NDTV Khabar
होम | ब्लॉग |   निधि कुलपति 

निधि कुलपति

न्यूज ट्रैक से 1991 में करियर की शुरुआत करने वालीं निधि कुलपति ने बाबरी मस्जिद विध्वंस पर काफी रिपोर्टिंग की है. लंदन से जर्नलिज्म करने के बाद उन्होंने डीडी, टीवीआई, जी न्यूज, बीबीसी और फिर एनडीटीवी में काम किया है. फिलहाल भारतीय राजनीति के अलावा कई अहम सामाजिक मुद्दों पर प्राइम टाइम से लेकर कई शो करती हैं.

  • कैराना को लगातार सुलगाया जा रहा है। शुक्रवार को बीजेपी के सरधना से विधायक संगीत सोम ने कैराना में हिन्‍दुओं के कथित पलायन को लेकर पैदल निर्भय यात्रा निकालने की कोशिश की। इकठ्ठा की गई इस भीड़ को संगीत सोम सरधना से कैराना तक ले जाना चाह रहे थे। लेकिन 2 किमी बाद ही इसे रोक लिया गया।
  • नरेंद्र मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने ट्रिपल तलाक के मसले पर अपना आपा खो दिया। मुस्लिम समाज में महिलाओं के एक तबके में कदम उठ रहे हैं जो इस रूढ़‍िवादी रवायत को बदलना चाहते हैं।
  • मथुरा की हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है। यह सवाल शायद मन को कुरेदता रहेगा। अवैध कब्जाने वाले इस कदर हिंसक हो गए कि एसपी सिटी को सीधे माथे पर गोली मार दी। मुकुल द्विवेदी के साथ एसओ संतोष यादव भी मारे गए। दो पुलिस वालों समेत 24 लोगों की जान चली गई।
  • उनकी 125वीं जयन्ती के मौके को देशभर में धूम धाम से मनाया जा रहा है। शायद पहली बार है कि उनकी जयन्ती पर लगभग हर राष्ट्रीय स्तर की पार्टी उनको नमन कर रही है। केन्द्र की सत्ताधरी बीजेपी हो या विपक्ष में बैठी कांग्रेस या फिर दिल्ली की आम आदमी पार्टी, सब अपने स्तर पर भीमराव अम्बेडकर का गुणगान कर रहे हैं।
  • आजाद भारत के इतिहास में सबसे खराब सूखा है इस बार। जब दक्षिण एशिया में बांधों के विशेषज्ञ हिमांशु ठक्‍कर ने कहा तो इस बार पानी की किल्लत की भयावह स्‍थि‍ति कुछ समझ में आयी। सुप्रीम कोर्ट भी सूखे को लेकर चिंतित है। उसने लगातार केंद्र के ढीले रवैये को लेकर सवाल उठाए।
  • जन के नहीं, लेकिन जन-प्रतिनिधियों के अच्छे दिन आ गए हैं। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना... यहां विधायकों और मंत्रियों की तनख्वाह दोगुनी-चौगुनी हो रही है। महंगाई के इस दौर में इन्हें तो भरपूर राहत मिल रही है।
  • नैनीताल हाई कोर्ट अपना रुख मंगलवार को साफ करेगा उत्तराखंड की खण्डित राजनीति पर। राष्ट्रपति शासन के बावजूद हरीश रावत हार मानने वाले नहीं दिखते। क्या हरीश रावत और कांग्रेस आला कमान बहुत देर से जागे हैं?
  • तो एक बार फिर से अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। वो दिन जब दुनिया की आधी आबादी, हमारे देश की आधी आबादी, उसको मिल रहे मान-सम्मान, अधिकार, सहूलियतों को टटोलती, उनको आंकती है। 1911 से 8 मार्च महिला दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है और आज 105 साल बाद भी कोशिशें और सघर्ष जारी है।
  • 'फेयर एंड लवली' स्कीम से चोर काले धन को सफेद कर सकते हैं। संसद में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का ये वार मोदी सरकार को काफी समय तक खटकता रहेगा। सूट बूट की सरकार के तमगे की तरह मोदी सरकार की ये पहचान न बन जाये जिससे पीछा छुड़ाने के लिए सरकार को बजट में धोती कुर्ते वाले किसान याद आते रहे।
  • जेएनयू की जंग का असर आज पटियाला हाउस कोर्ट में देखने को मिला। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के मामले में सुनवाई के दौरान छात्रों, शिक्षकों और पत्रकारों के साथ मार-पीट हुई, उनको धमकाया गया, उनको देश विरोधी बताया गया।
  • जेएनयू में बवाल ने हम सब के सामने कई संगीन सवाल खड़े कर दिये हैं। क्या इस विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारों की आजादी होनी चाहिए? क्या देश की अखंडता के खिलाफ नारे लगाने वालों के पीछे कोई बाहरी ताकत है?
  • सवाल है कि प्रशासन के लोग इसे नार्को-टैररिज़्म (narco-terrorism) कहते हैं, लेकिन इसके बावजूद यह कैसे पनपता रहा... कौन हैं वे ताकतें, जो इसको नजरअंदाज करती हैं, इसे शह देती हैं, और हमारे देश की सुरक्षा से समझौता करती हैं...
  • तो दिल्ली में ऑड-ईवन प्रयोग का पहला दौर समाप्त हो गया...। कई लोग खुश हो रहे होंगे, नियमों से राहत भी महसूस कर रहे होंगे...लेकिन शायद इसकी सफलता से लग रहा है कि यह जल्दी खत्म हो गया। तो अब जब दिल्ली के प्रदूषण पर थोड़ा बहुत असर भी पड़ा है तो और क्या किया जा सकता है जिससे हवा सुधरे?
  • जानकारों का कहना है कि दिल्ली सरकार अगर विधानसभा में कोई प्रस्ताव पारित कर ठोस कदम उठाती तो वह ज़्यादा कारगर साबित होता... बहरहाल, क्या दिल्ली सरकार मैनेजमेंट कोटा सिर्फ खत्म करती दिखना चाहती है या सचमुच कर पाएगी, फिलहाल नज़रें कोर्ट पर हैं...
  • बुधवार को बीजेपी ने दिल्ली क्रिकेट संघ में धांधलियों को उठाने वाले अपने सांसद कीर्ति आजाद को पार्टी से सस्पेंड कर दिया। कई सालों से आजाद कोशिश में थे कि दिल्ली क्रिकेट में गहरी जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार पर अरसे से अध्यक्ष रहे अरुण जेटली कार्रवाई करें, लेकिन उनकी सुनी नहीं गई।
  • दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए लगातार घोषणाएं हो रही हैं। कभी दिल्ली सरकार, तो कभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं, जो वक्त की जरूरत भी है।
  • आम आदमी से बन गए खासम खास। दिल्ली में हमारे विधायकों की तनख्वाह 400 फीसदी बढ़ गई है। 88,000 से सीधे 1,85,000 और साथ ही विधानसभा क्षेत्र के नाम पर 50,000 रुपये। चार गुणा बढ़ गई है सैलरी कांग्रेस-बीजेपी का विकल्प बन कर आये विधायकों की।
  • बिहार में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं और इसी सरगरमी के बीच मुझे यहां एक बार फिर जाने का मौका मिल गया। पिछले साल लोकसभा चुनावों में पंजाब की बजाय बिहार को चुना था। एक उत्सुक्ता थी उस राज्य को समझने की जिसे कई मापदंडों में पिछड़ा हुआ बताया गया।
  • गणेशोत्सव पर गणपति की मूर्ति की स्थापित करना और फिर इसका विसर्जन, यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस उत्साह के बीच ज़रूरी है कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारियां भी निभाईं जाएं।
  • ये भी सही है कि हिन्दी के इस तरह के कायर्क्रमों से भाषा का प्रसार होता है। नेता और अफसर हिन्दी में लिखने को तव्ज्जो देंगे। अब मोबाइल फोन में इस तरह की सुविधा है जो आसानी से हिन्दी में लिखने में मदद करती है, भूल सुधार करती है। तो जो भी अवसर मिले भाषा को मजबूती मिल ही जाती है।
«123»

Advertisement