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Ravish kumar


'Ravish kumar' - 720 न्यूज़ रिजल्ट्स

  • प्राइम टाइम इंट्रो : टैगोर का देशप्रेम बनाम मानवता

    प्राइम टाइम इंट्रो : टैगोर का देशप्रेम बनाम मानवता

    आख़िर टैगोर के लिए राष्ट्रवाद क्यों ग्लास जितनी सस्ती है, जिसे वो मानवतावाद के बेशकीमती हीरे से नहीं ख़रीदना चाहते हैं. 1916 और 1917 के साल टैगोर जापान और अमेरिका जाकर राष्ट्रवाद पर लेक्चर दे रहे थे. 55 साल की उम्र थी तब. 1913 में ही नोबेल पुरस्कार मिल चुका था. 1908 से 1917 के बीच राष्ट्रवाद को लेकर टैगौर लगातार सोच रहे थे.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : अरुण जेटली ने इतिहास का हवाला देकर मीडिया से किया सवाल

    प्राइम टाइम इंट्रो : अरुण जेटली ने इतिहास का हवाला देकर मीडिया से किया सवाल

    वित्त मंत्री अरुण जेटली भुवनेश्वर में मेक इन उड़ीसा कांक्लेव में बोल रहे थे. उन्होंने ऐसा भारी सवाल दाग़ दिया है कि जवाब देने से पहले आपको 2016 से चलकर 1947 में जाना होगा. 69 साल पीछे जाकर उस समय के अख़बारों के पन्ने पलट कर ही वित्त मंत्री जेटली के सवालों का जवाब दिया जा सकता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : जैसे-तैसे कटा नवंबर, पर दिसंबर?

    प्राइम टाइम इंट्रो : जैसे-तैसे कटा नवंबर, पर दिसंबर?

    सैलरी आएगी ये सवाल है, आएगी तो कितनी मिलेगी, क्या उसके लिए फिर से बैंकों के बाहर लाइनों में दिन रात एक करना होगा. सरकार शुरुआती हफ्तों में तो रोज़ बता रही थी कि इतने एटीएम को नए नोटों के लायक सेट कर दिया गया है. इसके बाद भी कई जगहों पर एटीएम में पैसा नहीं है.

  • किरायेदारों, कामगारों को अनैतिक बनाकर कैशलेस नैतिकता कायम नहीं हो सकती

    किरायेदारों, कामगारों को अनैतिक बनाकर कैशलेस नैतिकता कायम नहीं हो सकती

    नोटबंदी और नोटविहीन समाज की बुनियाद नैतिकता पर टिकी है. आदर्श रूप में भले न हो मगर उस दिशा में प्रस्थान का इशारा तो करती ही है. सबको ईमानदार होना है. इसलिए सबको कैशलेस होना होगा. सारी बहसों के केंद्र में यही है कि कैशलेस होना ही ईमानदार व्यवस्था और बाजार के निर्माण का प्रमाण है. दुनिया के इतिहास में न तो कहीं व्यवस्था ईमानदार हो सकी है, न समाज और न बाजार.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : उपचुनावों के नतीजे पर नोटबंदी का असर?

    प्राइम टाइम इंट्रो : उपचुनावों के नतीजे पर नोटबंदी का असर?

    नोटबंदी के राजनीतिक नफा-नुकसान की अटकलों के बीच बीजेपी ने महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. 147 म्युनिसिपल काउंसिलों और 17 पंचायतों की 3727 सीटों के लिए 27 नवंबर को मतदान हुए थे. बीजेपी ने अपना प्रदर्शन पहले के मुकाबले काफी बेहतर किया है. कहने वाले तो यही कहेंगे कि स्थानीय निकायों के चुनाव अलग मुद्दों पर होते हैं, लेकिन अगर बीजेपी हार जाती तो यह तो कहा ही जाता कि नोटबंदी के कारण हारी है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : भारत बंद की अपील किसने की थी?

    प्राइम टाइम इंट्रो : भारत बंद की अपील किसने की थी?

    भारत बंद की अपील किस दल ने की थी, इसका पता लगाना जरूरी है, क्योंकि तमाम विपक्षी दलों को भी इसका जवाब नहीं मालूम है. रविवार से सोमवार तक वो यही सफाई देते रहे हैं कि उन्होंने भारत बंद की अपील नहीं की है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : जिस लोकपाल के लिए लड़े, वो कहां है?

    प्राइम टाइम इंट्रो : जिस लोकपाल के लिए लड़े, वो कहां है?

    लोकपाल से लेकर नोटबंदी तक सपना एक ही है, भ्रष्टाचार मिटना चाहिए. नोटबंदी वाले भी लोकपाल के लिए फिर से संघर्ष कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि लोकपाल को एक डेड लेटर नहीं बनने दिया जाना चाहिए. सरकार को इसके लिए एक डेडलाइन तय करनी होगी.

  • रवीश कुमार : क्या ख़ुश होना ही सबसे बड़ी ख़बर है...?

    रवीश कुमार : क्या ख़ुश होना ही सबसे बड़ी ख़बर है...?

    गांवों में इंटरनेट की पहुंच बहुत कम है. क्या प्रधानमंत्री के सर्वे में गांवों वालों को शामिल होने का हक नहीं है. क्या प्रधानमंत्री अपने सर्वे को सिर्फ शहरी और इंटरनेट-संपन्न लोगों को ही शामिल करना चाहेंगे...? उनका हर फ़ैसला ग़रीबों के लिए होता है, तो सर्वे के इस फ़ैसले में ग़रीब क्यों नहीं हैं.

  • लप्रेक- तुम बैंक की क़तार में कितनी कातर लगती हो...

    लप्रेक- तुम बैंक की क़तार में कितनी कातर लगती हो...

    नब्बे परसेंट से हटकर जो लोग अलग चलते हैं, उनका यही हाल होता है. वह पागल होकर मरते हैं. मुझे भीड़ से अलग नहीं रहना है. नहीं सोचना है कुछ भी अलग. क्या इतने लोग गलत हो सकते हैं? देखो, मुझे फिर से लाइन में लगने जाना है. कुछ और बात करने के लिए नहीं है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : आरबीआई की शर्तों से शादियों का खर्च फंसा

    प्राइम टाइम इंट्रो : आरबीआई की शर्तों से शादियों का खर्च फंसा

    शादी ब्याह की अपनी एक अर्थव्यवस्था होती है. कई तरह के रोज़गारों को इससे सहायता मिलती है. वो सब ठप्प से पड़ गए. रिजर्व बैंक की गाइडलाइन से अगर दूल्हा-दुल्हन बैंक की लाइन में घंटों खड़े रहेंगे या उनके माता-पिता रहेंगे तो बाकी तैयारी का काम कौन देखेगा. बहुत से लोग शादी के लिए उधार लेते हैं, घर बेचते हैं. यह सब पैसा कैसे बैंक में जमा होगा.

  • अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन में क्यों होती है लाखों-करोड़ों की टैक्स चोरी

    अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन में क्यों होती है लाखों-करोड़ों की टैक्स चोरी

    बेहतर है कि नोटबंदी को लेकर किए जा रहे दावों को छोड़ हम सवालों को देखें. हर जवाब हमारी आर्थिक समझदारी को विकसित करेगा. हम पत्रकार भी उतने योग्य नहीं है कि अर्थव्यवस्था के इन बारीक सवालों को दावे के साथ रख सकें. मैंने कोई अंतिम बात नहीं की है. आप भी अंतिम बात जानने का मोह छोड़ दें, नई बातें जानने की बेचैनियों का विस्तार करें.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए हम कितने तैयार?

    प्राइम टाइम इंट्रो : कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए हम कितने तैयार?

    धरती के नंबर एक दुश्मनों में से एक है प्लास्टिक. इस प्लास्टिक ने पूरी धरती को कबाड़ में बदल दिया है. प्लास्टिक पर्यावरण को खा गया, लेकिन प्लास्टिक मनी का स्वागत अर्थव्यवस्था की नई बहूरानी के रूप में खूब किया जा रहा है. क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और कई बार नोट भी प्लास्टिक के रूप होते हैं. इसी के साथ कैशलेश इकोनॉमी की बात होने लगी है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : राष्ट्रवाद के नाम पर नियंत्रण का खेल

    प्राइम टाइम इंट्रो : राष्ट्रवाद के नाम पर नियंत्रण का खेल

    दुनिया भर में सरकारों के कामकाज़ का तरीका बदल रहा है. सरकारें बदल रही हैं. धारणा यानी छवि ही नई ज़मीन है. उसी का विस्तार ही नया राष्ट्रवाद है. मीडिया अब सरकारों का नया मोर्चा है. दुनिया भर की सरकारें मीडिया को जीतने का प्रयास कर रही हैं. हर जगह मीडिया वैसा नहीं रहा जैसा होने की उम्मीद की जाती है.

  • खोड़ा की औरतों का हाल नोटबंदी का हवन कर रहे पंडों को समझ नहीं आएगा

    खोड़ा की औरतों का हाल नोटबंदी का हवन कर रहे पंडों को समझ नहीं आएगा

    भारत में एक लाख की आबादी पर 13 बैंक हैं. खोड़ा की आठ से दस लाख की आबादी पर सिर्फ एक बैंक है, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया. इसकी सीमा से लगे एक दो बैंक और हैं मगर खोड़ा के हिस्से में एक ही बैंक है. एटीएम ज़रूर तीस से पैंतीस के करीब है. अंदाज़ा कीजिए, खोड़ा के स्टेट बैंक के बाहर क्या स्थिति होगी.

  • लेकिन के बाद शुरू होती है असली बात...चांदनी चौक के व्यापारियों की बात...

    लेकिन के बाद शुरू होती है असली बात...चांदनी चौक के व्यापारियों की बात...

    चांदनी चौक की तमाम गलियों में सन्नाटा पसरा है. ज़्यादातर दुकानें बंद हैं. जो खुली हैं उन पर इक्के-दुक्के ग्राहक हैं. सोना चांदी की भी कई दुकानें बंद नज़र आईं. रंग-रसायन और मसाले के बाज़ार में भी दुकानों के शटर गिरे मिले. सत्तर से नब्बे फीसदी दुकानें बंद हैं.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार किस पर?

    प्राइम टाइम इंट्रो : नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार किस पर?

    बड़ी संख्या में लोगों को अप्रत्याशित रूप से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों को रबी की बुवाई के लिए पैसे नहीं मिल रहे हैं. शादी में बड़ी दिक्कतें आ रही हैं. इन लोगों की परेशानी का फैसले के विरोध से कोई लेना-देना नहीं है. गांवों में हालत बहुत ख़राब है.

  • काजल की कोठरी में बंद हैं अब भी कई सवाल, चलो बिजनेस अख़बार पढ़ते हैं

    काजल की कोठरी में बंद हैं अब भी कई सवाल, चलो बिजनेस अख़बार पढ़ते हैं

    आज के दौर में सूचनाओं और तथ्यों की कोई अहमियत नहीं है. मोटी बात लोगों में चली गई है कि काले धन के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक कार्रवाई हुई है. पांच सौ और हज़ार के नोट बंद हो गए हैं. कई तरह के सवालों को अनदेखा किया जा रहा है. टीवी और अखबारों की तस्वीरों में सिर्फ ग़रीब और आम लोग ही परेशान क्यों हैं. जबकि यही वे लोग हैं, जो पूरे मन से सरकार का समर्थन भी कर रहे हैं.

  • क्या व्यापारी-कारोबारी चोर होते हैं? नोटबंदी से उनकी राष्ट्रीय और सामाजिक छवि क्या बेहतर हो रही है?

    क्या व्यापारी-कारोबारी चोर होते हैं? नोटबंदी से उनकी राष्ट्रीय और सामाजिक छवि क्या बेहतर हो रही है?

    इस वक्त हमारे देश में एक साथ कई आर्थिक परिवर्तन हो रहे हैं. बजट अपने तय समय से पहले आ रहा है. एक देश-एक कर का दावा करने वाली जीएसटी लागू होने वाली है और यह नोटबंदी. इन तीनों फैसलों के व्यापक असर को समझने की चुनौती आई है...

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