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अरविंद और मेरे बीच कोई अहम नहीं है, इसे व्यक्तिगत मुद्दा न समझा जाए : योगेंद्र यादवआम आदमी पार्टी में आई दरार और पार्टी के दिल्ली सचिव दिलीप पांडे द्वारा योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पर पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाने के बीच योगेंद्र यादव ने साफ किया उन्होंने कभी अरविंद केजरीवाल को हटाने की मांग नहीं की।
रवीश कुमार की कलम से : क्या अब अलग हो चुके हैं अरविंद और योगेंद्र?रात भर की बारिश के साथ आम आदमी पार्टी के भीतर इतना कुछ भीग गया कि सुबह के बयानों ने सूखी ज़मीन की तमाम संभावनाओं को समाप्त कर दिया था। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण अचानक खलनायक की तरह पेश किए जाने लगे जो अरविंद केजरीवाल को पार्टी के संयोजक पद से हटाना चाहते हैं।
रवीश कुमार : लोकतंत्र के दुर्लभ पदयात्रीरामलीला मैदान का क्षेत्रफल एक लाख साठ हज़ार वर्गफुट है। एक आदमी पालथी मारकर बैठता है तो चार फुट जगह लेता है इस हिसाब से रामलीला मैदान में अगर लोग बिठाए जाएं तो चालीस हज़ार से ज्यादा आ ही नहीं सकते। कुर्सियां लगाएंगे तो पैंतीस हज़ार से ज्यादा लोग नहीं आ सकते।
रवीश कुमार : मोदी के सूट की नीलामी पर राजनीतिकाश सूट के बहाने सार्वजनिक जीवन में मौजूद हमारे नेताओं के पहनावे और उनकी कीमत पर खुलकर चर्चा हो जाती। तब आपको प्रधानमंत्री के सूट के बहाने पता चल जाता कि दूसरे नेताओं के सूट और शॉल कितने महंगे हैं।
रवीश कुमार की नजर से : नीलाम सूट के बहाने दाग़ से मुक्ति की कामनाजिस समय प्रधानमंत्री बेंगलुरु में बेहद सादे लिबास में सेना के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे ठीक उसी समय के आस-पास उनके गृह राज्य सूरत में उस सूट की नीलामी शुरू हो गई, जिसे लेकर इन दिनों खूब राजनीतिक विवाद हुए।
रवीश कुमार : ऑनलाइन शॉपिंग की कामयाबी का अंधेराशायद मेरा सवाल और चुभ गया। कहने लगे कि ऑनलाइन ने हम रिटेल वालों को मार दिया है। पिछले साल ही चालीस परसेंट का नुकसान हो गया था।
लघु प्रेम कथाओं, यानि 'लप्रेक' पर रवीश कुमार ने की दिल की बात'लप्रेक', यानि लघु प्रेम कथाओं पर आधारित रवीश कुमार की पहली किताब 'इश्क में शहर होना' बाजार में है। बहुत-से प्रशंसक इसे लेकर रवीश से बात करना चाहते थे, सो, उन्होंने NDTVKhabar.com के Facebook पेज के जरिये अपने प्रशंसकों से लाइव चैट की।
क्या लोग सरकार से डरने लगे हैं?अब डर कायम करने में सरकार की सीधे भूमिका थी या नहीं, इस पर विवाद हो सकता है मगर कई बार समाज के एक वर्ग में ऐसी धारणा बन जाती है कि मीडिया आज़ाद नहीं है।
क्या आप दिल्ली को लेकर टेंशन में हैं?चुनाव दिल्ली का, लेकिन दिल धड़क रहा है पूरे देश का। हर कोई पूछ रहा है कि दिल्ली में क्या होगा। कई लोग ठीक वैसे ही तनाव से गुज़रने लगे हैं जैसे विश्वकप के दौरान आखिरी के दस ओवरों के दौरान होता है। नाखून चबाने लगते हैं तो आंखें बंद कर अपने कुल देवताओं का जाप करने लगते हैं।
इंदिरा गांधी की कार 'उठवाने' वाले पुलिस अधिकारी ने कहा- बेदी ने नहीं मारा मेरा हकनिर्मल सिंह का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि किरण बेदी ने उनके किसी काम का क्रेडिट चुरा लिया हो। 1982 की इस घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने (किरण बेदी) ने क्रेडिट नहीं चुराया, इस काम का पूरा क्रेडिट पुलिस को जाता है।
मीडिया की भूमिका छोड़िये, मैं अपनी भूमिका से खुश नहीं- रवीश कुमारएनडीटीवी इंडिया ने गुरुवार को अपनी विशेष पेशकश में, अपने फेसबुक पेज पर एक लाइव चैट आयोजित की। इस लाइव चैट में हमने,विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यमों जैसे ट्विटर, फेसबुक और गूगल प्लस पर जुड़े हमारे पाठकों और टेलीविज़न के दर्शकों की बातचीत करायी सीधे-सीधे रवीश कुमार से।
छा गए रवीश कुमार... नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा पर भी भारी पड़ेखास बात यह है कि ऐसा शायद पहली बार है कि एक ही इंटरव्यू दो अलग-अलग हैशटैग के साथ इतना चर्चा में आया है कि ट्रेंड कर रहा है। ये हैशटैग हैं - #RavishAsksBedi और #SuperJournalistRavish
किरण बेदी जी, काश कुछ और वक्त मिल पाता : रवीश कुमारइस ब्लॉग में वह खुद बात कर रहे हैं, बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी के साथ किए उस इंटरव्यू के बारे में, जो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।
'टफ कॉप' से रवीश कुमार के टफ सवाल : दिल्ली के दंगल में किरण बेदी की दावेदारीदिल्ली में बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने बुधवार को एनडीटीवी के रवीश कुमार के साथ बातचीत में कहा कि अगर जरूरत महसूस हुई तो पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए और कानून बनाए जाएंगे।
क्या किरण और केजरीवाल में बहस होनी चाहिए?केजरीवाल ने ट्वीट कर किरण बेदी से कहा है कि मैं किरण बेदी को बहस के लिए चुनौती देता हूं जिसे कोई तटस्थ संचालित करे और सभी टीवी चैनल दिखायें।
रवीश कुमार की कलम से : धर्म के आदर के नाम परधर्म का आदर करो का मतलब धर्म से डरो हो गया है। दूसरे अन्य विचारों की तरह धर्म की भी आलोचना होनी चाहिए, व्यंग्य होना चाहिए और हां, बिना डरे अनादर भी।
रवीश कुमार की कलम से : चाय की चर्चा वाया कोलकाताचाय की दुकान में आक्सीजन सिलेंडर जैसा पात्र देख मेरी नज़र ठहर गई। दुकानदार राजेश शुक्ला ने बताया कि ये अंग्रेज़ों का सिस्टम है। वो चले गए लेकिन चाय पीने का ये स्टाइल भारत में रह गया। अंग्रेज़ दूध वाली चाय नहीं पीते थे। लिकर ( सिर्फ पत्ती वाली चाय) ही पीते थे। सिलेंडर में खौलता पानी है।
रवीश की कलम से : बांग्ला फ़िल्म 'व्योमकेश फिरे ऐलो' की समीक्षा'व्योमकेश फिरे ऐलो' एक बेहतरीन फ़िल्म है। कहानी कहने और पकड़कर रखने में बांग्ला फ़िल्मों का क्राफ्ट मुंबइया फ़िल्मों से कहीं ज़्यादा चुस्त है।
रवीश कुमार की कलम से : स्व, सेल्फ़ और बाबागिरी का दौरसंवाद भी उपभोग ही है। संवाद के उपभोग से कचरा पैदा हो रहा है। हम कचरे को संवाद बनाकर फैला रहे हैं। कुछ भी लिख रहे हैं और कुछ भी पढ़ रहे हैं।
रवीश कुमार की कलम से : सरकार में घाटी और जम्मू साथ आएंमहाराष्ट्र के बाद जम्मू-कश्मीर में बीजेपी का मिशन फेल रहा है। यह भी कह सकते हैं कि पूरा नहीं हुआ। श्रीनगर में हुई प्रधानमंत्री की रैली को बीजेपी ऐतिहासिक बता रही थी, लेकिन भीड़ हमेशा जीत नहीं बताती। घाटी में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला।

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