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अखिलेश शर्मा

पत्रकारिता में पिछले 24 साल से सक्रिय अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक और प्राइम टाइम एंकर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, संसदीय लोकतंत्र, राजनीतिक अर्थव्यवस्था तथा दलीय राजनीति से जुड़े विषयों में उनकी गहन दिलचस्पी है। पिछले डेढ़ दशक से बीजेपी से जुड़ी ख़बरें कवर कर रहे हैं।

  • हरिवंश की आलोचना इसलिए हो रही है कि उन्होंने मत विभाजन क्यों नहीं कराया और सदन का कामकाज आगे बढ़ाने के लिए आम राय क्यों नहीं बनाई. वह चाहते, तो सदन कुछ देर के लिए स्थगित कर मत विभाजन का प्रयास कर सकते थे.
  • अकाली दल और BJP का रिश्ता काफी पुराना है. 53 साल पहले दोनों दल साथ आए थे. तब भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने पुराने स्वरूप भारतीय जनसंघ में थी. यह एक चुनाव-बाद गठबंधन था. पंजाब और हरियाणा के गठन के बाद हुए चुनाव में 104 सदस्यों की विधानसभा में अकाली दल को 36 और जनसंघ को 9 सीटें मिली थीं.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 70 वर्ष के हो गए. वे देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म भारत की स्वतंत्रता के बाद हुआ. इस तरह से स्वतंत्र भारत और उनकी जीवन यात्रा लगभग साथ-साथ चली है. यह संयोग ही है कि दो साल बाद भारत 72 वर्ष के प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्रता के 75 वर्ष मनाएगा. वे इस पद पर आसीन होने वाले ऐसा नेता भी हैं जो चुनी हुई सरकार के प्रमुख के पद पर सर्वाधिक समय रहे हैं.
  • बिहार चुनाव में एक प्रमुख खिलाड़ी लोक जनशक्ति पार्टी है. उसके नेता चिराग पासवान पहली बार आगे आकर कमान संभाल रहे हैं. अभी तक रामविलास पासवान ही पार्टी का चेहरा होते थे, लेकिन चिराग पासवान अपने पिता के नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं. हर चुनाव से पहले रामविलास पासवान सीटों के बंटवारे को लेकर जिस तरह पैंतरे दिखाते हैं वैसे ही चिराग भी दिखा रहे हैं. लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग हैं.
  • दोनों में न कोई रिश्ता, न कोई बातचीत. फर्क यह कि आज जेटली नहीं रहे और मोहम्मद मुन्ना टेलर हंसी-खुशी अपने बच्चों के साथ जीवन काट रहा है. लेकिन जेटली नहीं होते तो शायद मोहम्मद मुन्ना आज का दिन नहीं देख पाता.
  • क्या इस लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस बीजेपी और नरेंद्र मोदी के साथ वैसे खुलकर साथ नहीं आ रहा है जैसे कि पिछले लोकसभा चुनाव में आया था? क्या आरएसएस के स्वयंसेवक मोदी सरकार के कामकाज से खुश नहीं हैं? क्या आरएसएस के समर्थन के बिना मोदी की नैया डूब रही है? कम से कम बीएसपी प्रमुख मायावती का तो यही दावा है.
  • अभी लोकसभा चुनाव के दो चरण होने बाकी हैं. 23 मई को क्या होगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन कई विपक्षी पार्टियों ने सरकार बनाने के लिए अभी से जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया है, पर इन्हें एक डर है. वह यह कि त्रिशंकु लोकसभा के हालात में बीजेपी अगर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी तो कहीं राष्ट्रपति उसे सरकार बनाने के लिए न बुला लें. ऐसा 1996 में हो चुका है जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाया था.
  • पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर बोफोर्स में लगे भ्रष्टाचार के आरोप पीएम नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर उछाल दिए. उन्होंने कांग्रेस को चुनौती दी है कि दम है तो बाकी बचे दो चरणों में इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ कर देख ले. पीएम मोदी ने कहा कि अभी पंजाब में, दिल्ली में, भोपाल में वोटिंग होनी है. कांग्रेस चाहे तो राजीव गांधी के नाम पर चुनाव लड़ कर दिखा दे. और अब से कुछ देर पहले दिल्ली में एक रैली में राहुल गांधी ने पीएम को जवाब दिया है. आपको बता दूं कि राजीव गांधी को भ्रष्टाचारी नंबर एक बताने के पीएम मोदी के बयान से कांग्रेस पहले से ही भड़की हुई है. पार्टी ने आज इसकी शिकायत चुनाव आयोग को भी कर दी. कांग्रेस का कहना है कि यह अपमानजनक भाषा है.
  • लोकसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान खत्म होते ही बीजेपी ने भी अपनी चुनावी रणनीति का दूसरा चरण शुरू कर दिया है. यह वह चरण है जिसमें बीजेपी अपने तरकश में मौजूद हर तीर का इस्तेमाल कर रही है. इसे हिंदुत्व 2.0 का नाम दिया गया है. यानी मोदी-शाह का वह हिंदुत्व जो वाजपेयी-आडवाणी के हिंदुत्व से बिल्कुल अलग है. तब मंदिर मंडल का दौर था तो इस दौर में मंदिर और मंडल को मिलाकर हिंदुत्व का नया रूप तैयार किया गया है. यह आक्रामक हिंदुत्व है जो खुलकर ध्रुवीकरण करता है.
  • एक सवाल देश में कई लोगों को बेहद परेशान कर रहा है. बालाकोट हमले में कितने आतंकवादी मारे गए? सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह संख्या तीन सौ है तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कम से कम ढाई सौ आतंकवादियों के मरने की बात कही. कृषि मंत्री राधामोहन सिंह कह रहे हैं कि चार सौ आतंकवादी मारे गए. एक बात बिल्कुल साफ है. किसी भी ऑपरेशन की कामयाबी की पुष्टि तीन जरियों से ही हो सकती है. या तो वायुसेना कहे कि हमला सही निशाने पर किया गया. दूसरा जमीनी खुफिया जानकारी बताए कि हमला कितना कामयाब रहा और तीसरा जरिया तकनीक से जुटाई जानकारी, जिसमें निशाने पर हमले से पहले मौजूद लोगों की संख्या का आकलन हो ताकि हमले में उनके मरने की पुष्टि हो सके.
  • पुलवामा के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में भारत को कामयाबी मिलती नजर आ रही है. न्यूजीलैंड की संसद ने पुलवामा आतंकी हमले की निंदा में एक प्रस्ताव पारित किया है. संसद में निंदा प्रस्ताव पारित करने वाला न्यूजीलैंड पहला देश बन गया है.
  • सोचिए अगर इस आम चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत न मिले. किसी गठबंधन को भी न मिले. त्रिशंकु संसद की हालत में क्या होगा? यह एक ऐसा सवाल है जो बार-बार पूछा जा रहा है. इसका एक जवाब यह भी है कि ऐसे हालात में राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी या फिर चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं. ऐसा पहले भी हुआ है. हम यह बात इसलिए उठा रहे हैं कि चुनाव नजदीक आते ही बीजेपी ने न सिर्फ अपना कुनबा बढ़ाना शुरू कर दिया है.
  • मुलायम सिंह यादव ने वह कह दिया जो कोई सोच भी नहीं सकता था. उन्होंने कह दिया कि वे चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनें. मुलायम ने यह बात सोलहवीं लोकसभा के विदाई भाषण में कही. एक ऐसी बात जो बीजेपी नेताओं के कानों में मधुर सुर की तरह गूंजी तो, वहीं विपक्ष के कानों में कर्कश राग की तरह. यह ऐसी बात है जो सपा-बसपा गठबंधन से तगड़ी चुनौती झेल रही बीजेपी उत्तर प्रदेश में एक ब्रहास्त्र की तरह इस्तेमाल कर सकती है. खासतौर से उन यादव मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए जिन पर शिवपाल सिंह यादव पहले से ही डोरे डालने को तैयार बैठे हैं. मुलायम के बयान के राजनीतिक निहितार्थ के बारे में आगे बात करेंगे, लेकिन पहले आइए सुन लेते हैं उन्होंने क्या क्या कहा.
  • क्या ममता बनर्जी के बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए दूसरे राज्यों और विपक्षी पार्टियों के नेताओं के लिए नो एंट्री है? यह सवाल इसलिए क्योंकि एक के बाद एक बीजेपी के नेताओं के या तो हैलीकॉप्टर को बंगाल में लैंड करने की अनुमति नहीं दी जा रही है या फिर सभाएं करने के लिए मैदान नहीं दिए जा रहे हैं.
  • 'उनके देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक, वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.' वैसे रौनक तब आती है जब बीमार का दीदार रौनक लाने वाले शख्स से हो. लेकिन बीमार से कोई ऐसा शख्स मिल ले जो उसका तनाव और बढ़ा दे तो बात बिगड़ भी जाती है. बात हो रही है गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं.
  • लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने एक बड़ा चुनावी वादा किया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार बनी तो देश के सभी गरीबों को न्यूनतम आमदनी की गारंटी दी जाएगी. उन्होंने यह ऐलान छत्तीसगढ़ में किया.
  • अगर आज चुनाव हों तो बीजेपी का अबकी बार फिर एक बार मोदी सरकार का नारा नाकाम होगा या सफल, जानिए क्या कहते हैं ओपिनियन पोल.
  • अभी एक महीना ही हुआ जब धूमधाम से पंद्रह साल बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी. एमपी कमल के हाथ से निकलकर कमलनाथ के हाथों में चला गया. लेकिन सिर्फ एक महीने में ही वहां से ऐसी गजब-गजब खबरें सामने आ रही हैं कि सब पूछने लगे हैं कि आखिर एमपी में हो क्या रहा है?
  • वैसे तो ममता बनर्जी बहुत पहले ही पीएम पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर चुकी थीं लेकिन इसकी विधिवत शुरुआत उन्होंने शनिवार को की. कोलकाता के परेड मैदान में एक बड़ी रैली कर उन्होंने अपनी ताकत दिखाई. उन्होंने यह भी दिखाया कि उनके बुलावे पर विपक्ष के वे तमाम नेता एक मंच पर आ सकते हैं जो त्रिशंकु संसद में सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
  • एक फरवरी को मोदी सरकार अपना अंतिम बजट पेश करेगी. चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले आने वाला यह बजट अंतरिम होगा. यानी परंपरा के मुताबिक सरकार इसके जरिए चुनाव होकर नई सरकार बनने तक तीन महीनों के लिए होने वाले खर्च का इंतजाम करेगी. परंपरा यह भी है कि जाती हुई सरकार कोई बड़ा नीतिगत ऐलान इस अंतरिम बजट में नहीं करती है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या मोदी सरकार परंपरा को ताक पर रखकर इस अंतरिम बजट या वोट ऑन अकाउंट में आने वाले चुनावों के मद्देनजर बड़े ऐलान कर सकती है, ताकि वोटरों को लुभाया जा सके? कुछ ऐसे ऐलान हैं जिनका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है. सरकार के भीतर इन्हें लेकर चर्चा भी है.
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