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कादम्बिनी शर्मा

1999 में बिज़नेस रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत की. करीब आठ साल लीगल रिपोर्टिंग और फिर लगातार 11 वर्षों से विदेशी मामलों- घटनाओं, भारत की विदेश नीति पर रिपोर्टिंग और एंकरिंग करती रही हैं. खास नज़र भारत के पड़ोस, वहां की राजनीति और वहां पनपे आतंक का भारत पर हो रहे असर पर. चीन, अमेरिका और यूरोप पर. लेकिन इस छोटी सी बड़ी दुनिया में हर घटना-दुर्घटना के तार एक दूसरे से जुड़े होते हैं और देश की राजनीति का असर होता है अंतरर्राष्ट्रीय रिश्तों पर भी तो उस की खास ऐनालिसिस. पर्दे के पीछे चलती अलग अलग ट्रैक की डिप्लोमेसी सबके सामने लाने में दिलचस्पी. सामाजिक मुद्दों पर भी कई बार भड़ास निकालने को लिख बैठती हैं.

  • भारत और अमेरिका के बीच 2 प्लस 2 बैठक खत्म हुई. बैठक का महत्व इतना कि महामारी के वक्त और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से महज़ एक हफ्ता पहले अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्री दोनों भारत आए और आमने सामने अपने समकक्षों के साथ बैठक की - एक तथ्य जो विदेश मंत्री एस जयशंकर से प्रेस के सामने भी नोट किया.
  • नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने एक प्रेस कॉन्फेरेंस कर कहा कि ईरान और रूस ने वोटर रजिस्ट्रेशन की जानकारी हासिल कर ली है और ईरान धुर दक्षिणपंथी गुट प्राउड बॉय्ज़ बन के वोटरों को धमकाने वाले ईमेल भेज रहा है. इस प्रेस कॉन्फेरेंस में एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस रे भी मौजूकि जो द थे
  • ये सवाल भारत में ही नहीं, 2016 से अमेरिका में भी पूछे जा रहे हैं. जब से ये आरोप लगे कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने दखलअंदाज़ी की, तब से अमेरिका में नागरिकों के वोट को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.
  • इस बार के अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन के साथ उपराष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरीं भारतीय मूल की कमला हैरिस को लेकर भारत में काफी उत्सुकता है. लेकिन उनके इस चुनाव में उतरने की क्या है अहमियत? वो क्या कर पाएंगी एक उपराष्ट्रपति के तौर पर अगर वो चुनी जाती हैं? क्या ज़िम्मेदारियां या ताकत होगी उनके पास?
  • इस डिबेट की परंपरा 1976 में ही शुरू हुई. हमने 29 सितंबर 2020 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंदी जो बाइडेन के बीच पहला डिबेट देखा. इसके पहले ही अमेरिका के कई राज्यों में हिंसा हुई है. जानकारों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों ने, उनके ट्वीट्स ने लोगों को बांटने का काम ज्यादा किया है और लोगों ने पहले ही तय कर रखा है कि वो अपना वोट रिपब्लिकन्स को देंगे या डेमोक्रैट्स को.
  • जब पूरी दुनिया कोविड से निबट रही है तब चीन भारत की ज़मीन हड़पने की कोशिश में है. मई के बाद एक बार फिर 29-30 अगस्त की रात चीनी सेना ने भारत के इलाके में घुसपैठ कर कब्जा़ करने की कोशिश की लेकिन सतर्क भारतीय सेना ने इसे बेकार कर दिया. अपनी पोज़िशन मज़बूत कर ली.
  • भारत के विदेश सचिव कोविड के इस दौर में भी विदेश यात्रा पर निकले हैं. और उनकी यात्रा का मुकाम है पड़ोसी बांग्लादेश. असल में पिछले एक हफ्ते में अचानक पड़ोस के मामले में कूटनीति में तेज़ी आ गई है. क्योंकि विदेश सचिव बांग्लादेश दौरे पर हैं तो पहले उसी की बात करते हैं. ये अचानक दौरा इसलिए हुआ क्योंकि अब चीनी निवेश की लंबी बांहें बांग्लादेश पहुंच चुकी हैं. वहां के मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि तीस्ता नदी के पानी के मैनेजमेंट के लिए चीन उसे एक बिलियन डॉलर या सात हज़ार करोड़ की मदद दे सकता है. तीस्ता नदी के पानी को आपस में बांटने को लेकर भारत और बांग्लादेश पिछले आठ साल से बात कर रहे हैं पर बात बनी नहीं है.
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन के कहने पर कश्मीर पर बुलाई गई क्लोज्ड डोर बैठक बेनतीजा रही. बेनतीजा इसलिए कि अधिकतर देशों ने ये साफ कर दिया कि वे कश्मीर के मामले को अंतरराष्ट्रीय नहीं द्विपक्षीय मुद्दा समझते हैं. तो कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तान और चीन की एक और कोशिश नाकाम हो गई. भारत ने इस बैठक पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है.
  • शिनजियांग डायरी का ये आखिरी हिस्सा चीन से लौटने के करीब महीने भर बाद लिख रही हूं. इसलिए नहीं कि वक्त नहीं मिला या इच्छा नहीं हुई, बल्कि इसलिए कि इस बीच इस पर मेरी बनाई डॉक्युमेंट्री 'चीन का चाबुक' ऑन एयर हो गई और मैं देखना चाहती थी कि इस पर प्रतिक्रिया क्या होती है. क्योंकि सीधे तौर पर भारत से जुड़ा मुद्दा नहीं है तो यह भी लगा कि पता नहीं लोग देखें ना देखें. लेकिन यूट्यूब पर सवा लाख से भी ज्यादा लोगों ने देखा और अधिकतर ने सराहा. कुछ ने कुछ सवाल भी पूछे.
  • इससे उन्हें डीरैडिकलाज़ करने में आसानी होती है और वो कोई ना कोई काम सीख कर सरकार की दी आर्थिक मदद के ज़रिए एक सामान्य चीनी नागरिक के तौर पर जीवनयापन कर सकते हैं. सुनने में बुरा नहीं लगता, जब तक कि आप जाकर खुद इन सेंटरों में रह रहे लोगों से बात नहीं करते. बात करने के बाद अधिकारियों की बात सिर्फ दलील लगने लगती है. कम से कम मुझे यही लगा.
  • मैं 16 अगस्त की शाम चीन के उइघर मुस्लिमों के सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश उइघर ऑटोनोमस प्रोवंस की राजधानी उरमुची शहर पहुंची. यह खुद चीन की सरकार के आमंत्रण पर था. मकसद था पश्चिमी मीडिया में उइघरों के बारे में चीन की दमनकारी नीतियों की 'सच्चाई' दिखाना. मैं भी लगातार इस तरह की खबरें देख-सुन और पढ़ रही थी. मन में कई सवाल थे और खुद पड़ताल करने की इच्छा.
  • चीन सरकार के बुलावे पर मैं इस समय उरुमुची में हूं. आज उरुमुची के इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टिट्यूट जाने का मौक़ा मिला. वहां, पर छात्रों को इमाम के काम के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. छात्रों को मासिक भत्ता भी मिलता है. क़ुरान की पढाई में भी छात्र यहां महारत हासिल करते हैं.
  • विदेश सचिव एस जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की शुरू की हुई परंपरा को बरक़रार रखा है. सुषमा स्वराज विदेशों में मुश्किलों में फंसे भारतीयों की मदद ट्विटर के ज़रिए करती रहीं और इस वजह से काफी लोकप्रिय भी हुईं.
  • मामला बिगड़ता गया क्योंकि आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में पीएम मोदी पर जो सवाल उठे उसमें चुनाव आयोग क्लीन चिट देता गया. इस पर चुनाव आयोग के अंदर का मतभेद खुल कर सामने आ गया, जब चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखी चिट्ठी में उनकी अलग राय को रिकॉर्ड नहीं करने की बात सामने आई. उसके बाद लाख सफाई भी काम ना आई.
  • वो दुनिया के अलग-अलग अलग हिस्सों से आए, कोई इंग्लैंड, कोई अमेरिका, कोई ऑस्ट्रेलिया कोई डेनमार्क, कोई फिलीपींस. मदद की पेशकश हर जगह से. थाइलैंड के चिरांग राई में दो हफ्ते से गुफा में फंसे जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्यों के लिए.
  • एक साल के भीतर भारत के नौ राज्यों में व्हॉट्सऐप (WhatsApp) पर बच्चा चोरी की अफवाहों के कारण 27 मासूम लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. फेक न्यूज़ का यह सबसे वीभत्स रूप है, लेकिन इसके और भी चेहरे हैं, और हर तरफ नज़र आ रहे हैं. फेक न्यूज़ या फिर झूठी ख़बर कभी जाने-पहचाने चेहरों के ज़रिये आप तक पहुंचती है, कभी सोशल मीडिया पर छिपे हुए लोगों की फैलाई हुई होती हैं. कई बार अपने विचारों के कारण लोग फेक न्यूज़ पर भरोसा करते हैं या फिर जिनके ज़रिये उन तक वह झूठी ख़बर पहुंची है, उन पर भरोसे के कारण ख़बर पर भी भरोसा हो जाता है. लेकिन फेक न्यूज़ का हर अवतार घातक है, किसी न किसी तरह. लोगों को मार डालना एक उदाहरण है. हमने फेक न्यूज़ के कारण दंगे, तनाव भी भड़कते देखे हैं, समुदायों में वैमनस्य पनपना देख रहे हैं. लेकिन तब क्या होता है, जब कोई नेता, वह नेता, जिस पर इस बात की ज़िम्मदारी है कि वह तथ्यों को लेकर झूठ नहीं बोलेगा, लोगों को बहकाएगा नहीं, झूठ बोलता है...? पत्रकार के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी हर ख़बर को देख-परखकर ही उसे दर्शकों या पाठकों तक पहुंचाने की होती है, लेकिन जब फेक न्यूज़ वायरल बुखार की तरह फैल जाए, तब क्या...?
  • मेरी आंखें बार-बार भर आ रही थीं. उन पुरानी तस्वीरों, अखबार की कतरनों को देख-पढ़ कर सिहर जा रही थी. ये अमेरिकी इतिहास का सबसे डरावना और शर्मनाक पन्ना है. अमेरिका के अलबामा राज्य के मौंटगोमरी शहर में 26 अप्रैल, 2018 को खोला गया लेगेसी म्यूज़ियम ठीक उस जगह पर बना है जहां एक गोदाम में अफ्रीकी-अमेरिकी गुलामों को रखा जाता था.
  • डोकलाम में भारतीय और चीनी सेना आमने सामने थी. पीछे से हर कूटनीतिक कोशिश की जा रही थी इस बेहद तनावपूर्ण स्थिति को सुलझाने की. ये स्थिति दो महीनों से भी ज्यादा तक बनी रही. आखिर अचानक 28 अगस्त 2017 को दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गईं. कहा गया कि मामला सुलझा लिया गया है. लेकिन तब से लेकर अब तक बयानों का जो सिलसिला है उससे तो यही लगता है कि स्थिति साफ होने की बजाय उतनी ही धुंधली है जितनी पहले दिन थी.
  • हम में से जो भी कभी अहमदाबाद नहीं भी गए हैं वो भी थोड़ा थोड़ा उस शहर को जानने लगे हैं. ये कमाल है प्रधानमंत्री मोदी का. असल में विश्व के बड़े नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद ले जाने की शुरुआत जब से की है, तब से ये होने लगा है.
  • डोकलाम इलाके में भारत और चीन की सेना को आमने-सामने खड़े एक महीना होने को आया. दोनों में से कोई भी सेना पीछे हटने की जल्दी में नहीं. जिस इलाके को चीन प्राचीन काल से अपना बताकर सड़क बनाने की बात कर रहा है और भारत को पीछे हटने को कह रहा है, भारत लगातार उसे भूटान का क्षेत्र बताते हुए चीन को पीछे हटने को कह रहा है. भूटान की जमीन पर भारत का यह रुख इसलिए है क्योंकि भूटान से उसका रणनीतिक समझौता है जिसके तहत सैन्य मदद उसे मिलती है.
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