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प्राइम टाइम इंट्रो : क्या हम ज्यादा गंभीर हो गए हैं?देश एक गंभीर दौर से गुज़र रहा है। इस गंभीरता के कारण हमें गंभीरता के दौरे पड़ने लगे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बात पर शोध कर रहे हैं कि कहीं गंभीरता में अपना हिन्दुस्तान तमाम देशों को पीछे न छोड़ दे। आज कोई कह रहा था कि हम भारत के लोग की जगह हम भारत के गंभीर लोग लिखा होना चाहिए।
प्राइम टाइम इंट्रो : नए पीएम के साथ सांप्रदायिक हिंसा में वृद्धि हुई है?नमस्कार मैं रवीश कुमार। ऐसा क्यों होता है कि सांप्रदायिकता पर होने वाली बहसें तर्कबुद्धि की काबिलियत का प्रदर्शन बन कर रह जाती है। इस बहस में लोग एक दूसरे से जीतने का प्रयास करने लगते हैं। बहस में तो कोई न कोई जीत जाता है मगर सांप्रदायिकता से ये विजेता हार जाते हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : बिना अंग्रेज़ी जाने क्या आई ए एस बन सकते हैं?बिना अंग्रेज़ी का टेस्ट दिए आप हिन्दी का पत्रकार नहीं बन सकते। सच तो यही है, लेकिन हिन्दी का यह पत्रकार प्राइम टाइम में तीसरी बार बहस करने जा रहा है कि बिना अंग्रेज़ी जाने क्या आई ए एस बन सकते हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : जीएम फूड खेती की समस्या का अचूक समाधान है?जीएम फूड, जैव संवर्धित फसलों के बारे में आपकी कोई राय है। नहीं है तो कोई बात नहीं, मगर इस विवाद को आप किसी परिकथा की तरह न देखें तो ठीक रहेगा। जहां कोई चांद से आता है और खेती किसानी से लेकर भूखमरी तक की समस्या का हल कर जाता है। दुनिया भर में जीएम फूड को लेकर अनंत विवाद हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : नैतिक मूल्यों में भारी गिरावट है?हमारे देश में बत्रा सहित कई लोग हैं जो मानते हैं कि इस वक्त जो आधुकनिता चल रही है वो पश्चिम परस्त है और उसी के कारण नैतिक मूल्यों में भारी गिरावट है।
प्राइम टाइम इंट्रो : क्या शिवसेना सांसद का तरीका जायज है?एक सांसद एक कर्मचारी के मुंह में रोटी ठूंस रहे हैं। ये जनाब ठाणे से शिवसेना के सांसद हैं, राजन विचारे और जिसके मुंह में रोटी ठूंसी जा रही है, वो हैं अरशद ज़ुबैर, महाराष्ट्र सदन में आईआरसीटीसी के रेसिडेंट मैनेजर। अरशद का कहना है कि ऐसा करने से उसका रोज़ा समय से पहले टूट गया।
प्राइम टाइम इंट्रो : गाजा पर इजराइली हमले पर उदासीनताग्लोबल और गूगल काल ने हमारी जागरूकता को किस हद तक बेहतर किया है या बदतर किया है इसकी एक मिसाल है गाज़ा पर इज़राइली हमले को लेकर हमारी उदासीनता। चैनल अभी-अभी वैदिक काल से निकल अशोक सिंघल के मुस्लिम विरोधी बयान काल में प्रवेश कर गए हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : दिल्ली में सरकार बनाने का दांवपेंचराजनीति में नैतिकता चुनाव सापेक्षिकहोती है और व्यावहारिकता सत्ता सापेक्षिक होती है। राजनीति के इस गुणसूत्र यानी डीएनए की खोज मैंने नहीं की है। इसकी खोज आप जनता ने की है जिस पर जमी धूल को झाड़ कर मैं फिर से पेश कर रहा हूं। तो दिल्ली में सरकार बनने के आसार फिर से मंडराने लगे हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने पर विवाद क्यों?बलिहारी उस मीडिया की जो अमित शाह के नाम से शाह उठाकर उनके अध्यक्ष बनने को ऐसे पेश कर रही है मानो बीजेपी का नहीं किसी मुग़लिया जागीर का कोई मनसबदार बना हो।
प्राइम टाइम इंट्रो : दहेज प्रताड़ना, कौन प्रताड़ित?सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी के सेक्शन 41 के तहत बिना वारंट और मजिस्ट्रेट के आदेश के पुलिस को गिरफ्तार करने के अधिकार का गलत इस्तमाल हो रहा है।
प्राइम टाइम इंट्रो : न्यायपालिका की आज़ादी में दखलंदाज़ी हुई?कोई सरकार अपनी संस्थाओं के बीच किस तरह का संतुलन बनाती है और उनकी स्वायत्तता को कितनी जगह देती है। मैं सीबीआई की बात नहीं कर रहा हूं। वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम जज नहीं बने तो जनता को क्यों तकलीफ होनी चाहिए।
प्राइम टाइम इंट्रो : मोदी सरकार के तीस दिनअच्छे दिन आने वाले हैं से लेकर अच्छे दिन आ गए हैं और कहां हैं अच्छे दिन। रेडियो, एफएम, टीवी चैनल लतीफों के तमाम कार्यक्रम अखबार राजनीतिक बहसबाज़ी इन सबमें अच्छे दिन आ गए हैं को लेकर इतने प्रयोग हो रहे हैं कि एक दिन यह स्लोगन ही मुद्दा न बन जाए।
प्राइम टाइम इंट्रो : व्यापम घोटाला कितना सर्वव्यापम?नमस्कार मैं रवीश कुमार, व्यापम किस राज्य में व्याप्त हुआ है। व्यापम कितना सर्वव्यापम है और इस सर्वव्यापी व्यापम में कौन-कौन से नेता अफसर व्याप्त हैं, जो पकड़े गए हैं। वही व्याप्त हैं या और भी कई लोग हैं जो व्यापम में व्याप्त हैं। मैं आपको पर्यायवाची की तर्ज पर व्याप्तवाची छंद नहीं सुना रहा हूं।
प्राइम टाइम इंट्रो : बनारस से मोदी के चुनाव लड़ने के मायनेजब से नरेंद्र मोदी का एलान बनारस से हुआ है अनगिनत कैमरे बनारस के घाटों और गंगा की नावों पर तैरने लगे हैं। बनारस का दैविक चित्रण होने लगा है। इन चित्रण में बनारस की ऐतिहासिक विविधता कम है। वही घाट वही चिलम वही साधु बाबा वही गंगा वही पप्पू चाय की दुकान।
प्राइम टाइम इंट्रो : भारतीय राजनीति में हिटलर!1945 में बर्लिन के एक बंकर में खुदकुशी करने वाले हिटलर की आत्मा आज भी उस आर्य भूमि यानी भारत में भटक रही है जिसके नस्ली नाम पर उसने लाखों यहुदियों का क़त्ल कर दिया। हिटलर हमारी राजनीति का सबसे बड़ा आरोप है। पता नहीं इंडिया में मुसोलिनी क्यों नहीं कोई नाम लेता। शायद इसलिए कि उसमें विचारधारा का पक्ष जरा कमज़ोर है।
प्राइम टाइम इंट्रो : मत के निर्णय पर कैसे पहुंचता है युवा?एक आदर्श चुनाव की स्थिति क्या होनी चाहिए कि सिर्फ़ मतदान का प्रतिशत ही बढ़े उसी का गौरवगान हो या मतदान प्रतिशत की चिंता छोड़ मुद्दों को समझने में भागीदारी करे। इसके लिए साधन क्या हैं, भाषण विज्ञापन, घोषणापत्र या मीडिया।
प्राइम टाइम इंट्रो : सेकुलरिज्म के नाम पर गोलबंदीजब दो सेकुलर दल आपस में लड़ते हुए अपना मकसद सांप्रदायिकता से लड़ना बताएं तो समझिए कि चुनाव आ गया है। सेकुलरिज्म भारतीय राजनीति का वह बुनियादी तत्व है, जिसे सियासी दलों ने फुटबॉल बना दिया है।
प्राइमटाइम इंट्रो : जनार्दन का विचार खारिजअंग्रेज़ी में जारी ई-मेल के ज़रिये सोनिया गांधी ने काफ़ी सख़्त लहज़े में कहा है कि कांग्रेस अनुसूचित जाति−जनजाति और पिछड़ों के जाति आधारित आरक्षण को बनाए रखने की बात करती है क्योंकि उन्हें सदियों से भेदभाव का सामना करना पड़ा है।

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'दुनिया की छत' के खास दौरे पर एनडीटीवी इंडिया

तिब्बत की पहली झलक हमने आसमान से देखी...बादलों के बीच से पहाड़ की ऊंची चोटियां, चमकदार फीते सी नदियां...मन कर रहा था कि एक भी फ्रेम रिकॉर्ड करने से छूटने न पाए और जब तक संभव हुआ, हम सब कुछ कैमरे में उतारते गए।

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