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प्रदूषण सर्टिफिकेट की अंतिम तारीख़ याद दिलाने का दिल्ली के एक स्कूल का नायाब आइडिया - रवीश कुमारहमारे पेशे की ख़ूबी है कि आप हर दिन कुछ होते हुए और कुछ न होते हुए किस्सों से टकराते रहते हैं। यही वे किस्से हैं, जो आपको इस पेशे में होने का अहसास कराते रहते हैं।
अर्थव्यवस्था का 'इंडिया इंडिया' गान, अगर ऐसा है तो चलो हम सब झूमें, नाचे और गाएं - रवीश कुमारएक प्रतिशत के अंतर से भारत और चीन की आर्थिक दुनिया कितनी बदल जाएगी, यह समझना मेरे लिए मुश्किल तो नहीं है, पर मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि क्यों यह बड़ी बात नहीं है।
मीडिया में अंबेडकर जयंती की कवरेज़ क्यों नहीं है - रवीश कुमारअंबेडकर जयंती के दिन के उत्सवों को हमारे राजनीतिक दल हाई जैक कर लेते हैं। उनके बयान और दावों के बीच ही बाबा साहब की प्रासंगिकता का विवेचन होकर रह जाता है।
प्राइम टाइम इंट्रो : वायु प्रदूषण पर लगाम की तैयारी, पुरानी डीजल कारों पर लगेगी रोकहम आप शादी ब्याह में जाते हैं, शामियाने के गेट पर या पीछे जनरेटर भड़भड़ा रहा होता है, दफ्तर, बाज़ार, अस्पताल, हर जगह इस जनरेटर ने बिजली विरोधी मोर्चा संभाल लिया है। बिजली गई नहीं कि जनरेटर ज़िंदाबाद हो जाता है। ये वाकई ज़िंदाबाद है या ज़िंदाबाद के नाम पर हम सबका मुर्दाबाद।
प्रधानमंत्री जी क्या आप मिसेज लगड़ को जानते हैं - रवीश कुमारमिसेज लगड़ अपना मकसद नहीं भूलीं। हमारी सोसायटी में वो अकेली रहती हैं फिर भी एनडीटीवी के दफ्तर गईं। कई बार फोन भी किया क्योंकि वे मुझे तकलीफ नहीं देना चाहती थीं। वहां से जो पता चला उसके हिसाब से अपने मकसद पर काम करने लगीं।
क्यों कहा प्रधानमंत्री ने कि नोट छापने का काग़ज़ भी भारत में बनेभारतीय रिज़र्व बैंक के अस्सी साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में ही करेंसी नोट की छपाई की बात कही। इस बात पर शायद ही किसी का ध्यान गया, लेकिन मुझे थोड़ी सुखद हैरानी हुई। प्रधानमंत्री की यह बात हल्की नहीं है।
ईमानदार की दुकानदारी- रवीश कुमारईमानदार कौन है। हम सब ईमानदारी को लेकर दोहरेपन के शिकार होते हैं। ईमानदारी की बात करते करते अपने अपने पैमाने और चश्मे का इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन जो ईमानदार होता है उसके पास एक ही चश्मा होता है। उसके पास दुविधा नहीं होती है।
नया दौर से बीआरटी तक, हारना बस को ही है - रवीश कुमारदिल्ली से बीआरटी की विदाई तय सी हो गई है। खानपुर से मूलचंद के बीच बना बीआरटी कोरिडोर जब से अस्तित्व में आया है, विरोध ही हो रहा है। छह किमी से भी कम दूरी के इस गलियारे को जाना तो कश्मीरी गेट तक था मगर वहां तक गलियारा गया ही नहीं। जब भी विरोध उठा इस मांग के साथ इसे खत्म किया जाए।
प्राइम टाइम इंट्रो : बीजेपी के दावे में कितना दम?अक्सर हम सदस्यता अभियानों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं पर इस मिस्ड कॉल अभियान का शुक्रिया कि इसी बहाने इस पर बात करने का मौका आया।
स्वराज, अहिंसा और गांधी का अकेलापन - रवीश कुमारकांग्रेस ने गांधी को छोड़ दिया था। उसके बाद से एक-एक कर हर दल ने गांधी को छोड़ दिया। उन्होंने भी जो गांधी की बातों को लेकर कांग्रेस को कोसते हैं। उन्हें अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए कि क्या वाकई उनके भीतर कोई गांधी बचा है...
हीरो पेन वाला मेरी ज़िंदगी का हीरो चला गया- रवीश कुमारहीरो पेन। हमारे हाथों का चीन से रिश्ता इसी कलम से बना था। जयंतो कर्माकर के पास ही इस कलम को देखा था। कलम की नीब को अपनी उंगलियों से बराबर जकड़ कर वो ऐसे लिखता था, जैसे लिखावट इतरा रही हो।
आपको बेहतर प्रेमी बना सकती है 'बेदाद-ए-इश्क़ : रूदाद-ए-शादी'इस किताब को पढ़ना प्रेम विवाहों के तमाम उतार चढ़ावों से गुज़रने जैसा है। जहां पहली बार मिलना और प्रपोज़ करने की रूमानियत की जगह ज़िंदगी का वह चेहरा नज़र आने लगता है, जो एक बार डरा भी देता है कि कलेजा नहीं है तो इश्क़ मत कीजिए।
भारत की बदनामी से किसे डर लगता है?निर्भया पर बनी डाक्यूमेंट्री का मकसद पूरा हो चुका है। हर डाक्यूमेंट्री की कोशिश होती है कि लोग उस पर बात करें। उसके बहाने मूल विषय की ओर लौटें। यहां तो बिना देखे ही कई लोगों ने अलग-अलग तरीके से इसे देख लिया और कई एंगल से लेख तक लिख डाले।
अरविंद और मेरे बीच कोई अहम नहीं है, इसे व्यक्तिगत मुद्दा न समझा जाए : योगेंद्र यादवआम आदमी पार्टी में आई दरार और पार्टी के दिल्ली सचिव दिलीप पांडे द्वारा योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पर पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाने के बीच योगेंद्र यादव ने साफ किया उन्होंने कभी अरविंद केजरीवाल को हटाने की मांग नहीं की।
रवीश कुमार की कलम से : क्या अब अलग हो चुके हैं अरविंद और योगेंद्र?रात भर की बारिश के साथ आम आदमी पार्टी के भीतर इतना कुछ भीग गया कि सुबह के बयानों ने सूखी ज़मीन की तमाम संभावनाओं को समाप्त कर दिया था। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण अचानक खलनायक की तरह पेश किए जाने लगे जो अरविंद केजरीवाल को पार्टी के संयोजक पद से हटाना चाहते हैं।
रवीश कुमार : लोकतंत्र के दुर्लभ पदयात्रीरामलीला मैदान का क्षेत्रफल एक लाख साठ हज़ार वर्गफुट है। एक आदमी पालथी मारकर बैठता है तो चार फुट जगह लेता है इस हिसाब से रामलीला मैदान में अगर लोग बिठाए जाएं तो चालीस हज़ार से ज्यादा आ ही नहीं सकते। कुर्सियां लगाएंगे तो पैंतीस हज़ार से ज्यादा लोग नहीं आ सकते।
रवीश कुमार : मोदी के सूट की नीलामी पर राजनीतिकाश सूट के बहाने सार्वजनिक जीवन में मौजूद हमारे नेताओं के पहनावे और उनकी कीमत पर खुलकर चर्चा हो जाती। तब आपको प्रधानमंत्री के सूट के बहाने पता चल जाता कि दूसरे नेताओं के सूट और शॉल कितने महंगे हैं।
रवीश कुमार की नजर से : नीलाम सूट के बहाने दाग़ से मुक्ति की कामनाजिस समय प्रधानमंत्री बेंगलुरु में बेहद सादे लिबास में सेना के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे ठीक उसी समय के आस-पास उनके गृह राज्य सूरत में उस सूट की नीलामी शुरू हो गई, जिसे लेकर इन दिनों खूब राजनीतिक विवाद हुए।
रवीश कुमार : ऑनलाइन शॉपिंग की कामयाबी का अंधेराशायद मेरा सवाल और चुभ गया। कहने लगे कि ऑनलाइन ने हम रिटेल वालों को मार दिया है। पिछले साल ही चालीस परसेंट का नुकसान हो गया था।
लघु प्रेम कथाओं, यानि 'लप्रेक' पर रवीश कुमार ने की दिल की बात'लप्रेक', यानि लघु प्रेम कथाओं पर आधारित रवीश कुमार की पहली किताब 'इश्क में शहर होना' बाजार में है। बहुत-से प्रशंसक इसे लेकर रवीश से बात करना चाहते थे, सो, उन्होंने NDTVKhabar.com के Facebook पेज के जरिये अपने प्रशंसकों से लाइव चैट की।

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