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खुदरा कारोबार में FDI पर क्‍या सरकार पसोपेश में?मोदी सरकार ने अपने पहले साल में रक्षा और बीमा सेक्टर में 49 प्रतिशत विदेशी निवेश का फैसला कर लिया, मामूली विरोध के अलावा बीजेपी या संघ परिवार को इससे कोई खास दिक्कत नहीं हुई। हुई भी तो सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
सरकार की नई बीमा, पेंशन योजनाएं कैसे हो पाएंगी कारगर?कई बार लगता है कि जीवन के बाद इस धरती पर कुछ बचा रहेगा तो वो है बीमा। इसलिए जीवन बचे न बचे बीमा बचाइये। हमारे आस पास तेज़ी से बदलाव हो रहा है। भले ही व्यापक रूप से इसके समर्थन या विरोध की राजनीतिक सक्रियता नज़र न आती हो लेकिन बीमा राजनीतिक शब्दावली में अपनी जगह बनाने लगा है।
पत्रकारिता पर लगाम की कोशिश?दुनिया के किसी भी लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है कि उसका नागरिक अपने अधिकारों, कर्तव्यों को समझे और इसके लिए बेहद ज़रूरी है कि वो सही सूचनाओं से लैस हो। झूठी, खराब या अधकचरी सूचनाओं से लैस नागरिक लोकतंत्र के लिए घातक हो सकता है।
आखिर, भ्रष्‍टाचार से कैसे होगा मुकाबला?भ्रष्टाचार न दिखे तो इसका मतलब नहीं कि वो कहीं हो नहीं रहा है। इसके लिए ज़रूरी है कि इसकी खोज करने वाले से लेकर निगरानी और सुनवाई करने वाली संस्थाएं भी अपने पूरे वजूद के साथ स्वतंत्र रूप से कार्य करें।
क्या है स्मार्ट सिटी और स्मार्ट शहर बनाने की क्या ज़रूरत?इसमें कोई शक नहीं कि नए शहरों की ज़रूरत है लेकिन क्या स्मार्ट सिटी के दावे पर भरोसा किया जा सकता है कि इससे बिजनेस बढ़ेगा। शहर बनाने से बिजनेस बढ़ेगा या उद्योग बढ़ाने से।
नेपाल का भूकंप सबके लिए सबक50 लाख की आबादी वाला काठमांडू भारत के ही किसी बड़े शहर की तरह बेतरतीब और विस्तार से बसा हुआ है। इसी कारण दुनिया के हर भू वैज्ञानिक और भूकंप के बाद पुनर्वास से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने रिसर्च पेपर में भविष्यवाणी की थी कि ताकतवर भूकंप इस शहर को तबाह कर सकता है।
इन भूकंपों से हम क्‍या लें सबकभारतीय प्लेट आज भी पांच सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से यूरेशियन प्लेट पर दबाव बना रही है, या कहें कि उसके नीचे खिसक रही है। दोनों प्लेटों के बीच बढ़ रहे इस दबाव में छुपी ऊर्जा रह रहकर जब रिलीज़ होती है तो यहां भूकंप आते हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या किसानों पर गंभीर है सरकार?जो कहा जा रहा है उसका कितना प्रतिशत ज़मीन पर हो रहा है यह किसानों को पता होगा। हर दिन अलग-अलग अखबारों, चैनलों में रिपोर्ट आ रही है कि किसानों को पता ही नहीं चल रहा है कि जो कहा गया है वो क्यों नहीं हो रहा है।
प्राइम टाइम इंट्रो : ऐसे तरक्‍की करेगा भारत?जिस अख़बार में ख़बर छपती है कि भारत विकास दर के मामले में चीन से आगे निकलने वाला है उसी अख़बार के भीतर यह भी ख़बर छपती है कि दुनिया में निर्यात व्यापार में गिरावट देखी जा रही है। उसके अगले दिन ख़बर छपती है कि भारतीय बैंकों से कंपनियों ने लोन लेना कम कर दिया है।
प्राइम टाइम इंट्रो : नेट न्‍यूट्रैलिटी का क्‍या है भविष्‍य?धरती पर भले ही हम और आप बराबर न हो सकें मगर बताया जाता है कि इंटरनेट पर हम और आप बराबर हैं। एक ही क्लिक में हम अमेरिका और मुनिरका की वेबसाइट पर आवाजाही कर सकते हैं। व्हाट्सऐप पर ग्रुप चैट कर सकते हैं और स्काइप पर इंटरनेशनल कॉल।
मराठी फिल्म मुद्दा : शोभा डे के ट्वीटों पर भड़की शिवसेना, वड़ा-पाव लेकर किया प्रदर्शनशिवसेना ने यह तय किया है कि वह प्रसिद्ध कॉलमनिस्ट शोभा डे का जमकर विरोध करेगी। आज डे के घर के सामने विरोध की योजना है और सदन में शिवसेना विधायक ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश भी कर दिया है।
प्राइम टाइम इंट्रो : वायु प्रदूषण पर लगाम की तैयारी, पुरानी डीजल कारों पर लगेगी रोकहम आप शादी ब्याह में जाते हैं, शामियाने के गेट पर या पीछे जनरेटर भड़भड़ा रहा होता है, दफ्तर, बाज़ार, अस्पताल, हर जगह इस जनरेटर ने बिजली विरोधी मोर्चा संभाल लिया है। बिजली गई नहीं कि जनरेटर ज़िंदाबाद हो जाता है। ये वाकई ज़िंदाबाद है या ज़िंदाबाद के नाम पर हम सबका मुर्दाबाद।
क्‍या खेमका जैसे अफसर की ट्रांसपोर्ट जैसे ईमानदार विभाग में और ज़रूरत नहीं?हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के साथ आप हैं या नहीं मगर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज उनके साथ हैं। उन्होंने कहा है कि वे मुख्यमंत्री खट्टर से बात करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे ईमानदार अफसर हैं मगर तबादले का अधिकार सरकार का है।
प्राइम टाइम इंट्रो : बीजेपी के दावे में कितना दम?अक्सर हम सदस्यता अभियानों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं पर इस मिस्ड कॉल अभियान का शुक्रिया कि इसी बहाने इस पर बात करने का मौका आया।
अरविंद और मेरे बीच कोई अहम नहीं है, इसे व्यक्तिगत मुद्दा न समझा जाए : योगेंद्र यादवआम आदमी पार्टी में आई दरार और पार्टी के दिल्ली सचिव दिलीप पांडे द्वारा योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पर पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाने के बीच योगेंद्र यादव ने साफ किया उन्होंने कभी अरविंद केजरीवाल को हटाने की मांग नहीं की।
रवीश कुमार की कलम से : क्या अब अलग हो चुके हैं अरविंद और योगेंद्र?रात भर की बारिश के साथ आम आदमी पार्टी के भीतर इतना कुछ भीग गया कि सुबह के बयानों ने सूखी ज़मीन की तमाम संभावनाओं को समाप्त कर दिया था। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण अचानक खलनायक की तरह पेश किए जाने लगे जो अरविंद केजरीवाल को पार्टी के संयोजक पद से हटाना चाहते हैं।
क्या रेलवे ने ज्यादा ऊंचा लक्ष्य रखा?मोदी सरकार के दूसरे रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने अपना पहला रेल बजट पेश कर दिया। इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी नई ट्रेन का एलान नहीं हुआ। यात्री किराया भी नहीं बढ़ा है।
स्वाइन फ्लू, इलाज और सरकारी तंत्रआज हम इस बीमारी के बारे में तो बात करेंगे ही साथ ही यह भी समझने का प्रयास करेंगे कि इस तरह की महामारी जैसी स्थिति में हमारा सरकारी तंत्र जिस तरह से कदम उठाता है पब्किल हेल्थ को लेकर, क्या वो काफी है, क्या वो उन पैमानों पर खरा उतरता है जिससे एक सामान्य आदमी की जान बच सके।
किरण बेदी जी, काश कुछ और वक्त मिल पाता : रवीश कुमारइस ब्लॉग में वह खुद बात कर रहे हैं, बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी के साथ किए उस इंटरव्यू के बारे में, जो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।
'टफ कॉप' से रवीश कुमार के टफ सवाल : दिल्ली के दंगल में किरण बेदी की दावेदारीदिल्ली में बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने बुधवार को एनडीटीवी के रवीश कुमार के साथ बातचीत में कहा कि अगर जरूरत महसूस हुई तो पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए और कानून बनाए जाएंगे।

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