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ट्विटर पर दलित संगठनों की धमक, पर चमक क्यों है फीकीआप पाठकों को मैं आज ट्विटर की दुनिया में दस्तक दे रही दलित आवाज़ों की दुनिया में ले चलता हूं। फोलोअर के हिसाब से ये दुनिया फ़िलहाल छोटी मालूम पड़ती है और मेरी उस बात की तस्दीक करती है कि ट्विटर पर दलित मसलों पर समर्थन क्यों नहीं मिलता है।
ट्विटर पर भिड़े राहुल गांधी और स्‍मृति ईरानीनमस्कार... मैं रवीश कुमार। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ट्वीटर पर भिड़ गए हैं। अभी तक ट्वीटर पर नेताओं के बयान के बाद उनके समर्थक या भक्त मोर्चा संभाल लेते थे लेकिन स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के हैंडल पर जाकर सीधे चुनौती दे दी है।
ये गर्मी इतनी जानलेवा क्यों हुई?मौसम की चर्चा बिल्कुल होनी चाहिए लेकिन ऐसे नहीं जैसे कुछ लोग थर्मामीटर में 98 डिग्री सेल्सियस देखते ही 102 डिग्री सेल्सियस की तरह कांपने लगते हैं। हम आपको इतना भी आतंकित न करें कि आप घर से निकलना ही बंद कर दें। यह भी हो सकता है कि हम और आप पहले से कहीं ज़्यादा अपने मौसमों को लेकर अनजान होते जा रहे हैं।
खाने की पसंद क्या सरकारें तय करेंगी?मांस खाना न तो धार्मिक रूप से अपराध है न सांस्कृतिक रूप से फिर भी कुछ मांसाहारियों की एक ख़ूबी होती है। वे तीज त्योहार के टाइम एक दिन से लेकर नौ दिनों के लिए शाकाहारी हो जाते हैं।
मनरेगा की सत्यनारायण कथा और किसान चैनल की सत्यकथाप्रधानमंत्री और राहुल गांधी दोनों अगली बार जब खेती का कोई कार्यक्रम करें तो हल न थामें। हल अब समाधान नहीं है। हल और हरवाही हमारे समाज के शोषण की तस्वीर है, न कि महानता की।
क्‍या किसान चैनल से सुधरेगी किसानों की हालत?कृषि दर्शन अब किसान चैनल बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के एक साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर सरकार ने किसानों के लिए नया चैनल लॉन्‍च किया है। किसान चैनल। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे देश में खेती को बदलने में मदद मिलेगी।
केंद्र के नोटिफिकेशन पर चर्चा : दिल्‍ली सरकार का हक कहां तक?संवैधानिक संस्थाओं के बीच टकराव होते रहते हैं, हर टकराव का एक लाभ यह होता है कि पुरानी परिपाटी के हिसाब से सीमाएं स्पष्ट हो जाती हैं और कुछ नए अधिकार क्षेत्र भी उभर कर सामने आ जाते हैं।
रैली प्रधानमंत्री की थी और श्रोता राहुल गांधी थेप्रधानमंत्री मोदी को सामान्य होने का वक्त मिलना चाहिए। उन्हें भी कुछ दिनों के लिए धारणाओं को बनाने वाले भांति-भांति के कारखानों से दूर रहना चाहिए। इस एक साल की एक उपलब्धि तो यह भी है कि प्रधानमंत्री के रूप में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है।
मथुरा में प्रधानमंत्री धारणा को धराशायी कर रहे थे या धन्नासेठों को?ग़रीब, ग़रीब, ग़रीब इतनी बार ग़रीब कि लगा कि कोई ग़रीबों को ढूंढ रहा है यह बताने के लिए कि उसे धन्ना सेठों से कोई मोहब्बत नहीं है। पूरे भाषण में धन्ना सेठ, फैक्ट्री वाले और सत्ता के गलियारे में पहुंच रखने वाले उद्योगपति ख़लनायक की तरह उभरते हैं।
बचाओ-बचाओ : दर्शकों-पाठकों के नाम रवीश कुमार की खुली चिट्ठीपत्र लिखने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि क्या आपके साथ भी वैसा ही हो रहा है, जैसा मेरे साथ हो रहा है। मेरा मतलब है कि क्या हम और आप सेम टू सेम फील कर रहे हैं।
हरियाणवी अंगने में कंगना का जलवा, तनु भागी मनु के पीछेज़माने बाद पर्दे पर हरियाणवी दुल्हन देखी। वर्ना तो करोलबाग और चांदनी चौक टाइप दुल्हनों को देखते-देखते बोर हो गया था। हरे रंग के घाघरे के साथ सफेद बुशर्ट में दुल्हन बनी कंगना रानावत आपको भी अच्छी लगी न!
आलसी विपक्ष का भी तो एक साल पूरा हुआ है26 मई को विपक्ष के भी एक साल पूरे हो रहे हैं। सरकार के साथ-साथ विपक्ष का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए। पूरे साल के दौरान विपक्ष की क्या भूमिका रही है और मोदी सरकार के एक साल पूरे होने के संदर्भ में उसकी क्या कार्य योजना है।
शहर से पहले आप तो स्मार्ट हो जाइएतकनीक का हमारी ज़िन्दगी में प्रवेश हो रहा है, उसे रोका नहीं जा सकता। हमारे देश में अलग-अलग सरकारें इन तकनीकी समाधानों का इस्तेमाल कर रही हैं, बस, इन्हें एक नए नाम से पुकारा जाने लगा है - स्मार्ट सिटी। वैसे स्मार्ट सिटी में सामान्य नागरिक के क्या अधिकार होंगे, यह अभी साफ नहीं है।
हिन्दुत्व को चुनौती देती 'संस्कृति के चार अध्याय'जिस किताब की प्रस्तावना पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लिखी हो और जिसके साठ साल होने के जलसे में आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत कर रहे हों, वो किताब सिर्फ किताब नहीं, बल्कि एक घटना भी है।
दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के लिए मुसलमानों ने दान में दी जमीनबिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में प्रस्तावित विश्व के सबसे बड़े मंदिर रामायण मंदिर के लिए तीस एकड़ ज़मीन मुसलमानों ने दी है। कुछ ज़मीन तो दान में दी लेकिन बाकी की ज़मीन के लिए ज्यादा दाम भी नहीं मांगे। वे चाहते तो मांग सकते थे क्योंकि मुसलमानों की ज़मीन ही सामने की थी।
ऐतिहासिक नायकों पर सियासत : जाति के खांचे में खिंचे सम्राट अशोकइतिहास के पन्नों पर अशोक की औपचारिक यात्रा दो सदी पुरानी है लेकिन इन दौ सौ सालों में किसी को पता नहीं कि 2250 साल पहले के अशोक दिखते कैसे हैं।
दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल : कौन सही है या क्या सही हैमुख्य सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों की तैनाती और तबादले को लेकर दिल्ली सरकार और उप राज्यपाल का विवाद लड़ाई में बदल चुका है। दोनों पक्ष नियमों और प्रावधानों का अपने अपने हिसाब से मतलब निकाल रहे हैं।
दिल्ली की जंग : लड़ाई सिर्फ अधिकारों की या अहं की भी?संविधान या नियमों के प्रावधान में ऐसी लड़ाई की कल्पना की गई है। इसीलिए अगर विवाद हो गया तो Article 239 AA (4) के तहत उप-राज्यपाल उस मामले को राष्ट्रपति के पास भेजेंगे, उनका जो भी फैसला होगा उप-राज्यपाल अमल करेंगे। मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और उप-राज्यपाल ने राष्ट्रपति से मुलाकात भी की।
माननीय वित्तमंत्री जी, क्या आप मास्टर साब की मदद कर सकते हैं?हर कोई किसी न किसी अधिकारी या कर्मचारी से परेशान है। सबके काम बेहद मामूली हैं, लेकिन महीनों से धक्के खा रहे हैं। प्रिंसिपल साहब ने सिर्फ अपनी बात ही बताई, मुझसे कुछ कहा नहीं। यही कहा कि आप दोनों पक्ष की बात दिखाइए।
...जो बॉम्‍बे वेलवेट नहीं देखना चाहते हैंअपने वर्षों की यात्रा में सिनेमा जो नैरेटिव यानी क़िस्सा पैदा करता चलता है, उस किस्से से भी क़िस्सा निकलता रहता है। तभी बहुत पुराना सिनेमा अपने किसी न किसी रूप में सिनेमा में लौटता रहता है।

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