NDTV Khabar
होम | ब्लॉग |   अखिलेश शर्मा 

अखिलेश शर्मा

पत्रकारिता में पिछले 24 साल से सक्रिय अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक और प्राइम टाइम एंकर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, संसदीय लोकतंत्र, राजनीतिक अर्थव्यवस्था तथा दलीय राजनीति से जुड़े विषयों में उनकी गहन दिलचस्पी है। पिछले डेढ़ दशक से बीजेपी से जुड़ी ख़बरें कवर कर रहे हैं।

  • एक सवाल देश में कई लोगों को बेहद परेशान कर रहा है. बालाकोट हमले में कितने आतंकवादी मारे गए? सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह संख्या तीन सौ है तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कम से कम ढाई सौ आतंकवादियों के मरने की बात कही. कृषि मंत्री राधामोहन सिंह कह रहे हैं कि चार सौ आतंकवादी मारे गए. एक बात बिल्कुल साफ है. किसी भी ऑपरेशन की कामयाबी की पुष्टि तीन जरियों से ही हो सकती है. या तो वायुसेना कहे कि हमला सही निशाने पर किया गया. दूसरा जमीनी खुफिया जानकारी बताए कि हमला कितना कामयाब रहा और तीसरा जरिया तकनीक से जुटाई जानकारी, जिसमें निशाने पर हमले से पहले मौजूद लोगों की संख्या का आकलन हो ताकि हमले में उनके मरने की पुष्टि हो सके.
  • पुलवामा के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में भारत को कामयाबी मिलती नजर आ रही है. न्यूजीलैंड की संसद ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा में एक प्रस्ताव पारित किया है. संसद में निंदा प्रस्ताव पारित करने वाला न्यूजीलैंड पहला देश बन गया है.
  • सोचिए अगर इस आम चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिले. किसी गठबंधन को भी न मिले. त्रिशंकु संसद की हालत में क्या होगा? यह एक ऐसा सवाल है जो बार-बार पूछा जा रहा है. इसका एक जवाब यह भी है कि ऐसे हालात में राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी या फिर चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं. ऐसा पहले भी हुआ है. हम यह बात इसलिए उठा रहे हैं कि चुनाव नजदीक आते ही बीजेपी ने न सिर्फ अपना कुनबा बढ़ाना शुरू कर दिया है.
  • मुलायम सिंह यादव ने वह कह दिया जो कोई सोच भी नहीं सकता था. उन्होंने कह दिया कि वे चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनें. मुलायम ने यह बात सोलहवीं लोकसभा के विदाई भाषण में कही. एक ऐसी बात जो बीजेपी नेताओं के कानों में मधुर सुर की तरह गूंजी तो, वहीं विपक्ष के कानों में कर्कश राग की तरह. यह ऐसी बात है जो सपा-बसपा गठबंधन से तगड़ी चुनौती झेल रही बीजेपी उत्तर प्रदेश में एक ब्रहास्त्र की तरह इस्तेमाल कर सकती है. खासतौर से उन यादव मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए जिन पर शिवपाल सिंह यादव पहले से ही डोरे डालने को तैयार बैठे हैं. मुलायम के बयान के राजनीतिक निहितार्थ के बारे में आगे बात करेंगे, लेकिन पहले आइए सुन लेते हैं उन्होंने क्या क्या कहा.
  • क्या ममता बनर्जी के बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए दूसरे राज्यों और विपक्षी पार्टियों के नेताओं के लिए नो एंट्री है? यह सवाल इसलिए क्योंकि एक के बाद एक बीजेपी के नेताओं के या तो हैलीकॉप्टर को बंगाल में लैंड करने की अनुमति नहीं दी जा रही है या फिर सभाएं करने के लिए मैदान नहीं दिए जा रहे हैं.
  • 'उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक, वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.' वैसे रौनक तब आती है जब बीमार का दीदार रौनक लाने वाले शख्स से हो. लेकिन बीमार से कोई ऐसा शख्स मिल ले जो उसका तनाव और बढ़ा दे तो बात बिगड़ भी जाती है. बात हो रही है गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं.
  • लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने एक बड़ा चुनावी वादा किया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनी तो देश के सभी गरीबों को न्यूनतम आमदनी की गारंटी दी जाएगी. उन्होंने यह ऐलान छत्तीसगढ़ में किया.
  • अगर आज चुनाव हों तो बीजेपी का अबकी बार फिर एक बार मोदी सरकार का नारा नाकाम होगा या सफल, जानिए क्या कहते हैं ओपिनियन पोल.
  • अभी एक महीना ही हुआ जब धूमधाम से पंद्रह साल बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. एमपी कमल के हाथ से निकलकर कमलनाथ के हाथों में चला गया. लेकिन सिर्फ एक महीने में ही वहां से ऐसी गजब-गजब खबरें सामने आ रही हैं कि सब पूछने लगे हैं कि आखिर एमपी में हो क्या रहा है?
  • वैसे तो ममता बनर्जी बहुत पहले ही पीएम पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर चुकी थीं लेकिन इसकी विधिवत शुरुआत उन्होंने शनिवार को की. कोलकाता के परेड मैदान में एक बड़ी रैली कर उन्होंने अपनी ताकत दिखाई. उन्होंने यह भी दिखाया कि उनके बुलावे पर विपक्ष के वे तमाम नेता एक मंच पर आ सकते हैं जो त्रिशंकु संसद में सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
  • एक फरवरी को मोदी सरकार अपना अंतिम बजट पेश करेगी. चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले आने वाला यह बजट अंतरिम होगा. यानी परंपरा के मुताबिक सरकार इसके जरिए चुनाव होकर नई सरकार बनने तक तीन महीनों के लिए होने वाले खर्च का इंतजाम करेगी. परंपरा यह भी है कि जाती हुई सरकार कोई बड़ा नीतिगत ऐलान इस अंतरिम बजट में नहीं करती है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या मोदी सरकार परंपरा को ताक पर रखकर इस अंतरिम बजट या वोट ऑन अकाउंट में आने वाले चुनावों के मद्देनजर बड़े ऐलान कर सकती है, ताकि वोटरों को लुभाया जा सके? कुछ ऐसे ऐलान हैं जिनका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है. सरकार के भीतर इन्हें लेकर चर्चा भी है.
  • ऐसा लगता है कि बीजेपी का मिशन कर्नाटक सिरे नहीं चढ़ सका है. ऑपरेशन लोटस पार्ट-टू में बीजेपी को फिलहाल कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है. बीजेपी की कोशिश थी कि कांग्रेस के कम से कम 13 विधायक इस्तीफा दें, ताकि बहुमत का आंकड़ा कम हो और बीजेपी दो निर्दलीयों की मदद से बहुमत साबित कर सके. कहा जा रहा था कि मुंबई में एक पांच सितारा होटल में रुके कांग्रेस के नाराज तीन विधायक इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन देर रात तक ऐसा नहीं हुआ. उधर कांग्रेस के गायब पांच विधायकों में से दो वापस आ गए हैं.
  • वैसे तो कहा जा रहा है कि 2019 का चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी होने जा रहा है. इन दोनों शख्सियतों की एक लड़ाई डिजिटल दुनिया में चल रही है जिसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के नेताओं और सांसदों की नींद उड़ा दी है. दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर जनता से नमो ऐप के जरिए बीजेपी सांसदों के कामकाज के बारे में राय मांगी है. खबर है कि बीजेपी बड़ी संख्या में मौजूदा सांसदों के टिकट काटेगी. ऐसे में माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट मिलेगा या नहीं, इसमें इस फीडबैक की एक बड़ी भूमिका होगी.
  • सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरियों और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में दस फीसदी आरक्षण देने के संविधान संशोधन बिल को लेकर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस का कहना है कि सरकार इस बिल को जल्दबाजी में लाई लिहाजा इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी को भेजा जाए.
  • मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के वोट बैंक को लुभाने की एक और कोशिश की है. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने निचली अदालतों में जजों की नियुक्ति में एससी और एसटी वर्ग को आरक्षण देने की बात कही है.
  • क्या सरकार सोशल मीडिया पर घेराबंदी की तैयारी कर रही है? यह सवाल इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अफ़वाहों और फर्जी खबरों को रोकने के लिए सरकार ने इन कंपनियों के साथ न सिर्फ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है बल्कि पुराने नियमों को बदलने के लिए नए नियमों का खाका भी उनके साथ साझा किया है.
  • अब तक हर ओपीनियन पोल, हर राजनीतिक विश्लेषक यही कह रहा है कि राजस्थान हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा को कायम रखते हुए कांग्रेस को सत्ता सौंपने जा रहा है. लेकिन क्या राजस्थान में हवा का रुख बदल सकता है? यह सवाल इसलिए क्योंकि कांग्रेस के भीतर टिकटों के गलत बंटवारे और प्रदेश नेतृत्व में तीखे मतभेदों को देखते हुए बीजेपी ने अब पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है. बीजेपी को अब अपनी संभावनाएं नजर आने लगी हैं. अब तक प्रधानमंत्री मोदी छह सभाएं कर चुके हैं. वे नागौर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, कोटा और अलवर जा चुके हैं. उनकी सभाओं में आई भीड़ और लोगों के उत्साह को देखते हुए बीजेपी ने अब उनकी और ज्यादा सभाएं कराने का फैसला किया है. वे पांच से छह और सभाएं कर सकते हैं. इनमें जोधपुर, हनुमानगढ़ सीकर और जयपुर पहले से ही तय है.
  • आम चुनावों से पहले राज्य के 30 फीसदी मराठाओं को लुभाने के लिए महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने एक बड़ा दांव चला है. इन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 16 फीसदी आरक्षण देने का बिल आज महाराष्ट्र विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. यह मौजूदा 52 फीसदी आरक्षण से अलग होगा यानी राज्य में अब आरक्षण बढ़ कर 68 फीसदी हो जाएगा.
  • मध्यप्रदेश में तय हो गया कि अगले पांच साल किसका राज रहेगा- महाराज का या फिर शिवराज का. लोगों की पसंद ईवीएम में कैद हो गई है. पूरे राज्य में लोगों में मतदान के प्रति खासा उत्साह देखने को मिला. हालांकि सुबह मतदान की रफ्तार धीमी थी लेकिन दोपहर होते होते लोगों में जोश आया. कई जगहों से ईवीएम और वीवीपैट मशीनें खराब होने की शिकायतें आईं.
  • क्या केंद्र सरकार सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाने के लिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक पर दबाव डाल रही थी? क्या केंद्र की ओर से राज्यपाल को कहा गया था कि या तो लोन मुख्यमंत्री बनेंगे या फिर विधानसभा भंग होगी? यह सवाल इसलिए क्योंकि खुद राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने ही कह डाला है कि अगर वे दिल्ली की तरफ देखते तो उन्हें सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाना पड़ता और यह बेईमानी होती.
12345»

Advertisement