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बच्चों ने बुलाई बिल्ली के बच्चे की मौत पर शोक सभानिगाह बार-बार फोन पर जाकर लौट आ रही थी। प्राइम टाइम की तैयारियों में व्यस्त होने के कारण सोचा कि नहीं उठाते हैं। पर फोन की बेसब्री देख उठा ही लिया। हलो अंकल! कौन? 'अंकल मैं तथागत बोल रहा हूं। मैं प्राइम टाइम देखता हूं।' पर आपकी आवाज़ तो बच्चे की लगती है। 'हां अंकल मैं बच्चा हूं।'
इतने से काम नहीं चलता! वेतन बढ़वाना चाहते हैं AAP विधायकहमारे नेता खुद को महाराजा समझने लगे हैं। राजनीति में सादगी एक तमाशा है और तमाशा ही असली सादगी। मुश्किल से साल पूरा हुआ है, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने अपने लिए 5 करोड़ की मर्सिडिज़ बस बनवाई है।
जन प्रतिनिधियों के वेतन का मुद्दा : क्या सांसदों का वेतन बढ़ाना ठीक?पंद्रह जून से हमारे सैनिक जंतर मंतर पर वेतन और पेंशन के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं लेकिन हमारे सांसद कितनी आसानी से अपनी सुख सुविधा और सैलरी बढ़ाने का प्रस्ताव भेज देते हैं।
खेतों में डिजिटल क्रांति का अक्स : Whatsapp ग्रुप बना खेती पर जानकारियां साझा करते किसानडिजिटल क्रांति का एक चेहरा महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला है। महाराष्ट्र के वही इलाके जो किसानों की आत्महत्या के लिए बीते कुछ सालों में सुर्खियों में रहे हैं।
डिजिटल इंडिया के लाभ और सवाल?अगस्त 2014 में ही मोदी मंत्रिमंडल ने डिजिटल इंडिया का फैसला कर लिया था, करीब एक साल की गहन तैयारी के बाद बुधवार शाम को इसे धूमधाम के साथ लांच किया गया। अगले चार साल में ढाई लाख पंचायत ब्राड बैंड से जोड़ दिए जाएंगे। गांव गांव में ब्राड बैंड का जाल बिछाया जाएगा।
प्रधानमंत्री को बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए, उनकी चुप्पी काफी है सुनने वालों के लिएहर बहस और लेख में याद दिलाया जा रहा है कि अरे हां, प्रधानमंत्री तो बोल ही नहीं रहे हैं। इतना तो बोलते हैं, मगर इस पर क्यों चुप हो गए हैं...
धौलपुर महल पर जारी है महाभारतहर दिन आने वाला एक नया आरोप वसुंधरा के लिए ढाल ही बन रहा है। नया मामला इतना उलझा हुआ है कि इसे अदालत ही सुलझा सकती है। धौलपुर पैलेस सरकार का है या वसुंधरा के बेटे और सांसद दुष्यंत सिंह का है।
कितना व्‍यापक है व्‍यापम घोटाला?2006 के साल से ही व्यापक की भर्तियों और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी की ख़बरें आने लगी थीं लेकिन 2013 में डॉक्टर जगदीश सागर के पकड़े जाने से मामला खुला तो पता चला कि मध्य प्रदेश के योग्य छात्रों की एक पूरी पीढ़ी इस घोटाले की भेंट चढ़ चुकी है।
सिर्फ सियासी फायदे के लिए याद आते हैं जेपीआपातकाल की बरसी के आस पास जयप्रकाश नारायण अनिवार्य हो जाते हैं। उसके बाद वैकल्पिक हो जाते हैं और फिर धीरे-धीरे गौण। चुनाव आता है तो भ्रष्टाचार के प्रतीक बन जाते हैं और चुनाव चला जाता है कि तो उन्हें छोड़ सब भ्रष्टाचार के मामलों में बचाव करने में जुट जाते हैं।
ललित मोदी ने एक-एक कर सबको लपेटापहले माना कि कोई दस्तावेज़ नहीं है, फिर कहा कि दस्तख़त नहीं है फिर दस्तखत आ गया तब कहा गया कि कौन कहता है कि दस्तवाजे सही है या नहीं, जब उसके सही होने की बात मज़बूत होती गई तो अब बीजेपी ने एक नया सही खोज लिया है।
क्‍या इस्‍तीफा देंगी वसुंधरा राजे?25 जून 1975 को चालीस साल हो गए। इस घटना को याद रखना चाहिए क्योंकि इस तारीख के बाद लोकतंत्र को बचाये और बनाए रखने के लिए एक लंबी लड़ाई शुरू होती है जो आज भी जारी है। उन अर्थों में आपातकाल दोबारा भले न आया हो मगर लोकतंत्र का सारा जश्न मतदान के प्रतिशत और शांतिपूर्ण चुनावों की तैयारियों में ही सिमट कर रह गया है।
रवीश कुमार की ललित आरती 'आप ही मयखाना, आप ही तहखाना'मैं यह आरतीनुमा पत्र उम्मीद से लिख रहा हूं। बुलाने को लिए नहीं, बताने के लिए लिख रहा हूं। भारत में जो ललित होगा, उसी के कर्मों का फलित होगा। आप कर्मों के कर्म हैं, धर्मों के धर्म हैं। आप दलों के दल हैं, दलदल में कमल हैं...
ललित कथा में फंसी वसुंधरा, दस्‍तखत वाला हलफनामा आया सामनेनहीं नहीं इसमें मंत्रियों के इस्तीफे नहीं हुआ करते भईया, ये यूपीए नहीं एनडीए government है। राजनाथ सिंह की बात हैरान करने वाली थी लेकिन उन्हें भी अंदाज़ा नहीं होगा कि उनके इस बेतकल्लुफ़ अंदाज़ पर शाम होते होते वसुंधरा राजे का वो हलफनामा भारी पड़ सकता है जिस पर उनके दस्तखत हैं।
ललित मोदी को लेकर ऐसी नरमी क्‍यों?किसी राष्ट्रीय परीक्षा में एक प्रश्न पूछा जाए कि निम्नांकित श्रेणियों में से किन्हीं तीन के आगे टिक करें और बतायें कि ललित मोदी क्या हैं। जैसे मैंने एक प्रश्न का लंबा सा प्रश्नपत्र बनाया है ताकि आप टिक कर सकें।
उपराष्ट्रपति अंसारी के योग कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के बवाल पर सवालइस बात का पता किसी को नहीं चलता कि योग दिवस के कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति को नहीं बुलाया गया है, अगर आरएसएस के पूर्व प्रवक्ता और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ट्वीट न करते।
ये अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है या रामदेव दिवस?रामदेव ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए काफी कुछ किया है। प्रधानमंत्री ने भी रामदेव का काफी मान रखा है। 191 लाख रुपये की राशि कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन हर लिहाज़ से देखिये तो अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सिर्फ और सिर्फ रामदेव ही हैं।
बीजेपी का वसुंधरा से पहले किनारा अब बचावइस पूरे विवाद में कोई विजेता बनकर निकला है तो वह है ललित मोदी। मोन्टिनिग्रो की ख़ूबसूरती ने ललित मोदी की इस जीत में और भी चार चांद लगा दिये हैं। जिस व्यक्ति से जुड़े मामले में छह दिनों तक प्रधानमंत्री बोल नहीं सके, उस व्यक्ति की नज़र से देखिये तो अंतिम अट्टाहास का अधिकारी वही है।
इस्तीफ़ू तू बड़ा ही 'नॉटी गेम चेंजर' हैइस्तीफू काश तुम इतने भी हल्के न होते कि कोई तुम्हें जेब में लेकर चलता, बल्कि लगता है कि तुम काफी मोटा गए हो। इसलिए कोई जेब में लेकर चलता हुआ दिखाई-सुनाई नहीं पड़ता है..
आपातकाल को लेकर आडवाणी की आशंका कितनी वाजिब?सवाल पूछा जा रहा है कि ललित मोदी को भारत सरकार को न बताए जाने की शर्त पर हलफनामा क्यों दिया गया मगर जवाब आ रहा है कि वसुंधरा राजे के साथ कौन-कौन खड़ा है।
तो मेरे प्यारे नेताओं, ज़मीन पर आ जाओ। मसीहा बनना है तो यू-टयूब पर बहुत सारे मसीहाई गाने हैं। उन्हें सुन लो, लेकिन लोकतंत्र में न तो खुद को ईश्वर का अवतार बनाओ न मसीहा, न ज़रूरत से ज़्यादा पीड़ित।

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