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धार्मिक आधार पर जनसंख्या के आंकड़े : आबादी वृद्धि दर कम होना अच्छा संकेतव्हाट्सऐप पर अफवाह फैलाने वाले गिरोहों के लिए मसाला अच्छा है जिस पर हम चर्चा करने जा रहे हैं। राजनीतिक दलों के लिए ये तो ज़बरदस्त मसाला है ही। प्रधानमंत्री तो हमेशा आबादी को संभावना मानते हैं। खुल कर रैलियों में भी बोलते हैं। इसी आबादी में युवाओं का प्रतिशत बढ़ा है तो वे भारत के लिए संभावनाएं देख पाते हैं।
रवीश कुमार : आवाज़ पटेलों की है, मगर दर्द तो सबका हैखुद पटेल भी मानते हैं कि गुजरात की अन्य जातियों से सामाजिक भेदभाव करने के जो आरोप लगते हैं, उसमें सच्चाई है। अहमदाबाद, सूरत और मेहसाणा के जिन मोहल्लों या इलाकों में हिंसा हुई है, उनकी डिटेल निकालिए...
आखिर आंदोलन पर क्‍यों उतरे पटेल?अहमदाबाद की सड़कों पर सेना की गाड़ियां गुजरात के लिए राहत से पहले किसी अपशकुन की आहट की तरह हैं। 2002 के बाद पहली बार अहमदाबाद की सड़कों पर लौटी सेना की ये तस्वीरें बता रही हैं कि 25 अगस्त से लेकर 26 अगस्त की शाम के बीच गुजरात की पुलिस ने इतना कुछ गंवा दिया है कि अब मामला उससे संभलने वाला नहीं है।
जीत और हार के बाद राजनीति समाप्त नहीं होतीप्रधानमंत्री होते हुए भी नगरपालिका चुनावों में मिली जीत पर ट्वीट करना और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाना, ये नरेंद्र मोदी की राजनीतिक शैली है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के निकाय चुनावों की जीत से उनके ट्वीट का असर ये हुआ कि बीजेपी के बाकी बड़े नेता भी ट्वीट कर अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने लगे।
भारतीय शेयर बाजार में कोहराम, चीन के आर्थिक संकट का असरसोमवार सुबह जब सेंसेक्स खुलते ही 500 अंक के आस पास गिरा तो लोगों को लगा कि इतना तो कई बार गिर चुका है लेकिन जल्दी ही बाज़ार 800 के आंकड़े को पार करते हुए 1000 अंक तक जा गिरा।
चुनाव से पहले अपने आप से हारता बिहार : रवीश कुमारबिहार अपने आप से हारता जा रहा है। चुनाव में दो में से कोई एक गठबंधन तो जीत जाएगा लेकिन इस चुनाव में बिहार की हार तय होने जा रही है। इतना उद्देश्यहीन और हल्का चुनाव कभी नहीं देखा। हर तरफ़ अनैतिक गठबंधन हैं।
दर्द का 'उपहार' : फैसले से मायूस हैं पीड़ितहमारे देश में लापरवाही के कारण ट्रेन सड़क दुर्घटना में लाखों लोग मारे जाते हैं। जांच कमेटी और मुआवज़े का एलान सुनकर हम भूल जाते हैं क्योंकि प्रधानमंत्री रेल मंत्री और मुख्यमंत्री के शोक संदेशों को हमें इंसाफ़ मानने की आदत हो गई है।
क्या पटेल समाज को आरक्षण मिले?राजनीति वो दरिया है जिसकी सतह पर जब धारा शांत लगती है तभी सतह के भीतर की धारा अंगड़ाई ले रही होती है। सबका ध्यान बिहार की चुनावी राजनीति की तरफ है लेकिन गुजरात में एक 22 साल का नौजवान राजनीति की क्षितिज पर उभरता दिखाई दे रहा है।
बिहार के विकास पर सियासत, मोदी का नीतीश पर निशानाविशेष दर्जा और विशेष पैकेज में क्या अंतर है इसे राजनीतिक विद्वान बांचते रहेंगे लेकिन जिन्हें मंच लूटना था वो लूट ले गए। जनता को एक फाइनल फीगर मिल गया है। चौक चौराहे पर लोग सेक्टर के आधार पर हिसाब नहीं लगाएंगे।
संयुक्त अरब अमीरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...दशकों तक दुबई नेपाल की तरह आम हिन्दुस्तानियों के लिए विदेशी सामान का सपना हुआ करता था। बाद में दुबई को हमारी फिल्मों ने उन तत्वों का अड्डा बना दिया जो डॉन बनकर अमावस की रात गोदी पर दुबई से सोना लेकर आते थे या दुबई भाग जाते थे।
ये वो बहस तो नहीं जिसका इंतज़ार था...!लोकसभा की बहस का नतीजा वही निकला जो दो महीने से सदन के बाहर हो रही बहसों से निकल रहा था। यही कि अब राजनीति में आदर्श और नैतिकता को हमेशा के लिए छोड़ देना चाहिए। छोड़ तो दिया ही गया है लेकिन सवालों और जवाबदेही के स्तर पर भी इसकी विदाई हो जानी चाहिए।
आरोप के जवाब में सुषमा के आरोप, क्या सुषमा की सफ़ाई काफ़ी है?स्पीकर सुमित्रा महाजन जी, एक न्यूज़ एंकर होने के नाते आज आपकी पीड़ा को भी समझ रहा था और आपकी चुनौती को भी। मुल्क की निगाहें आपकी तरफ थीं कि कहीं आपसे तराजू का पलड़ा उनकी तरफ तो नहीं झुक रहा है जो कभी आपके अपने थे या उनकी तरफ तो नहीं झुक रहा है जो आपको शक की निगाह से देख रहे होंगे।
हां, मुझे ट्रैफिक जाम अच्छा लगने लगा हैइस लेख को वे न पढ़ें जो ट्रैफिक जाम से त्रस्त हो जाते हैं। इस लेख को वे भी न पढ़ें जो अभी तक यह स्वीकार नहीं कर सकें हैं कि ट्रैफिक जाम शहर नहीं मुल्क की आत्मा है। इस लेख को वे भी न पढ़ें जो ट्रैफिक जाम के कारण रास्ते बदल लेते हैं।
क्या GST बिल जल्द पास हो पाएगा?जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स। वित्त मंत्री ने इस टैक्स के बारे में कहा है कि जिस तरह से देश का राजनीतिक एकीकरण 1947 में हुआ उसी तरह से आर्थिक एकीकरण नहीं हो सका। जीएसटी आने से अप्रत्यक्ष कर प्रणाली एक समान हो जाएगी। टैक्स की उगाही बढ़ेगी और जीडीपी को भी लाभ होगा।
क्‍या मोदी सरकार की चमक फीकी पड़ रही है?तो क्या वाकई मोदी सरकार की चमक फीकी पड़ने लगी है। क्या आलोचक उनके साथ नाइंसाफी कर रहे हैं या वाकई ऐसा कुछ हो रहा है जिस पर प्रधानमंत्री को ध्यान देना चाहिए।
क्या सुषमा स्वराज ने नहीं की ललित मोदी की मदद?अगर आप भी मानते हैं कि राजनीति में आरोपों से मिलने वाला अपयश किसी ग्रह के कारण होता है तब आपको इस्तीफा उस ग्रह से मांगना चाहिए जिसके कारण यह सब हो रहा होता है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा में कहा कि ज़रूर मेरा कोई अपयश का ग्रह चल रहा होगा।
पाक के साथ क्या रुख़ अपनाए भारत?जब तक आतंकवाद का चेहरा नकाब से ढका होता है वो क्रूर तो लगता है लेकिन जब नकाब हटता है तो उससे भी क्रूर हो जाता है क्योंकि तब आप देख पाते हैं कि कैसे फर्ज़ी मज़हबवाद और राष्ट्रवाद के नाम पर नौजवानों को आग में झोंका जा रहा है।
संसद में हंगामा है बरपा, लोकतंत्र पर काला धब्बा कब लगता है...आपके दिमाग़ में उस वक्त क्या तस्वीर बनती है, जब नेता कहते हैं कि फलां कार्यवाही लोकतंत्र पर काला धब्बा है। लोकतंत्र का काला धब्बा किसे कहते हैं और यह कब और कैसे लगता है।
क्या संसद में लगातार विरोध विपक्ष में आत्मविश्वास की कमी दर्शाता है?मौजूदा विरोध बताता है कि आत्मविश्वास की कमी है। यह सही है कि ऐसी ही उम्मीद सरकार की तरफ से की जानी चाहिए। संसद चले और प्रधानमंत्री को काम करने का मौका मिले। देखें तो कि वे क्या काम करना चाहते हैं।
विश्वविद्यालयों में 'लेफ्ट-राइट', छात्रों के लिए कोई फोरम नहींचुनावी राजनीति में अगर कोई तरीके से उल्लू बनता है तो वो है हमारा युवा। पहले उसे नारेबाज़ी के लायक बनाया जाता है फिर उसके भीतर निष्ठा बनाई जाती है फिर उसे झंडा लहराने के काम में लगा दिया जाता है।

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