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अखिलेश शर्मा

पत्रकारिता में पिछले 24 साल से सक्रिय अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक और प्राइम टाइम एंकर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, संसदीय लोकतंत्र, राजनीतिक अर्थव्यवस्था तथा दलीय राजनीति से जुड़े विषयों में उनकी गहन दिलचस्पी है। पिछले डेढ़ दशक से बीजेपी से जुड़ी ख़बरें कवर कर रहे हैं।

  • लालकृष्ण आडवाणी से मिलने वाले तमाम नेता उनसे एक ही गुज़ारिश कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव 2014 में वह गांधीनगर से ही लड़ें और इस बारे में पार्टी का फैसला मान लें, लेकिन आडवाणी अब इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं...
  • भाजपा के लिए अब भी यूपी में उम्मीद की एक ही किरण बची है, कि आरएसएस कार्यकर्ता हर बूथ संभालें और भाजपा और मोदी के पक्ष में वोटरों को बूथ तक लाएं... लेकिन इतना तय है कि उम्मीदवारों के चयन में देरी और गलतियों ने भाजपा को करारा झटका दिया है...
  • हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान शरद पवार ने एनडीटीवी से कहा कि वर्ष 2002 के दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार नहीं माना जा सकता... जब अदालत ने कुछ कहा है तो हमें स्वीकार करना चाहिए...
  • यह शायद पहली बार है जब चुनाव होने से पहले ही सत्तारूढ़ दल हथियार डालता दिख रहा है। चुनाव के परिणामों की प्रतीक्षा किए बगैर ही संभावित हार के लिए बलि का बकरा भी ढूंढ़ा जाने लगा है। प्रधानमंत्री पर धीरे-धीरे शुरू हुए इन हमलों के पीछे यही वजह मानी जा सकती है।
  • दिलचस्प बात यह है कि मीडिया में चाहे इसे लेकर सस्पेंस बना रहा हो, लेकिन खुद नरेंद्र मोदी यह फैसला पिछले साल जुलाई में ही कर चुके थे। पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं को यह जानकारी दे दी गई थी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व से भी विचार-विमर्श कर लिया गया था।
  • जनमत सर्वेक्षण के आकलन को अगर हवा का इशारा भी मानें, तो यह अंदाजा लगाना गलत नहीं होगा कि हवा एनडीए के पक्ष में बह रही है। इसीलिए कोई हैरानी नहीं है कि हवा का रुख पहले से ही भांपने वाले क्षेत्रीय दलों ने चुनाव बाद की संभावनाओं के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
  • पीएम प्रत्याशी के रूप में चाहे नरेंद्र मोदी को 'बराबर दर्जे के लोगों में पहला' माना जा रहा हो, लेकिन अगर वह प्रधानमंत्री बन गए तो पार्टी के सर्वोच्च नेता बन जाएंगे... यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह तब भी पार्टी के अंदरूनी मामलों पर चुप ही रहेंगे...
  • बीजेपी और तेलूगु देशम पार्टी (टीडीपी) के बीच गठबंधन होना करीब-करीब तय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि सीमांध्र में नरेंद्र मोदी की 25 मार्च के आसपास संभावित रैली के दौरान दोनों ही पार्टियों में गठबंधन की घोषणा की जा सकती है।
  • यह ज़रूर है कि संघ व्यक्तिवाद के खिलाफ है, लेकिन उसके नेता यह मानते हैं कि चुनावी राजनीति में किसी चेहरे को आगे करना एक रणनीति का हिस्सा होता है...
  • जनमत सर्वेक्षणों में कहा जा रहा है कि अगड़ी जातियां बीजेपी के पक्ष में गोलबंद हो रही हैं, लेकिन वास्तविकता में ऐसा तभी हो पाएगा, जब पार्टी उम्मीदवारों के चयन में सावधानी रखे...
  • अनुभव को नज़रअंदाज़ करना भी किसी पार्टी की अंदरूनी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है... बीजेपी में पिछले एक हफ्ते से चली आ रही उठा-पटक को देखकर तो यही लगता है...
  • चाय पे चर्चा के दो घंटे के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी ने पहले अपनी बात रखी और फिर देश-विदेश से महिलाओं के अपनी सुरक्षा, समाज में स्थान, बराबरी का दर्जा, महिलाओं के लिए बने कानूनों जैसे दसियों सवालों के जवाब दिए। मोदी ने आधी आबादी की आजादी की वकालत की।
  • चाहे कांग्रेस जैसा राष्ट्रीय दल हो, या फिर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी जैसे क्षेत्रीय दल या फिर आम आदमी पार्टी जैसे नए दल, सबके निशाने पर नरेंद्र मोदी हैं। बीजेपी और नरेंद्र मोदी के लिए इससे बेहतर हालात नहीं बन सकते थे।
  • सुषमा स्वराज ने कुछ विवादास्पद लोगों को साथ जोड़ने की पार्टी की कोशिशों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। बीजेपी में सुषमा के इस कदम से हैरानी है। पार्टी नेताओं को यह समझ नहीं आया है कि सुषमा ने अपनी बातें संसदीय बोर्ड में रखने के बजाए सार्वजनिक रूप से क्यों कहीं?
  • बुधवार को दोनों पार्टियों के बीच सड़कों पर जो युद्ध हुआ, वह लोकतंत्र के लिए किसी भी तरह से शुभ नहीं है। वोट की लड़ाई सड़कों पर लड़ना उस मध्य वर्ग को तो कतई पसंद नहीं आएगा, जिसके वोटों की दरकार बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों को है।
  • बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि यूपी-बिहार में बीजेपी का अच्छा प्रदर्शन हो, इसके लिए जरूरी है कि मोदी यूपी से चुनाव लड़ें। वहीं, गुजरात बीजेपी साफ कर चुकी है कि मोदी को राज्य से लड़ना ही होगा। उसे लगता है कि उसके 'मिशन 26' के लिए यह बेहद जरूरी है।
  • महाराष्ट्र की 48 सीटों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन इस बार कम से कम 30 सीटें जीतना चाहता है। बीजेपी ने इसके लिए पहल की है। पार्टी ने राज्य में एक महायुति यानी बड़ा गठबंधन बनाने की कोशिश की है। इसमें पाँच पार्टियां शामिल हैं।
  • रविवार को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान पर इकट्ठा हुए लोगों को बीजेपी के मंच पर अटल बिहारी वाजपेयी की विशाल छवि नजर आई। नरेंद्र मोदी जिस वक्त रैली को संबोधित कर रहे थे, पृष्ठभूमि में अटल बिहारी वाजपेयी का विशालकाय फोटो उन्हें देख रहा था।
  • एक पूर्व सेना प्रमुख का राजनीति में सक्रिय होना और एक बड़े राजनीतिक दल में शामिल होना एक अनूठी घटना ज़रूर है। इस पर कई सवाल भी खड़े होते हैं।
  • बीजेपी के सबसे बड़े नेता उस सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं, जिसका प्रतिनिधित्व वह 1991 से करते आ रहे हैं, इसमें खबर क्या है? पार्टी के मार्गदर्शक के रूप में उन्हें अपनी इच्छा को सार्वजनिक रूप से प्रकट करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
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