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मीडिया पर क्यों निकाला गुस्सा?रामपाल जैसे बाबाओं का उद्गम स्थल भले ही मीडिया न हो, लेकिन उनके प्रचार प्रसार का माध्यम तो है ही। किसी नाटक के राजा की तरह सजे धजे ज्योतिषाचार्यों से लैस तमाम चैनल आपको पड़ोसी के घर में दही फेंक आने से लेकर पीला कुर्ता पहनकर सलाह देते रहे हैं।
रवीश की कलम से : ...तो इसलिए विदेश दौरों पर गए थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीमोदी विरोधियों के लिए मुद्दा हैं, लेकिन मोदी के लिए उनके विरोधी मुद्दा नहीं हैं। वह जनता से संवाद करते हैं। मीडिया के सवाल-जवाब का सामना नहीं करते, लेकिन अपनी हर बात को किसी किस्से में बदलकर जनता को नई बात दे जाते हैं।
रवीश कुमार की कलम से : कहां गई वो दिल्ली?भावना ने अपने पसंद के लड़के से शादी कर ली। जात को लेकर कोई फर्क रहा होगा जो उसके मां बाप को पसंद नहीं आया। वैसे ऐसी सोच वाले लोग किसी भी जाति को लेकर ऐसे ही बर्ताव करते।
क्या कानून बनाने से समाज बदल जाएगाभारत में गुरुओं के इतने प्रकार हैं कि तय करना मुश्किल हो जाता है कि सच्चा गुरु कौन है। वो जो सिर्फ गुरु है या वो जो धर्म गुरु है या वो जो बिना सीबीएसई बोर्ड या जी मैट क्लीयर किए विश्व गुरु बनने का एलान करते रहता है। हर दिन यहां कोई न कोई बाबा लांच हो जाते हैं।
अपनी नाकामी छुपाने के लिए मीडिया पर हमला?पत्रकारों पर पुलिस की बरसती लाठियों को देखकर क्या आप हरियाणा के पुलिस महानिदेशक की बात पर यकीन करेंगे कि पुलिस की ऐसी कोई मंशा नहीं थी। क्या लाठियां बिना मंशा आदेश के आटोमेटिक चल जाती हैं?
एक बाबा के आगे बेबस पूरी पुलिस12 दिन हो गए, लेकिन हरियाणा की सरकार रामपाल को उनके आश्रम से निकाल कर हाई कोर्ट में पेश नहीं कर पाई। एंबुलेस, रोडवेज की बस, जेसीबी मशीन सब मंगवाई गई है, मगर रामपाल पुलिस की पकड़ से बाहर है।
खुले मन से करें नेहरू का मूल्यांकनहम एक ऐसे समय में रह रहे हैं जहां दुनिया भर में महानता 24 घंटे लाइव है। हर वक्त किसी ने किसी के महान होने का सीधा प्रसारण हो रहा है। रीयल टाइम में महान बनने या बना देने की ऐसी घटना इतिहास के किसी भग्नावशेषों में नहीं मिलती है।
रवीश की कलम से : चाचाकितने दिन हो गए किसी को चाचा पुकारे। आज जवाहरलाल नेहरू की 125वीं जयंती पर यह शब्द तमाम रिश्तेदारियों से बड़ा हो गया है। 125 साल का कोई चाचा होता है भला।
नसबंदी के बाद मौत का जिम्मेदार कौन?छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी के दौरान 13 महिलाओं की मौत के मामले में अब जवाबदेही कैसे तय हो। स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे से तय हो, स्वास्थ्य सचिव के तबादले से, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक के तबादले से तय हो, चार डाक्टरों को सस्पेंड करने से तय हो या एक डॉक्टर की गिरफ्तारी से।
पल्लव बागला की पुस्तक की समीक्षा : हम भी अगर इसरो होते...मेरी मैग्डेलन चर्च। केरल के तट पर बसे थुंबा का यह चर्च के बिना अंतरिक्ष में हिन्दुस्तान का सफ़र न तो शुरू होता है न पूरा। विक्रम साराभाई ने जब थुंबा को भारत के पहले राकेट प्रक्षेपण के लिए चुना तो इस चर्च के बिशप ने वहां के ईसाई मछुआरों को साराभाई की मदद के लिए तैयार किया।
क्या योग्यता के आधार पर ही बने सब मंत्री?कैबिनेट विस्तार से पहले कहा जा रहा था कि सिर्फ मेरिट के आधार पर मंत्री बनेंगे, जाति या किसी और आधार पर नहीं, लेकिन विस्तार के बाद देखने को मिला कि जाति अभी तक मेरिट बनी हुई है।
रवीश की रिपोर्ट : बीजेपी के नवरत्न ने ही किया स्वच्छता अभियान को दागदारसोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक में उपाध्याय, इल्मी और कुरैशी साहब की तस्वीरें वायरल हो गईं हैं। हर तरफ प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का मज़ाक उड़ रहा है। बीजेपी को 'चलता है' टाइप खारिज करने के बयान से ज्यादा ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।
रवीश कुमार की कलम से : हर्षवर्धन हाज़िर होंपिछले साल यही वो महीना था जब बीजेपी हर दूसरी बात में डॉक्टर हर्षवर्धन का नाम लिया करती थी। उनकी ईमानदारी, पल्स पोलियो में उनका योगदान वगैरह उनकी हर खूबी ने बीजेपी को जैसे संजीवनी दे दी थी। उससे पहले बीजेपी अध्यक्ष के रूप में विजय गोयल का चारों तरफ पोस्टर लग गया था।
रवीश कुमार की कलम से : लवली की सबसे लड़ाईराजनीति में कई बार बेतुकी मगर सुखद सी लगने वाली विडंबनाएं बन जाती हैं। जैसे नई दिल्ली के अकबर रोड पर कांग्रेस का राष्ट्रीय मुख्यालय है तो अशोक रोड पर बीजेपी का। अकबर और अशोक दोनों ही भारतीय इतिहास के महानतम नायकों में से हैं और कांग्रेस बीजेपी दोनों ने बारी-बारी से भारत पर शासन किया है।
दिल्ली के उपराज्यपाल ने अपना संवैधानिक दायित्व नहीं निभाया : अरविंदर सिंह लवलीएनडीटीवी के रवीश कुमार के साथ खास बातचीत में लवली ने कहा कि संवैधानिक हेड को संवैधानिक हेड की तरह काम करना चाहिए चाहे कांग्रेस का शासन हो या बीजेपी का।
क्या एमआईएम दिल्ली से भी चुनाव लड़ेगी?महाराष्ट्र में एमआईएम को मिली कामयाबी के बाद अटकलें चल रही हैं कि दिल्ली चुनाव में भी ये पार्टी अपनी किस्मत आज़मा सकती है। इस बात को लेकर भी हिसाब-किताब हो रहा है कि अगर पार्टी ने यहां चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया, तो ज़्यादा नुकसान किसे होगा और लाभ किसे होगा...
एनडीटीवी से दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की खास बातचीतदिल्ली का चुनाव किसी एक चेहरे पर नहीं लड़ा जाएगा। बीजेपी इस चुनाव को सामूहिक नेतृत्व में अपनी विचारधारा और केंद्र सरकार के कामों के आधार पर लड़ेगी। ये कहना है कि दिल्ली प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का।
रवीश की रिपोर्ट : मुस्तफ़ा का मोदी कुर्तामुस्तफ़ा एक-एक कर रंगीन सदरी दिखाने लगे। कहा कि जब से मोदी जी आए हैं, कार्यकर्ताओं की च्वाइस बदल गई है। वे टीवी पर मोदी जी को जिस जैकेट में देखते हैं, उसकी मांग करने लगते हैं।
रवीश कुमार की कलम से : कौशाम्बी से दिल्ली तकअरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसी तरह के आक्षेप से बचने लगे। केजरीवाल के जवाब से लगा कि वे अभी तैयार नहीं है कि मोदी को मुद्दा बनाकर दिल्ली के मुद्दे को बीजेपी के हाथ में जाने दिया जाए।
रवीश कुमार की कलम से : किससे लड़ेगी दिल्ली...?काला धन और भ्रष्टाचार का मुद्दा अब लतीफे में बदल गया है। लोकपाल का जुनून उस शामियाने की तरह उजड़ गया है, जिसके भीतर कुर्सी कहीं से आई थी और लाउडस्पीकर कहीं से। सब अपना-अपना सामान लेकर चले गए हैं।

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'टाइम' ने मंगलयान को 'द सुपरमार्ट स्पेसक्राफ्ट' की संज्ञा दी है। पत्रिका ने कहा, कोई भी मंगल ग्रह पर पहली कोशिश में नहीं पहुंचा।

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