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हृदयेश जोशी

हृदयेश जोशी एनडीटीवी इंडिया में राष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ संपादक हैं. उन्हें उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिये दो बार प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पुरस्कार दिया जा चुका है. पिछले एक दशक में हृदयेश ने माओवाद प्रभावित बस्तर समेत मध्य भारत के कई इलाकों से लगातार रिपोर्टिंग की है. बस्तर पर उनका उपन्यास "लाल लकीर" और उत्तराखंड में 2013 की केदारनाथ आपदा पर उनकी किताब "तुम क्यों चुप रहे केदार" काफी चर्चित रहीं.

  • यूपी में हाल में हुये मेयर और वार्ड के चुनावों के बाद एक बार फिर से ईवीएम को लेकर विवाद उठ रहा है। विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से बीजेपी जीती.
  • मंगलवार को टीवी पर दो तस्वीरें दिखाई दीं. इनमें पूछे जाते सवाल एक बार फिर कश्मीर को चर्चा के केंद्र में लाते हैं... पहली तस्वीर पत्रकारों से घिरे समाजविज्ञानी पार्थ चटर्जी की थी.
  • अगर अरुंधती रॉय पहले जैसा लेखन करती रहतीं, तो शायद आज भारतीय मध्यवर्ग की आंखों का तारा होतीं, लेकिन बुकर के बाद उन्होंने एक ऐसा लेख लिख दिया, जिससे उनके बारे में कई लोगों की धारणा बदल गई. अब अरुंधती प्रवाहमयी भाषा और शब्दों के जादू की साम्राज्ञी नहीं रहीं, तिरंगे और देश की संप्रुभता को ललकारने वाले लेखक बन गईं.
  • दिल्ली में बुधवार को चिलचिलाती गर्मी में कोई 50 कार्यकर्ता और किसान पर्यावरण मंत्रालय के बाहर जीएम सरसों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों के पर्यावरण भवन पहुंचने के कुछ ही मिनट बाद मंत्री अनिल माधव दवे का पैगाम उन तक आ गया. 'मंत्री जी मिलना चाहते हैं. कुछ लोग भीतर आकर उनसे बात कर सकते हैं.'
  • राजनीतिक पार्टियों को दिए जाने वाले नकद चंदे को लेकर बजट में लाए गए नए नियम से क्रांति आए न आए, लेकिन ये आंखों का धोखा ज़रूर है.
  • मैं अक्सर कहता रहा हूं कि सिपाही जंग में शहीद नहीं होते, वे शासकों के अहंकार की बलि चढ़ाए जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितने संयम से काम लेंगे, वह हमारे देश की गरीब जनता और जवानों के उतने ही हित में होगा.
  • केदारनाथ जाने वाले रास्ते का एक खूबसूरत पड़ाव सोनप्रयाग अब नई शक्ल ले रहा है। 3 साल पहले जून 2013 को जब केदारनाथ में भयानक बाढ़ आई तो सोनप्रयाग पूरी तरह तबाह हो गया था।
  • ‘अरे भाई ये दाल इतनी पतली है। कोई खा सकता है क्या इसे!’ किचन में बैठे बुज़ुर्ग ने रसोइये से शिकायत की।
  • उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में गोहत्या की अफवाह, आगजनी और हिंसा की वजह बन गई। इस हिंसा के बाद का नज़ारा एनडीटीवी संवाददाता हृदयेश जोशी के शब्दों में...
  • लोकसभा में आखिरकार ललित मोदी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर बहस हुई लेकिन हैरान करने वाली बात रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का बचाव करने के लिये सदन में मौजूद नहीं थे।
  • बस्तर और देश के तमाम आदिवासी इलाकों में आज सबसे बड़ी समस्या भरोसे की कमी होना है। आदिवासियों को सरकार की बातों पर तो भरोसा है ही नहीं, वे उन नेताओं को भी शक की नज़र से देख रहे हैं जो उनके लिए आवाज़ उठाने इन इलाकों में आते हैं।
  • सवाल कई है, लेकिन उन्हें उठाना कठिन इसलिए है कि आज हमारे सामने अंध-राष्ट्रवाद की एक दीवार खड़ी की गई है और कई कड़वे तथ्य उजागर करना राष्ट्रभक्ति के खिलाफ हो जाता है।
  • पिछले दिनों एनडीटीवी इंडिया समेत कई न्यूज़ चैनलों और अखबारों ने ये खबर प्रमुखता से दिखाई थी कि कैसे जेपी नड्डा ने एम्स के सीवीओ संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को चिट्ठियां लिखी।
  • सीपीएम ने तय किया है कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ और उसकी नाकामियों को दिखाने के लिए वह दिसंबर से देश भर में धरने प्रदर्शन और कार्यक्रम करेगी। इस कोशिश सीपीएम ने अपने सहयोगियों की संख्या बढ़ाई है।
  • पूर्वी तट पर आए चक्रवाती तूफान हुदहुद ने विशाखापट्टनम को अस्त-व्यस्त कर दिया है। यहां हर ओर तबाही का मंजर है। सैंकड़ों पेड़ जो इस शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाया करते थे, आज वे इस तूफान के आगे धराशायी हो गए और इसकी वजह से रविवार को शहर की सारी सड़कें अवरुद्ध हो गईं।
  • पूर्वी तट पर पहले भी बवंडर आते रहे हैं, लेकिन विशाखापट्टनम को कभी कुछ नहीं हुआ। शायद लोग इसीलिए बेफिक्र हैं। कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि वे बरसात का लंबे समय से इंतज़ार कर रहे हैं। शायद हुदहुद के बहाने ही थोड़ा बरसात हो जाए...
  • देश भर में भेजे जाने के साथ-साथ यहां का सी-फीड विदेशों को भी निर्यात होता है। शुक्रवार की शाम करीब 8 बजे हुद-हुद तूफान अब भी वाइज़क से 470 किलोमीटर दूर है, गोपालपुर से 520 किलोमीटर दूर और इसकी रफ्तार 120 किलोमीटर प्रतिघंटा बताई जा रही है, लेकिन वाइज़क पर इसका असर दिखना बाकी है।
  • हृदयेश जोशी की जांच से सामने आए तथ्य बताते हैं कि न सही कंपनियों के पास कोल ब्लॉक गए, न ये कंपनियां कोल ब्लॉकों को विकसित करने के प्रति गंभीर थीं। अधिकतर ब्लॉक उन कंपनियों को दिए गए, जिनके पास तकनीकी और आर्थिक काबिलियत नहीं थी या फिर उन कंपनियों को कोल ब्लॉक दिए गए, जिनके पास छोटे-छोटे प्लान्ट थे।
  • वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे के मौके पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था एमएसएफ ने एक ट्विटर कैंपेन शुरू किया है। ये संस्था सरकार से हेपेटाइटिस-सी के इलाज के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आई नई दवा सोफोस्बोविर को भारत में लाने और इसे मरीज़ों को सस्ते दाम में उपलब्ध कराने का दबाव बना रही है।
  • फैज़ाबाद होते हुए अयोध्या की ओर जाने वाली सड़क बेहतरीन है... अगर आप लखनऊ से अच्छा लंच करके निकले हैं तो इस बात की बड़ी संभावना है कि भगवान राम की नगरी तक पहुंचते-पहुंचते आपको झपकी आ जाए, लेकिन अयोध्या में घुसते ही आपको पर्यटक समझ कर आप पर इतने लोग टूटते हैं कि नींद खुद-ब-खुद खुल जाती है...

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