवार से आते थे। उससे भी बड़ा परिवार छोड़ कर गए हैं।
फांसी की सजा और उस पर होती राजनीतिदुनिया में 90 ऐसे देश हैं जो फांसी की सज़ा का विरोध करते हैं। इनमें भूटान और नेपाल भी शामिल हैं। ज़रूर इन देशों में भी जघन्य अपराध होता होगा और इन देशों में भी राष्ट्रभक्तों और मज़हब को मानने वालों की कमी नहीं होगी। भारत में फांसी की सज़ा पर रोक नहीं है।
दिल्ली में राज किसका होना चाहिए, उपराज्यपाल का या मुख्यमंत्री का?इम्तहानों में अब यह सवाल आना चाहिए कि दिल्ली में सरकार कौन है इसकी उदाहरण सहित व्याख्या करें। शर्त यह होनी चाहिए कि इसका जवाब विद्यार्थी लिखें न कि उप राज्यपाल या मुख्यमंत्री। इस स्थिति में एक सवाल यह भी खड़ा होना चाहिए कि फिर जनता कौन है और क्यों है।
सियासी खींचतान में फंसी संसद, विपक्ष संसद न चलने देने पर आमादामंगलवार को इज़ इक्वल टू की थ्योरी का प्रतिपादन करते वक्त मुझे भी अंदाज़ा नहीं था कि प्रतिपादन के अगले ही दिन इसका फैक्ट्री उत्पादन शुरू हो जाएगा। आज तो दिल्ली में जिस तरह से इज़ इक्वल टू हुआ है क्या बतायें।
मॉनसून सत्र शुरू होते ही गतिरोध, ये 'is equal to' क्या है?हमारी राजनीति में इज़ इक्वल टू हो गया है। इज़ इक्वल टू वो अवस्था है जहां राजनीति की हर बहस बराबर हो जाती है। ऐसा तभी होता है जब किसी मुल्क या राज्य में दो दलों को बारी-बारी से राज करने का मौका मिलता है। ऐसा होने से दोनों पर लगने वाले आरोपों का इज़ इक्वल टू हो जाता है।
शिक्षण संस्थाओं का भगवाकरण?किसी भी राज्य में होने वाला धरना या प्रदर्शन उस राज्य की जनता द्वारा चुनी गई सरकार के ख़िलाफ़ ही होता है। कुछ प्रदर्शन कामयाब होते हैं, कुछ नाकाम और गुमनाम रह जाते हैं और कुछ लाठी खाकर खत्म हो जाते हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : गुड व बैड दामाद की अपनी-अपनी परिभाषाएंजम्मू में प्रधानमंत्री ने एक गुड दामाद की तारीफ करते हुए किसी बैड दामाद की तरफ इशारा किया है तो सवाल उठने लगे कि अगर बैड दामाद की बात है तो भ्रष्टाचार और परिवारवाद पर उनके मानक क्या हैं।
गुजरात का 'कैंसर गांव', यहां सबसे ज्यादा लोग कैंसर से मरते हैंगुजरात के महेसाणा जिले का प्रतापगढ गांव जहां लोगों को सबसे ज्यादा डर कैंसर से लगता है। इनका डर जायज़ भी है लेकिन क्यों ?
एक अफ़सर की सियासत से टक्कर!आपने उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के मामले को किस नज़र से देखा है। क्या आप उनमें से है जो एक व्हीसल ब्लोअर और साहसी अफसर के साथ हो रही नाइंसाफी से नाराज़ हैं या आप उन लोगों में से भी हैं जो एक सरकारी अधिकारी के रूप में अमिताभ ठाकुर के अति उत्साह को लेकर आशंकित हैं।
जातिगत जनगणना का सवाल : आंकड़े सार्वजनिक क्‍यों ना किए जाएं?हमारी राजनीति कब राष्ट्रवादी हो जाती है और कब जातिवादी इसका संबंध इस बात से है कि किस राज्य में चुनाव होने वाले हैं। डेढ़ साल पहले लोकसभा चुनावों में वन इंडिया अभियान के नायक को अब क्यों देश का पहला ओबीसी प्रधानमंत्री बताया जा रहा है।
व्यापमं घोटाले पर व्याप्त हंगामा, राज्यपाल भी घिरेमध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव का क्या होगा। वे व्यापमं घोटाले में आरोपी नंबर दस बनाए गए थे लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह कह कर उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी कि पद पर रहते हुए उनसे पूछताछ नहीं की जा सकती क्योंकि उन्हें संवैधानिक कवच प्राप्त है।
व्‍यापक व्‍यापमं में किसे बचाने की कोशिश?एक मिनट के लिए मान भी लें कि व्यापमं घोटाले को उजागर करने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह थे तो उन्होंने उजागर करने के अलावा क्या किया यह बात सार्वजनिक रूप से मौजूद तथ्यों से बिल्कुल मेल नहीं खाती है, फिर भी क्या हुआ जब व्यापम का घोटाला उजागर हुआ।
व्‍यापमं घोटाला : एक के बाद एक मौत के पीछे साजिश?बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद कैलाश विजयवर्गीय पहली बार भोपाल आए तो स्वागत में गाड़ियों का काफिला इतना लंबा हो गया कि दो घंटे का जाम लग गया। इस जाम में फंसी एक एंबुलेंस में नवजात बच्ची थी जिसे जल्दी अस्पताल ले जाने के लिए उसका पिता एंबुलेंस का दरवाज़ा पीटता रह गया।
इतने से काम नहीं चलता! वेतन बढ़वाना चाहते हैं AAP विधायकहमारे नेता खुद को महाराजा समझने लगे हैं। राजनीति में सादगी एक तमाशा है और तमाशा ही असली सादगी। मुश्किल से साल पूरा हुआ है, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अपने लिए 5 करोड़ की मर्सिडिज़ बस बनवाई है।
जन प्रतिनिधियों के वेतन का मुद्दा : क्या सांसदों का वेतन बढ़ाना ठीक?पंद्रह जून से हमारे सैनिक जंतर मंतर पर वेतन और पेंशन के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं लेकिन हमारे सांसद कितनी आसानी से अपनी सुख सुविधा और सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव भेज देते हैं।
डिजिटल इंडिया के लाभ और सवाल?अगस्त 2014 में ही मोदी मंत्रिमंडल ने डिजिटल इंडिया का फैसला कर लिया था, करीब एक साल की गहन तैयारी के बाद बुधवार शाम को इसे धूमधाम के साथ लांच किया गया। अगले चार साल में ढाई लाख पंचायत ब्राड बैंड से जोड़ दिए जाएंगे। गांव गांव में ब्राड बैंड का जाल बिछाया जाएगा।
धौलपुर महल पर जारी है महाभारतहर दिन आने वाला एक नया आरोप वसुंधरा के लिए ढाल ही बन रहा है। नया मामला इतना उलझा हुआ है कि इसे अदालत ही सुलझा सकती है। धौलपुर पैलेस सरकार का है या वसुंधरा के बेटे और सांसद दुष्यंत सिंह का है।
कितना व्‍यापक है व्‍यापम घोटाला?2006 के साल से ही व्यापक की भर्तियों और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी की ख़बरें आने लगी थीं लेकिन 2013 में डॉक्टर जगदीश सागर के पकड़े जाने से मामला खुला तो पता चला कि मध्य प्रदेश के योग्य छात्रों की एक पूरी पीढ़ी इस घोटाले की भेंट चढ़ चुकी है।

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