NDTV Khabar

  • रविवार देर रात दिल्ली में बिहार से पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद और कई बार विधायक रहे रघुनाथ झा का निधन हो गया. लेकिन बहुत कम लोगों को याद होगा कि 1990 में जब लालू यादव पहली बार मुख्यमंत्री चुने गए थे, अगर रघुनाथ झा की उम्मीदवारी नहीं होती तो शायद लालू की जगह रामसुंदर दास मुख्यमंत्री होते.
  • चारा घोटाले के एक मामले में जब से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू यादव को साढ़े तीन साल जेल की सजा हुई है, उसके बाद बिहार की राजनीति में ये कायास लगाये जा रहे हैं कि आखिर इस पूरे मामले से किसे नफा होगा और किसे नुकसान. अगर आप इस बात को समझना चाहते हैं तो इसके लिए आपको बिहार की वर्तमान राजनीति से इतर उसके पीछे की राजनीति को थोड़ा याद करना होगा. एक तरफ जहां वर्तमान में लालू यादव चारा घोटाले में एक बार फिर सजा काट रहे हैं, वहीं उनके कभी राजनीतिक सहयोगी और अब विरोधी नीतीश कुमार को ‘प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ' के मुफ्ती मोहम्मद अवार्ड से नवाजा जा रहा है.
  • राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने जब अपनी पार्टी में चुनाव समय से पहले कराने को घोषणा की तब इस संबंध में कई क़यास लगाए गए कि आख़िर इसके पीछे लालू यादव की असल मंशा क्या हैं? कुछ लोगों को लग रहा था शायद जेल जाने के डर से लालू अपनी पार्टी की कमान अपने ही परिवार में किसी और को दे सकते हैं. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव की औपचारिकता पूरी की गई उससे लगा कि लालू खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष दसवीं बार बनने के लिए चुनाव का तमाशा कर रहे हैं.
  • कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले कुछ दिनों में दो निर्णय लिए. एक उन्होंने झारखंड में पार्टी की कमान एक ऐसे व्यक्ति डॉक्टर अजय कुमार के हाथ में दी जो कुछ साल पहले ही पार्टी में आए हैं. दूसरा राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव के पुत्र और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने साथ भोजन किया.
  • इस साल के सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों में बिहार का सत्ता परिवर्तन यानी सत्ता से राजद की विदाई और भाजपा के साथ नीतीश कुमार का सरकार बनाना भी शामिल है. 26 जुलाई यानी जिस दिन और जिस समय नीतीश ने इस्तीफ़ा दिया, उसके कुछ घंटे पहले तक दिल्ली से लेकर पटना तक कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़ दें तो किसी को इस राजनीतिक परिवर्तन का अंदाज़ा तक नहीं था.
  • ये हेडलाइन पढ़ने में निश्चित रूप से अटपटी लग रही होगी. ख़ासकर इस वाक्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में दिये गए भाषण के बाद अगर किसी ने दुहरा दिया होता तो शायद उसका लोग, ख़ासकर नाराज़ छात्र इलाज कर देते.
  • इस बात में कोई शक नहीं कि अगर राजनेताओं और उनकी राजनीतिक चाल के लिए सालाना ओलम्पिक होता तो इस साल की राजनीतिक उलटपलट में सबसे लंबी उल्टी छलांग लगाने की श्रेणी में नि:संदेह गोल्ड मेडल बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार को मिलता. नीतीश कुमार की जो भी राजनीतिक मजबूरी रही हो लेकिन उनकी पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बनी एक सशक्त नेता की छवि धूमिल हुई.
  • पिछले एक हफ़्ते से अधिक से देश की राजनीति में जो भूचाल आया है उसके केंद्र में हैं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा. उनके एक अख़बार में लिखे लेख के बाद पहली बार देश की आर्थिक व्यवस्था चर्चा के केंद्र में है.
  • तेजस्वी यादव देश के उन गिने चुने नेताओं में से एक हैं जिन्होंने अपने छोटे से राजनीतिक करियर में इतने उतार-चढ़ाव देख लिए हैं जिसे कुछ लोग पूरे जीवन में नहीं देख पाते. तेजस्वी को जितनी जल्दी ऊंचाई मिली उससे कही तेजी से धरातल भी देखने को मिल रहा है.
  • बिहार की राजनीति में पिछले हफ्ते जो हुआ, उस पर पूरे देश में बहस जारी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस नाटकीय घटनाक्रम में महागठबंधन को अलविदा कहते हुए बीजेपी के साथ सरकार बनाई, उससे खुद पटना से दिल्ली तक बीजेपी के नेता हतप्रभ थे.
  • बिहार में पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से चले आ रहे राजनैतिक गतिरोध का अंत कब होगा, सब यही जानना चाहते हैं. कैसे होगा ये सबको मालूम है लेकिन जो भी होगा, राज्य और देश की राजनीति पर उसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा.
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तबीयत खराब है और सोमवार को जनसंवाद समेत उनके मीडिया से रूबरू होने के तय कार्यक्रम रद्द हो गए हैं. नीतीश कुमार की बीमारी का कारण वायरल बुखार बताया जा रहा है.
  • रघुबर दास के राज्य में मांस-मछली की  खरीद-बिक्री बिना लाइसेंस के नहीं हो सकती और सरकार गाय के मांस की खरीद-बिक्री पर सख्ती से पाबंदी चाहती है. वहीं, नीतीश कुमार बिहार के लोगों को शराब की लत से दूर रखना चाहते हैं.
  • अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि राज्य सरकार इस साल के परीक्षा परिणामों को कितनी बड़ी चुनौती के रूप में लेती है. अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहें तो इस ख़राब परिणाम की बुनियाद पर बिहार के छात्रों के स्वर्णिम भविष्य की बुनियाद रख सकते हैं.
  • पूरे देश में इन दिनों EVM पर खुली बहस समय की बर्बादी है. इस बारे में अगर आप बिहार में होने वाले चुनाव और उसमें शामिल होने वाले राजेनताओं एवं राजैनतिक कार्यकर्ताओं से एक बार पूछ लेंगे तब शयद आपका भी जवाब यही होगा.
  • इन दिनों हर कोई यही जानना चाहता है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अभूतपूर्व जीत का बिहार की राजनीति पर क्या असर होगा. निश्चित रूप से इसका प्रभाव बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में दिखेगा. यह सच बिहार की राजनीति के पुरोधा भी जानते हैं.
  • बिहार में रविवार को बहुत कुछ हुआ... कुछ घटना ऐसी हुई जो पहले न सुनी गयी न देखी गयी. ऐसा क्या हुआ और क्यों हुआ लेकिन जो भी हुआ सब कहते हैं ये तो आज नहीं तो कल होना ही था . हां, रविवार को राज्य के इतिहास में पहली बार एक चुनी हुई राज्य सरकार के खिलाफ शिकायत और और अपना अविश्वास जगजाहिर करते हुए राज्य के 80 से अधिक आईएएस अधिकारी राजभवन मार्च ही नहीं किया बल्कि राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा. और ये भी घोषणा कर डाली कि आने वाले दिनों में राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी से मिलकर अपनी गुहार लगाएंगे.
  • बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले जनता दल यूनाइटेड का एक नारा था, "बिहार में बहार हैं नीतीशे कुमार हैं", लेकिन शनिवार को नीतीश कुमार के शराबंदी से नशाबंदी तक के कार्यक्रम की सफलता के बाद ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि 'बिहार में बदलाव हैं नीतीशे कुमार हैं'. इस पूरी मानव श्रृंखला को एक दिन के इवेंट के रूप में देखना शायद नाइंसाफी होगी.
  • नीतीश कुमार को लग रहा होगा कि अगर मोदी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है तो बिहार मॉडल को देर सबेर अपनाना होगा और शायद यह नोटबंदी के मुद्दे पर उनके कदम का असल प्रमाण होगा.
  • राजनीतिक जानकार कहते हैं कि नीतीश जो बेनामी सम्पति को लेकर इतने चिंतित हैं, क्या वो दावा कर सकते है कि बिहार में उनके किसी मंत्रीमंडल के सहयोगी के पास कोई काला धन या कोई बेनामी सम्पति नहीं है.
«123»

Advertisement