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लोकतंत्र का जरूरी तत्‍व होता है नेता, इसकी रक्षा जरूरी हैबिहार बीजेपी उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की हत्या को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह इस मामले की तह तक जांच करायें। दिखावे के लिए नहीं बल्कि स्थापित करने के लिए राजनेता किसी भी दल का हो उसकी हत्या लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक आहट है।
आइये हम सब बकरी बन जायेंबकरियां अपराध कर सकती हैं इस बारे में हमारे कानून निर्माताओं ने क्यों नहीं सोचा। मेरी राय में उन सबको ऐसा न सोचने के ज़ुर्म में जेल भेज देना चाहिए। कोरिया की बकरी के चरने के अधिकार का जो हनन हुआ है, उसकी रक्षा में हम सबको बकरी बन जाना चाहिए।
मिलिए 9 करोड़ की कार से, जिसके सामने आग और AK47 भी है बेअसर, पंचर होकर भी चलती हैइस कार के दरवाजे पर एके47 से गोलियों की बौछारें कर दी जाएं तब भी एक गोली पार नहीं जा सकेगी। शीशे पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर बंदूक ख़ाली हो जाएगी मगर कांच में छेद तक नहीं हो सकेगा।
प्राइम टाइम इंट्रो : बेंगलुरु में सामने आया भीड़ में बसा नस्ली रंगभेद का मानसिक रोगरोड रेज, मतलब दुर्घटना से लोग गुस्सा गए और जो भी मिला उसे पीट दिया या सामने वाले को पीटकर अपना गुस्सा शांत कर लिया। वैसे यह भी एक किस्म का मानसिक रोग है जैसे नस्लभेद एक रोग है। हमारे भीतर किसी रूप में हिंसा होती है जो ऐसे मौकों पर बाहर आ जाती है। कई लोग खूनी बन जाते हैं।
एक खत : दिल्ली तुम दिल्ली बन जाओ, फिर से धड़कने लगो तुम ...दिल्ली तुम दिल्ली बन जाओ, तुम फिर से धड़कने लगो। तुम मुझे धड़का दो, तुम उसे धड़का दो। हमारे लिए तुम ज़िंदा हो जाओ, हमें तुम ज़िंदा कर दो। हम, जिसे सियासत ने मुर्दा में बदल दिया है लेकिन हमारे जी उठने से पहले तुम दिल्ली बन जाओ। हम दिल्ली के लिए जागना चाहते हैं। दिल्ली के लिए जीना चाहते हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : एमसीडी और दिल्ली सरकार में ठनीआठ दिनों से एमसीडी में हड़ताल है। आठ दिनों से हम यही सुन रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने पैसा नहीं दिया, तो एमसीडी को बीजेपी ने कंगाल बना दिया। दोनों पक्ष अपना-अपना तथ्य दे रहे हैं, लेकिन कोई मुकम्मल तस्वीर नहीं बन पा रही है, जिससे पता चले कि दोषी कौन है।
प्राइम टाइम इंट्रो : जम्मू-कश्मीर की कुर्सी का किस्साख़ाली कुर्सी है और दावेदारों का पता नहीं। राजनीति में ऐसा कम होता है मगर होता है। जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री बनने के लिए न तो कोई किसी के घर जा रहा है। न कोई किसी को तोड़ रहा है। न कोई हितों के हित में अपने आप फूट रहा है। 6 साल के लिए जम्मू कश्मीर में सरकार चुनी जाती है।
प्राइम टाइम इंट्रो : 112 हस्तियों को इस साल पद्म सम्मान, बधाई...पद्म पुरस्कारों की कई खूबियों में एक प्रचलित खूबी यह भी है कि इन नामों को इस तरह से भी पढ़ा जाता है कि कौन-कौन सरकार के करीब रहा है, कौन-कौन सरकार की विचारधारा के अनुकूल योगदान करता रहा है। ये हर सरकार और हर पद्म पुरस्कार के समय होता रहा है।
प्राइम टाइम इंट्रो : क्‍या पीएम का इतना बोलना काफ़ी था?प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ नारे लगाने वाले छात्र तो बाहर निकाल दिए गए लेकिन प्रधानमंत्री ने भी उन नारों पर कुछ नहीं बोला। कुछ छात्रों की नारेबाज़ी सामान्य घटना नहीं है खासकर प्रधानमंत्री की सभा का बंदोबस्त काफी चाकचौबंद होता है। नारेबाज़ी करने वाले छात्रों ने भी जोखिम की परवाह नहीं की।
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में जब कुछ गड़बड़ नहीं तो सारे तथ्य सार्वजनिक करने में क्या हर्ज?हमारी संस्थाएं किस कदर लचर हो गई हैं और उनमें एक घटना को संभालने और उसके सारे तथ्यों को सार्वजनिक करने के साहस की इतनी कमी है कि मामले का राजनीतिक होना उनके लिए भी ढाल का काम कर जाती है। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी चार दिन से अगर सारे तथ्यों को एक साथ सार्वजनिक रूप से रख देती तो क्या हो जाता।
प्राइम टाइम इंट्रो : दलित छात्र की खुदकुशी पर स्मृति ईरानी की सफाईप्रेस कांफ्रेंस में स्मृति ईरानी ने जिस आक्रामकता और मजबूती से अपना पक्ष रखा उससे लगा तो नहीं कि उनके साथ बाकी मंत्रियों की मौजूदगी भी जरूरी थी। खैर यह सरकार का फैसला रहा होगा। शायद अन्य मंत्रियों की मौजूदगी से सरकार यह जाहिर करना चाहती होगी कि वह रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में बेहद गंभीर है।
प्राइम टाइम इंट्रो : मुद्दा हैदराबाद विश्वविद्यालय का, सवाल दलों के राजनीति करने के पैमाने काक्या हमारे राजनीतिक दलों ने कोई ऐसा पैमाना बनाया है कि किसी मुद्दे पर कब राजनीति होनी चाहिए और कब नहीं। अगर नहीं बनाया है तो फिर वे किस लिहाज़ से अपनी सुविधा के हिसाब से लेक्चर देने लगते हैं कि इस पर राजनीति हो रही है उस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
प्राइम टाइम इंट्रो : क्या सामंतवाद से बाहर निकल पाएंगे हमारे उच्च शिक्षण संस्थान?हमारी संस्थाओं की सजाएं सामंतवादी और जातिवादी सोच से क्यों मिलती-जुलती हैं। गांव से निकाल देना, कुएं से पानी नहीं पीने देना और होस्टल से निकाल देना। यह सजा है या सजा के नाम पर उसी मानसिकता की निरंतरता। हम हैदराबाद यूनिवर्सिटी के एक दलित छात्र की आत्महत्या की बात कर रहे हैं।
प्राइम टाइम इंट्रो : असमानता की खाई - एक तरफ 62,  दूसरी तरफ साढ़े तीन अरबअगर हम आपको यह बताएं कि दुनिया में 62 ऐसे लोग हैं जिनके पास इतनी दौलत है जितनी इस धरती पर मौजूद आबादी के आधे सबसे गरीब लोगों के पास भी नहीं है तो आपको आश्चर्य होगा या आप यह कहेंगे कि कौन सी नई बात है? तो क्या आप यह नहीं पूछेंगे कि विकास और तरक्की के दावे सिर्फ कुछ लोगों को अमीर बनाने के लिए हैं?
प्राइम टाइम इंट्रो : स्वप्रेरणा से ऑड-ईवन फॉर्मूला जारी रखने के लिए अब दिल्ली वासियों की परीक्षा16 जनवरी से दिल्ली वालों की एक दूसरी परीक्षा होने जा रही है। अगर 15 दिनों तक दिल्ली के लोगों ने जुर्माने के डर के बिना इस योजना में सहयोग किया तो क्या वे आगे जारी रखेंगे। क्या वे तब भी ऑड-ईवन का पालन करेंगे जब यह लागू नहीं होगा। जनभागीदारी का असली स्वरूप तो अब सामने आएगा।
प्राइम टाइम इंट्रो : भारत-पाक के बनते-बिगड़ते रिश्तेमुलाकात पर कितनी बात हो जाती है लेकिन बात के लिए मुलाकात न हो इसके लिए बात बंद हो जाती है या टल जाती है। 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी लाहौर गए तो मेरे सहित ज़्यादातर ने कहा कि ऐतिहासिक कदम है और साहसिक भी।
हमारे देश में महापुरुषों को भूलने की प्रथा समाप्त हो गई है…सोशल मीडिया के कारण सब एक दूसरे के आदरणीय वैचारिक महापुरुषों की जयंतियां मनाने लगे हैं। ट्वीट करने में क्या जाता है, सो कर देते हैं। वैसे, उनके आदर्शों पर आज की राजनीति किस तरह चल रही है, बताने की ज़रूरत नहीं, लेकिन हर दिन की यह होड़ पका देने वाली हो गई है।
क्या शहादत के सम्मान का यही तरीका है?लेफ़्टिनेंट कर्नल सहित सात जवान शहीद हुए हैं। एक कृतज्ञ राष्ट्र को क्या करना चाहिए? क्या उसे चुप रहकर शोक जताना चाहिए या बोलने के नाम पर चैनलों पर बोलने की असभ्यता के हर चरम को छू लेना चाहिए? क्या आपको ऐसा होता हुआ दिख रहा है?
दुर्भावनाग्रस्त शुभकामनाओं से कोई बचाए मुझे...नववर्षागमन की पूर्व संध्या की बेला पर लिखने के लिए नया कुछ नहीं है। सारी बातें कही और लिखी जा चुकी हैं। लोग इस कदर बोर हो चुके हैं कि शुभकामनाओं की रिसाइक्लिंग करने लगे हैं।
केंद्र ने अफसरों के निलंबन को ठहराया 'अवैध' | LG के इशारे पर सरकार के ख़िलाफ़ साजिश : जैनदिल्ली सरकार द्वारा दो विशेष सचिव स्‍तरीय अधिकारियों को सस्पेंड किए जाने के कदम को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गलत ठहराया है। केंद्र अब इस मामले में दिल्‍ली सरकार को अपना रुख बताएगा।

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