NDTV Khabar

  • इस मामले पर कुछ 'धर्मयोद्धा' मन ही मन नाराज़ हैं, लेकिन आएदिन हर विषय पर राय रखने वाले इन 'धर्मयोद्धाओं' के होठ सिल गए हैं. दरअसल, ये बड़ा धर्म देख रहे हैं. ये धर्म की व्यापकता में भरोसा रखते हैं. यही वजह है कि इनके मुख से कोई आवाज़ नहीं आई, और जब मूर्ति का अनावरण हो रहा था, तो यही धर्मयोद्धा तालियां बजा रहे थे.
  • ओरिजनल सीरीज (Original Web/real series) की पहली और अनिवार्य शर्त यह है वह अपनी "आत्मा" अपने "मिजाज व चरित्र" (पटकथा, फिल्मांकन, डायलॉग, अभिनय, वगैरह-वगैरह) के लिहाज से "वास्तविकता" सामने लेकर आए!! पता नहीं मिर्जापुर (#Mirzapur Part-1) भाग-1 कितने प्रतिशत वास्तविक थी और कितनी काल्पनिक, लेकिन पहला भाग वास्तविकता के दर्शन कराने में कामयाब रहा था. पहले भाग में लेखक पूरी तरह महसूस कराने में यह असल ही है!! कई सीन (फिल्मांकन) गैंग्स ऑफ वासेपुर से "प्रेरित" थे, लेकिन यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं था!! वास्तव में जो स्तर सेक्रेड गेम्स ने स्थापित किया, उसे मिर्जापुर भाग-1 और आगे लेकर गया था. लोगों को भरपूर मजा आया, भारी सफलता मिली और नए मानक स्थापित हुए.
  • यह फिल्म भारतीय सिनेमा सहित कई लोगों मतलब यशराज बैनर और किंग खान के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई! अमिताभ बच्चन के बाद भारतीय सिनेमार के सबसे बड़े सुपरस्टार शाहरुख खान का करियर 360 के कोण पर घूम गया! मंगलवार (20 अक्टूबर) को 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' की रिलीज को पूरे 25 साल हो जाएंगे, लेकिन आज भी यह फिल्म किसी ताजे हवा के झोंके की तरह है.
  • यह 'माही मैनेजमेंट' का अपना नज़रिया था और वर्तमान में जीने के नज़रिये से माही सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़ते गए. ऐसा मैनेजमेंट, जिसे बाद में साल 2011 में बेंगलुरू के IFIM बिज़नेस स्कूल में पाठ्यक्रम में शामिल किया गया. इसे पाठ्यक्रम में धोनी की नेतृत्व क्षमता के बारे में एक अनिवार्य पेपर के रूप में शामिल किया गया
  • आखिर पुलिस विक्रम जोशी के मरने के बाद जागी नहीं, जगाई गई. और फिर वही पुराना रटा-रटाया लीपापोती का बहुत ही घटिया और बासी हो चुका फॉर्मूला, चौकी इंचार्ज, एसओ या सीओ का निलंबन, परिवार को कुछ आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी. लीपापोती का एक बेहतरीन तरीका. क्या इससे परिवार के नुकसान की भरपायी हो जाएगी? क्या इससे उन दस और छह साल की बेटियों के आगे से ताउम्र उनके पिता की हत्या की तस्वीरें मिट पाएंगी? क्या ये बेटियां इस घटना से उबर पाएंगी? पुलिस की क्या छवि बनेगी इन बेटियों की नजरों में?
  • 'मेथड एक्टिंग' में संजय दत्त बनना रणबीर कपूर के लिए एक बार को आसान है, लेकिन इरफान खान ने अपनी सहजता से पान सिंह तोमर को 'कूल डाकू' बना दिया! न सुनील दत्त की तरह माथे पर टीका और न "खून पी जाऊंगा", "आग लगाकर राख कर दूंगा" जैसी आक्रामकता, लेकिन इरफान खान ने पान सिंह तोमर को जनता के दिलों में बसने पर मजबूर कर दिया!
  • COA के सदस्यों विनोद राय और डायना एडुल्जी के आपसी मतभेद के कारण खुद सीओए और पूरा मामला और उपहास और चिंता के विषय में तब्दील हो गया है. कारण यह है कि इस जांच के 'ड्रामे' ने हार्दिक पंड्या और केएल राहुल के भविष्य को दांव पर लगा दिया है, जो पहले ही कहीं ‘ज्यादा सजा’ भुगत चुके हैं.
  • यह वह समय था, जब भाग्य शाहरुख से चार कदम आगे चल रहा था! जरा कल्पना कीजिए अगर शाहरुख की साइन की पहली फिल्म दिल आशना है पहले रिलीज हो जाती होती, तो क्या होता? यह करीब 1988 का समय था, जब हेमा मालिनी प्रोडक्शन हाउस से शाहरुख के पड़ोसी के घर फोन आया
  • इंग्लैंड के खिलाफ हालिया संपन्न पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी टेस्ट की दूसरी पारी में केएल राहुल और ऋषभ पंत ने अपनी शतकीय पारियों से सीरीज की स्कोर लाइन 3-2 करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन आखिर में भारत को 4-1 से हार का कलंक वहन करने पर मजबूर होना पड़ा.
  • आखिरकार कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर पहली बार इतिहास में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए तैयार है. इमरान खान के नेतृत्व वाली तहरीक-ए-इंसाफ 110 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है. सबकुछ योजनाबद्ध रहा है!! और इमरान की पार्टी को आसानी से किसी दूसरी पार्टी या निर्दलीय विजेता उम्मीदवारों से समर्थन मिल जाएगा.
  • कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार मिले इस बड़े मंच पर राहुल गांधी के बाद इन सब तमाम बातों के लिहाज से और स्कोर करने का अच्छा मौका था, लेकिन उन्होंने इसे इसे पूरी तरह से गंवा दिया. वास्तव में, यह अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष के प्रहार, प्रधानमंत्री के जवाब से कहीं ज्यादा राहुल गांधी की ‘हगिंग और विंकिंग’ के लिए ज्यादा याद किया जाएगा
  • मोहम्मद कैफ भारत के सर्वकालिक सीमित योग्यता बल्लेबाजों में से एक रहे हैं. क्रिकेट प्रशंसकों के जहन में बमुश्किल ही कैफ की गेंदबाज के सिर के ऊपर से छक्का मारने की तस्वीरें जहन में कौंधती होंगी. और यह आसानी से समझ भी आता है क्योंकि कैफ की सारी ताकत सिंगल्स और डबल्स में निहित थी
  • केएल राहुल ने पिछले करीब एक-दो सालों में अपने ऊपर जर्बदस्त काम किया. एक वक्त राहुल के छक्के सीमारेखा पार नहीं कर पाते थे. कोच से बात की, तो जवाब आया-‘स्टेडियम से बाहर गेंद पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम करो’, नतीजा सामने है. टॉप एज (बल्ले का बाहरी किनारा), फ्लिक से गेंद सीमारेखा से कहीं आगे गिर रही है
  • सबसे पहले संगठित हों। संगठित होंगे तभी तो वोट बैंक बनेंगे। इसका फायदा यह होगा कि कोई भी राजनैतिक दल आपके आरक्षण की मांग का विरोध नहीं करेगा। भारत के लिए वर्ल्ड बैंक उतना ज़रूरी नहीं, जितना कि वोट बैंक है जिसमें हर दल सेविंग करना चाहता है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तबियत ठीक नहीं चल रही है। आजकल वह 'महिलेरिया' से पीड़ित हैं। एक बाद एक चार बीजेपी महिला मंत्रियों ने उनके ताक़तवर शरीर को संक्रमित कर दिया है। उनके गले से आवाज़ नहीं निकल पा रही। उनकी दहाड़ को खामोश कर दिया है।
  • हिन्दू संगठन वाले ये नहीं जानते कि हिन्दू धर्म में धर्म-परिवर्तन करवाने की कोई विधि नहीं है, कोई व्यवस्था नहीं है। अब हिन्दू संगठन वाले कौन सा वेद मन्त्र पढ़ कर धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं ये वही जाने।
  • अयोध्या विवाद का निपटारा अदालत के फैसले से नहीं हो सकता। निपटारा तभी होगा, जब दोनों धर्मों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखते हुए मिल-बैठकर बात करेंगे। अगर दोनों पक्ष अंसारी जैसा ही फैसला ले पाएंगे, तो सदियों पुराना विवाद खत्म हो सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट की टिपण्णी को डेढ़ साल हो चुका है, लेकिन तोता कल भी पिंजरे में था, आज भी है... एक तोता भले ही आज रिटायर होकर आज़ाद हो गया, लेकिन यह भी तय है कि कल दूसरा तोता आ जाएगा... दरअसल, तोते बदलने से बेहतर है, इंतज़ार करना - पिंजरे के टूटने का, और तोते के आज़ाद हो जाने का...
  • इस 26 नवंबर को मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में छह महीने पूरे हो जाएंगे। सिर्फ छह महीनों में ही प्रधानमंत्री के रूप में मोदी नौ देशों का दौरा कर चुके हैं। अगर वाजपेयी का और मनमोहन सिंह का रिकॉर्ड देखें तो उन दोनों का सालाना औसत सिर्फ सात विदेश यात्राओं का था, मोदी के विदेश यात्राओं से कहीं कम।
  • किताबों में पढ़ा था कि संत 'कीचड़ में कमल' की तरह होता है, कीचड़ में रहते हुए भी कीचड़ से अलग... संसार में रहते हुए भी सांसारिक सुखों से उदासीन, लेकिन आजकल के बाबाओं को देखकर लगता है कि वे कीचड़ पर लोटना ज्यादा पसंद करते हैं...
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