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अखिलेश शर्मा

पत्रकारिता में पिछले 24 साल से सक्रिय अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक और प्राइम टाइम एंकर हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, संसदीय लोकतंत्र, राजनीतिक अर्थव्यवस्था तथा दलीय राजनीति से जुड़े विषयों में उनकी गहन दिलचस्पी है। पिछले डेढ़ दशक से बीजेपी से जुड़ी ख़बरें कवर कर रहे हैं।

  • सोशल मीडिया पर फैलता अफवाहों का जाल समाज के ताने-बाने को बुरी तरह से तहस-नहस कर रहा है. लोग आंखें मूंद कर व्हाट्सऐप या ऐसे ही दूसरे प्लेटफॉर्मस पर आई झूठी बातों, फर्जी खबरों और अफ़वाहों पर भरोसा कर एक-दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं.
  • पीएम मोदी कहते हैं कि महागठबंधन की तुलना 1977 और 1989 से करना ठीक नहीं है क्योंकि 77 में विपक्ष आपातकाल के खिलाफ एक हुआ था तो वहीं 89 में बोफोर्स के भ्रष्टाचार के खिलाफ.
  • विपक्षी पार्टियों के नेताओं में प्रधानमंत्री पद के लिए होड़ और दौड़ शुरू हो गई है. कम से कम बयानबाजी के दौर से तो ऐसा ही लगता है. कहते हैं एक अनार सौ बीमार, लेकिन प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर फिलहाल तो एक अनार दो बीमार की बात ही लगती है.
  • सितंबर 2016 में पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में घुसकर आतंकवादी कैंपों को ध्वस्त करने और दर्जनों आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को मारने की कार्रवाई सर्जिकल स्ट्राइक का फुटेज आखिरकार सामने आ गया है. उड़ी आतंकवादी हमले में 18 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद यह सैनिक कार्रवाई की गई थी. स्पेशल फोर्सेज ने पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी कैंपों पर कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई में दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक और आतंकवादी मारे गए थे.
  • क्या नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारेंगे? यह सवाल इसलिए क्योंकि बीजेपी के साथ उनकी खटपट शुरू हो गई है. सीटों के बंटवारे को लेकर ज़ोर-आज़माइश हो रही है. एक-दूसरे पर बयानों के तीखे तीर चलाने का सिलसिला शुरू हो गया है. इसी बीच नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद को फोन कर दिया. बताया गया कि बातचीत का मुद्दा लालू की सेहत थी. लेकिन इससे बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सेहत पर सवाल उठ गए. 
  • क्या अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष स्तर पर कोई खिचड़ी पक रही है? या फिर सिर्फ चुनाव नजदीक देख कर एक बार फिर बयानों की गर्मी दिख रही है? वैसे तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती आई है कि वो राम मंदिर बनाने के पक्ष में है, लेकिन ऐसा या तो सभी पक्षों की आपसी सहमति से या फिर अदालत के आदेश के बाद ही होगा. लेकिन सोमवार को अयोध्या में हुए संत सम्मेलन में भगवा वस्त्रधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संत समाज से राम मंदिर के निर्माण में हो रही देरी को लेकर कड़वी बातें सुननी पड़ी है.
  • तैंतालीस साल पहले रात का स्याह अंधेरा लोकतंत्र के मुंह पर कालिख पोत गया था. अपने भविष्य को लेकर आशंकित इंदिरा गांधी ने 1947 की आजादी के बाद पहली बार नागरिकों की आजादी छीनने का काम किया. सभी देशवासियों के मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए. विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. प्रेस पर अकुंश लगा दिया गया. दिल्ली की फ्लीट स्ट्रीट कहे जाने वाले बहादुरशाह जफर मार्ग पर अखबारों के दफ्तरों की बिजली काट दी गई, ताकि अगले दिन अखबार न निकल सके. अगले दिन हर अखबार के दफ्तर में एक सेंसर अफसर बैठा दिया गया जिसका काम हर खबर की पड़ताल करना था कि उसमें इंदिरा गांधी या सरकार के खिलाफ कुछ न लिखा हो. इंदिरा गांधी ने यह कदम खुद को मजबूत करने के लिए उठाया.
  • कांग्रेसी नेताओं के आत्मघाती बयानों का सिलसिला जारी है. हिंदू आतंकवाद के बाद अब बारी है जम्मू-कश्मीर की जिसे लेकर कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने बयान दे डाले. राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ के बयानों से कांग्रेस घिर गई है. अब पार्टी को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय पर कल के भाषण के बाद अब नई बहस शुरू हो गई है. क्या कांग्रेस ने तीखा विरोध कर जल्दबाजी तो नहीं की. कम से कम प्रणब दा के भाषण के बाद आई कांग्रेस और अन्य वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया तो यही बता रही है. हालांकि एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि प्रणब मुखर्जी आखिर संघ मुख्यालय क्यों गए.
  • लोकसभा उपचुनावों की करारी हार ने बीजेपी के मिशन 2019 पर सवालिया निशान लगा दिया है. नए सहयोगी मिलना तो दूर की बात, मौजूदा सहयोगी दलों ने ही आंखें दिखाना शुरू कर दिया है.
  • बीजेपी शिवसेना का गठबंधन भारतीय राजनीति के सबसे पुराने और मजबूत गठबंधनों में से एक है लेकिन 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही इसकी दरार गहराती जा रही है.
  • कैराना, गोरखपुर और फूलपुर की हार के बाद अब बीजेपी को उसके सहयोगी दलों ने आंखें दिखाना शुरू कर दिया है. जो सहयोगी दल राज्यों में ताकत में हैं वे चाहते हैं कि बीजेपी वहां छोटा भाई बन कर रहे.
  • भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लंबे समय बाद तोपों की गूंज और गोलों की बारिश रुकने के आसार बनने लगे हैं. दोनों देशों के डीजीएमओ की बैठक के बाद 2003 के युद्धविराम को फिर से लागू करने पर सहमति बनती दिख रही है. हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत पाकिस्तान पर भरोसा कर सकता है? यह सवाल इसलिए कि जब-जब भारत की ओर से युद्ध विराम किया गया, पाकिस्तान ने उसका उल्लंघन किया. पाकिस्तान की गोलाबारी से सीमा के गांवों पर रहने वाले सैंकड़ों भारतीय प्रभावित हुए. पाकिस्तान युद्ध विराम के उल्लंघन को युद्ध के स्तर तक लेकर चला गया है.
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सात जून को वो करने जा रहे हैं जिसके बारे में कोई कांग्रेसी सोच भी नहीं सकता. वे नागपुर के रेशीमबाग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पर संघ शिक्षा वर्ग यानी ओटीसी के तृतीय वर्ष के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहेंगे. यह खबर सुनकर कांग्रेस को सांप सूंघ गया है.
  • हमारे नेताओं को जनता की याददाश्त पर अटूट विश्वास होता है. वे मान कर चलते हैं कि जनता की याददाश्त बेहद कमज़ोर होती है इसलिए वह न तो चुनाव के दौरान किए गए वादों को याद रख पाती है और न ही विरोधियों पर लगाए गए आरोपों को. इसीलिए चुनाव के वक़्त चाहे तो आप जेब से पर्ची निकाल कर किसी काल्पनिक स्विस बैंक खाते का ज़िक्र कर अपने विरोधी की प्रतिष्ठा को धूल में मिला कर राजनीतिक लाभ ले सकते हैं या फिर मंच पर नाटकीय अंदाज में अलमारी से कथित सबूतों की फाइल निकाल कर जनता के बीच लहरा सकते हैं.
  • कैराना, गोंदिया--भंडारा और पालघर समेत देश की चार लोकसभा सीटों और दस विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए सोमवार को वोट डाले गए. कैराना और गोंदिया-भंडारा में सुबह से ही ईवीएम और वीवीपैट में खराबी की शिकायतें मिलने लगीं. समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने इसके विरोध में चुनाव आयोग का दरवाजा भी खटखटाया.
  • मोदी सरकार कल चार साल पूरे कर रही है. लेकिन चार साल के जश्न पर पेट्रोल-डीज़ल के बढ़े दामों का साया है तो वहीं लोकसभा के तीन महत्वपूर्ण उपचुनावों को लेकर चिंता की छाया भी है.
  • बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के ऐलान के बावजूद जनता को पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ी कीमतों से कोई राहत नहीं मिली है. कर्नाटक चुनाव खत्म होने के बाद आज लगातार 11 वें दिन इनके दाम बढ़ा दिए गए. अब दिल्ली में पेट्रोल रिकॉर्ड 77 रुपए 47 पैसे प्रति लीटर और मुंबई में 85 रुपए 29 पैसे प्रति लीटर पहुंच गया है.
  • अगर आप सिर्फ पेट्रोल-डीज़ल के बढ़े दामों से ही परेशान हैं तो आपको एक और झटका भी लग सकता है. यह झटका है बिजली का जिसके दाम लगातार बढ़ रहे हैं. गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग, कोयले की कम आपूर्ति और पश्चिमी भारत से उत्तरी राज्यों को बिजली भेजने वाली एक महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन के टूटने से बिजली की कीमतों में बढोतरी हो रही है.
  • ऐसा क्यों होता है कि जब देश के किसी भी हिस्से में चुनाव होता है तो पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ते, लेकिन चुनाव खत्म होते ही दाम बढ़ने लगते हैं. कर्नाटक में चुनावों के दौरान 19 दिनों तक पूरे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे. लेकिन वोटिंग पूरी होते ही पिछले 9 दिनों से हर दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं. कहने को तेल कीमतों को सरकार के नियंत्रण से बाहर कर दिया गया है और अब तेल कंपनियां हर रोज तेल के दाम तय करती हैं, लेकिन साफ है कि यह कदम सिर्फ दिखावे का है क्योंकि चुनावों के वक्त दाम नहीं बढ़ता और चुनाव के बाद बढ़ जाता है.
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