आप यहां हैं : होम » विषय »Ravish Kumar »

'Ravish kumar' - 953 video result(s)

'Ravish kumar' - 172 news result(s)

मीडिया की भूमिका छोड़िये, मैं अपनी भूमिका से खुश नहीं- रवीश कुमारएनडीटीवी इंडिया ने गुरुवार को अपनी विशेष पेशकश में, अपने फेसबुक पेज पर एक लाइव चैट आयोजित की। इस लाइव चैट में हमने,विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यमों जैसे ट्विटर, फेसबुक और गूगल प्लस पर जुड़े हमारे पाठकों और टेलीविज़न के दर्शकों की बातचीत करायी सीधे-सीधे रवीश कुमार से।
छा गए रवीश कुमार... नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा पर भी भारी पड़ेखास बात यह है कि ऐसा शायद पहली बार है कि एक ही इंटरव्यू दो अलग-अलग हैशटैग के साथ इतना चर्चा में आया है कि ट्रेंड कर रहा है। ये हैशटैग हैं - #RavishAsksBedi और #SuperJournalistRavish
किरण बेदी जी, काश कुछ और वक्त मिल पाता : रवीश कुमारइस ब्लॉग में वह खुद बात कर रहे हैं, बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी के साथ किए उस इंटरव्यू के बारे में, जो ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।
'टफ कॉप' से रवीश कुमार के टफ सवाल : दिल्ली के दंगल में किरण बेदी की दावेदारीदिल्ली में बीजेपी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने बुधवार को एनडीटीवी के रवीश कुमार के साथ बातचीत में कहा कि अगर जरूरत महसूस हुई तो पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए और कानून बनाए जाएंगे।
क्या किरण और केजरीवाल में बहस होनी चाहिए?केजरीवाल ने ट्वीट कर किरण बेदी से कहा है कि मैं किरण बेदी को बहस के लिए चुनौती देता हूं जिसे कोई तटस्थ संचालित करे और सभी टीवी चैनल दिखायें।
रवीश कुमार की कलम से : धर्म के आदर के नाम परधर्म का आदर करो का मतलब धर्म से डरो हो गया है। दूसरे अन्य विचारों की तरह धर्म की भी आलोचना होनी चाहिए, व्यंग्य होना चाहिए और हां, बिना डरे अनादर भी।
रवीश कुमार की कलम से : चाय की चर्चा वाया कोलकाताचाय की दुकान में आक्सीजन सिलेंडर जैसा पात्र देख मेरी नज़र ठहर गई। दुकानदार राजेश शुक्ला ने बताया कि ये अंग्रेज़ों का सिस्टम है। वो चले गए लेकिन चाय पीने का ये स्टाइल भारत में रह गया। अंग्रेज़ दूध वाली चाय नहीं पीते थे। लिकर ( सिर्फ पत्ती वाली चाय) ही पीते थे। सिलेंडर में खौलता पानी है।
रवीश की कलम से : बांग्ला फ़िल्म 'व्योमकेश फिरे ऐलो' की समीक्षा'व्योमकेश फिरे ऐलो' एक बेहतरीन फ़िल्म है। कहानी कहने और पकड़कर रखने में बांग्ला फ़िल्मों का क्राफ्ट मुंबइया फ़िल्मों से कहीं ज़्यादा चुस्त है।
रवीश कुमार की कलम से : स्व, सेल्फ़ और बाबागिरी का दौरसंवाद भी उपभोग ही है। संवाद के उपभोग से कचरा पैदा हो रहा है। हम कचरे को संवाद बनाकर फैला रहे हैं। कुछ भी लिख रहे हैं और कुछ भी पढ़ रहे हैं।
रवीश कुमार की कलम से : सरकार में घाटी और जम्मू साथ आएंमहाराष्ट्र के बाद जम्मू-कश्मीर में बीजेपी का मिशन फेल रहा है। यह भी कह सकते हैं कि पूरा नहीं हुआ। श्रीनगर में हुई प्रधानमंत्री की रैली को बीजेपी ऐतिहासिक बता रही थी, लेकिन भीड़ हमेशा जीत नहीं बताती। घाटी में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला।
रवीश कुमार की कलम से : टीवी की जगह ट्रेन से गुज़रते हुएख़बरों की दुनिया में चुनावी नतीजे के दिन कवरेज करने के मौक़े को देवता का वरदान माना जाता है। मैं बहुत आराम से उस कथित वरदान से वंचित ट्रेन के दस घंटे लेट होने के बाद भी समभाव से बैठा उन तस्वीरों को देख रहा हूं, जो कभी टीवी पर नहीं आते हैं।
रवीश कुमार की कलम से : रेल की पटरी और कचरे का अभियानहम कचरा अपने बैग में लेकर चलते हैं और दुनिया को उपदेश देते हैं कि यहां-वहां मत फेंकिये। प्लास्टिक के ये समान जब तक दुकानों, कोच और हमारे बैग में है, तब भी वे कचरा ही हैं।
रवीश कुमार की कलम से : बख्तरबंद स्कूल में आपका बच्चाक्या आप ऐसे किसी स्कूल की कल्पना करना चाहेंगे, जहां आपके बच्चे को गेट पर मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़े, क्लासरूम में जाने से पहले उसके बैग की सुरक्षा जांच हो, प्रार्थना के बाद आतंकवाद से बचने के लिए सुरक्षा ड्रील हो, चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हों...
लखवी पर क्यों नहीं हो रही सख्ती?जैसे ही खबर आई कि पाकिस्तान की आंतकवाद विरोधी अदालत ने मुंबई हमले के आरोपी लखवी को ज़मानत पर छोड़ दिया है, भारत में हंगामा मच गया और आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दोहरेपन पर हमला शुरू हो गया।
रवीश की कलम से : संयुक्त राष्ट्र में गांधी के बाद अब योगयोग एक विचार प्रणाली है। आज जिस तरह से धर्म का एक संगठित रूप बना है और उस संगठित रूप की पहचान राजनीति तरीके से होने लगी है, योग इसमें फिट नहीं बैठता है। वर्ना योग भी कर्मकांडों से भरा रहता। मगर यह खुद से साक्षात्कार का ज़रिया है।
रवीश कुमार की कलम से : धर्मांतरण पर सरकार का रुख?लोकसभा में आगरा में हुए कथित धर्मांतरण के मसले पर विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर विकास के एजेंडे को छोड़ संघ के एजेंडे पर चलने का आरोप लगया। जवाब में वेंकैया नायडू ने इस मसले पर विपक्ष और सरकार दोनों को अच्छे से संभाला।
रवीश कुमार की कलम से : नोबल पुरस्कार इतना शानदार कभी होगा?आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में तालियों की गड़गड़ाहट ने कुछ ऐसा कहा कि मैंने आखिरी वक्त में प्राइम टाइम का अपना विषय बदल दिया। इन तालियों की ऊर्जा हिन्दुस्तान और पाकिस्तान दोनों मुल्कों को छू रही थीं। तरोताज़ा कर रही थीं।
टैक्सी में रेप के मुद्दे की गूंजपांच दिसंबर को उबर की टैक्सी में हुई बलात्कार की घटना के बाद समाज और सिस्टम ठीक वैसे ही जागा है जैसे 16 दिसंबर 2012 की घटना के बाद जागा था। तब कड़े कानून की कमी का पता लगा था, जिसे रिकॉर्ड समय में दुरुस्त कर दिया गया, लेकिन अब जीपीएस, सीसीटीवी वेरिफिकेशन और लाइसेंस देने में लापरवाही जैसी कमियों की पहचान हो रही है।
आदर्श ग्राम योजना की हक़ीक़तआदर्श ग्राम योजना के शुरू होते ही खबर आने लगी कि किसी नेता ने अपनी जाति की बहुलता वाले गांव का चयन किया है तो किसी ने उस गांव का चयन किया, जिसमें एक भी मुसलमान नहीं है।
रवीश कुमार की कलम से : मोबाइल के लिए पटरी के नीचेसेल्फी और मोबाइल के लिए प्लीज़ ऐसा मत कीजिये। मेरे साथ सेल्फी खिंचाने के लिए किसी को चोट भी लग जाए तो मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाता, लेकिन मोबाइल के लिए बोगी के नीचे चले जाने के जुनून ने तो सारी हदें पार कर दीं।

Ravish kumar से जुड़े अन्य समाचार »

Advertisement

Advertisement