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क्रांति संभव

2003 से NDTV इंडिया में कार्यरत. फिलहाल न्यूज़ एंकर और एडिटर, ऑटोमोबील्स. तमाम न्यूज़ शो के साथ-साथ 14 साल से 'रफ़्तार' कार्यक्रम भी कर रहे हैं. लिखने का शौक़ है तो गाड़ियों के अलावा भी कई मुद्दों पर हाथ साफ कर लेते हैं, जिनमें राजनीति और संगीत ख़ास हैं. आमतौर पर व्यंग्य लिखते रहे हैं.

  • क्या आप दिल्ली में रहते हैं? या रहे हैं? या फिर कभी आते-जाते रहे हैं? या टीवी न्यूज़ देखते हैं? इनमें से कोई भी एक सवाल का जवाब सही है तो फिर आपने भी वो देखा होगा जिस पर इस ब्लॉग का शीर्षक आधारित है।
  • मैं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की तरफ़ बिना किसी भूमिका के एक सवाल उछाल रहा हूं, वैसे उसमें एक चैलेंज का भी फ़्लेवर तो है। या कहें कि केजरीवाल जी से दोनों के बीच के भाव के साथ यह पूछ रहा हूं कि ट्रैफ़िक दुरुस्त करने के लिए क्या वह दिल्लीवालों के चंगुल से फ़ुटपाथों को छुड़ाने का काम कर सकते हैं?
  • भले ही ऑड ईवन स्कीम की जयजयकार हो रही हो लेकिन यह सोचने वाली बात है कि पिछले प्रयोग का ग़लत निष्कर्ष तो नहीं निकाल लिया हमने?
  • सब सीसीटीवी कैमरे के सामने हुआ था, जो बार बार टीवी चैनलों पर देखा गया था। कैसे सड़क पार करता सिद्धार्थ एक बेतहाशा आ रही ग्रे रंग की पुरानी मर्सिडीज़ कार की चपेट आ गया। कैसे एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया, कुछ दोस्तों ने अपना दोस्त खो दिया।
  • पंद्रह दिन के एक-एक घंटे को टटोल टटोल कर मत काटिए... नतीजा नाटकीय नहीं होने जा रहा है, ना तो उतना सकारात्मक, जितनी उम्मीद आप समर्थक कर रहे हैं और ना नकारात्मक जैसी मोदी समर्थक उम्मीद कर रहे हैं।
  • देश के बाकी हिस्सों में नया साल का पहला दिन लोगों ने गुज़ारा एक दूसरे से हैप्पी न्यू ईयर बोल कर। दिल्ली में हैप्पी न्यू ईयर के साथ एक सवाल भी जोड़ा 'ऑड या ईवन' और इस सवाल का मेरा जवाब था- ईवन।
  • अाजकल फ़िल्में जितनी स्क्रीन पर उतरती हैं, उतने ही रिव्यू भी देखने को मिलते हैं। अख़बार और टीवी तो हैं ही, सोशल मीडिया पर भी जनता वन स्टार और टू स्टार देकर फ़िल्म की धुर्री कर देती है।
  • दरअसल धुआं छोड़ती लाखों गाड़ियां हर रोज़ इसलिए निकलती हैं क्योंकि मजबूरी है। जो शहर में 30-35 फ़ीसदी प्रदूषण की ज़िम्मेदार हैं। दिल्ली में सबसे ज़्यादा प्रदूषण सड़कों और कंसट्रक्शन से निकलने वाली धूल से होता है, फिर ट्रक और उसके बाद मोटरसाइकिल। कुल प्रदूषण में से 18-19 फ़ीसदी टू-व्हीलर्स की देन है।
  • अगर आप दक्षिण दिल्ली के मूलचंद से सराय काले ख़ां तक शाम में यानि पीक आवर में चलें तो पता चल जाएगा कि दिल्ली के प्रदूषण की सबसे बड़ी वजहों में से एक क्या है। वो है बेहद ख़राब ट्रैफ़िक मैनेजमेंट। नतीजा ये है कि दिल्ली की सड़कों पर आपको असल जंगलराज दिखेगा।
  • शहरी विकास मंत्रालय के एक सर्वे के मुताबिक हर दिन देश की लगभग 30 फ़ीसदी आबादी अपने रोज़ का सफ़र पैदल तय करती है और हर साल सड़क हादसों मे मरने वाले लोगों में से 10 फ़ीसदी पैदल यात्री ही होते हैं।
  • मार्क मार्केज़...जब से मैंने ये नाम सुना, तब से उनके नाम के साथ लोगों को यही कहते सुना है - आख़िर ये चीज़ क्या है मार्केज़, जिसने 2008 से हिला के रखा हुआ है मोटरसाइकिल रेसिंग की दुनिया को...
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