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  • बिहार की राजनीति में पिछले हफ्ते जो हुआ, उस पर पूरे देश में बहस जारी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिस नाटकीय घटनाक्रम में महागठबंधन को अलविदा कहते हुए बीजेपी के साथ सरकार बनाई, उससे खुद पटना से दिल्ली तक बीजेपी के नेता हतप्रभ थे.
  • बिहार में पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से चले आ रहे राजनैतिक गतिरोध का अंत कब होगा, सब यही जानना चाहते हैं. कैसे होगा ये सबको मालूम है लेकिन जो भी होगा, राज्य और देश की राजनीति पर उसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा.
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तबीयत खराब है और सोमवार को जनसंवाद समेत उनके मीडिया से रूबरू होने के तय कार्यक्रम रद्द हो गए हैं. नीतीश कुमार की बीमारी का कारण वायरल बुखार बताया जा रहा है.
  • रघुबर दास के राज्य में मांस-मछली की  खरीद-बिक्री बिना लाइसेंस के नहीं हो सकती और सरकार गाय के मांस की खरीद-बिक्री पर सख्ती से पाबंदी चाहती है. वहीं, नीतीश कुमार बिहार के लोगों को शराब की लत से दूर रखना चाहते हैं.
  • अब सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि राज्य सरकार इस साल के परीक्षा परिणामों को कितनी बड़ी चुनौती के रूप में लेती है. अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहें तो इस ख़राब परिणाम की बुनियाद पर बिहार के छात्रों के स्वर्णिम भविष्य की बुनियाद रख सकते हैं.
  • पूरे देश में इन दिनों EVM पर खुली बहस समय की बर्बादी है. इस बारे में अगर आप बिहार में होने वाले चुनाव और उसमें शामिल होने वाले राजेनताओं एवं राजैनतिक कार्यकर्ताओं से एक बार पूछ लेंगे तब शयद आपका भी जवाब यही होगा.
  • इन दिनों हर कोई यही जानना चाहता है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अभूतपूर्व जीत का बिहार की राजनीति पर क्या असर होगा. निश्चित रूप से इसका प्रभाव बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में दिखेगा. यह सच बिहार की राजनीति के पुरोधा भी जानते हैं.
  • बिहार में रविवार को बहुत कुछ हुआ... कुछ घटना ऐसी हुई जो पहले न सुनी गयी न देखी गयी. ऐसा क्या हुआ और क्यों हुआ लेकिन जो भी हुआ सब कहते हैं ये तो आज नहीं तो कल होना ही था . हां, रविवार को राज्य के इतिहास में पहली बार एक चुनी हुई राज्य सरकार के खिलाफ शिकायत और और अपना अविश्वास जगजाहिर करते हुए राज्य के 80 से अधिक आईएएस अधिकारी राजभवन मार्च ही नहीं किया बल्कि राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा. और ये भी घोषणा कर डाली कि आने वाले दिनों में राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और विपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी से मिलकर अपनी गुहार लगाएंगे.
  • बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले जनता दल यूनाइटेड का एक नारा था, "बिहार में बहार हैं नीतीशे कुमार हैं", लेकिन शनिवार को नीतीश कुमार के शराबंदी से नशाबंदी तक के कार्यक्रम की सफलता के बाद ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि 'बिहार में बदलाव हैं नीतीशे कुमार हैं'. इस पूरी मानव श्रृंखला को एक दिन के इवेंट के रूप में देखना शायद नाइंसाफी होगी.
  • नीतीश कुमार को लग रहा होगा कि अगर मोदी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ गंभीर है तो बिहार मॉडल को देर सबेर अपनाना होगा और शायद यह नोटबंदी के मुद्दे पर उनके कदम का असल प्रमाण होगा.
  • राजनीतिक जानकार कहते हैं कि नीतीश जो बेनामी सम्पति को लेकर इतने चिंतित हैं, क्या वो दावा कर सकते है कि बिहार में उनके किसी मंत्रीमंडल के सहयोगी के पास कोई काला धन या कोई बेनामी सम्पति नहीं है.
  • निश्चित रूप से आने वाले दिनों में नीतीश कुमार को अपना रुख और नज़रिया साफ रखना होगा. उन्हें भी मालूम है कि उनके सहयोगी और समर्थक इस मुद्दे पर भी उनकी बात उनके बेबाक स्टाइल से ही सुनना चाहते हैं, और समर्थकों के मुताबिक अभी तक उनका स्वर और तेवर स्पष्ट नहीं हैं.
  • लेकिन बिहार की तरह ही उत्तर प्रदेश में मुलायम-अखिलेश अगर बीजेपी को मात देना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले आपसी विवाद खत्म करने होंगे, या कम से कम 'अपनी ढफली, अपना राग' तो बंद करना ही होगा. उसके बाद सभी सहयोगियों को साथ रखने और साथ-साथ प्रचार करने की रणनीति बनानी होगी, क्योंकि ऊपर-ऊपर तालमेल करने से चुनाव में जीत हासिल नहीं हो सकती.
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनता दल ( यूनाइटेड ) का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने दो महीने से अधिक हो गए लेकिन उन्होंने अपनी टीम का ऐलान अभी तक नहीं किया है।
  • पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अंतिम चरण के मतदान के साथ बृहस्पतिवार को संपन्न हो गया। यह चुनाव अब तक सबसे निष्पक्ष चुनाव था। इस चुनाव में किसी दल को न तो अपने विरोधियों को डराने का मौका मिला न ही चुनाव आयोग पर आरोप लगाने का बहाना मिला।
  • पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार का काम शुरू हो चुका है। हर राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर रहा है। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दल व कांग्रेस के नए गठबंधन के बीच होगा।
  • बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम को अब एक महीने होने वाला है, जहां जनता दल (यूनाइटेड), लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस परिणाम से खुश हुए वहीं बीजेपी ने हार के कारणों को जानने के लिए परिणाम के तुरंत बाद से समीक्षा शुरू कर दिया।
  • बिहार विधानसभा चुनावों की अधिसूचना अब किसी भी दिन चुनाव आयोग की घोषणा के साथ जारी हो सकती है। इस देश में हर राजनीतिक दल, हर राजनेता, हर राजनीतिक कार्यकर्ता को बस बिहार के चुनाव के परिणाम का इंतजार है।
  • बीजेपी के लिए विधान परिषद चुनावों में 11 सीट जीतना निश्चित रूप से उनके आकलन से अधिक था। बीजेपी के वरिष्ठ नेता मान रहे थे कि वो ज्यादा से ज्यादा 10 सीटें जीतेंगे।
  • बिहार में इन दिनों बीजेपी अपने सहयोगियों से परेशान है। लोकसभा चुनाव में सहयोगियों के साथ चुनाव प्रचार को लेकर सीटों का तालमेल जितना आसान और आक्रामक था, विधानसभा चुनाव के दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वही सहयोगी उसके लिए हर दिन अपने नए बयान से मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
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